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नक्षत्र – उत्तरा भाद्रपद

रंगः जांबली
भाग्यशाली अक्षरः ड, झ, न और य

इस नक्षत्र का प्रतीक अंतिम संस्कार के खाट के पीछे दो पैर हैं , और इष्टदेव गोरखनाथ और अहिरभैरव और कुंडलिनी शक्ति के लिए ‘नागिन’ हैं | इस नक्षत्र के प्रतीक का मतलब ‘शुभ पैर’ होता हैं | इस नक्षत्र के गुण बहुत कुछ पूर्वा भाद्रपद के तरह ही होते हैं, लेकिन इन व्यक्तियों का गुस्से पर अधिक नियंत्रण होता हैं ये क्रूर और विनाशकारी कम होते हैं | उत्तर भाद्रपद लोग अपने विचारों को संचारित करने में ज्यादा उग्र नहीं होते है क्योंकि ये आलसी होते हैं | इनमें आत्म त्याग की प्रवृत्ति पायी जाती हैं | ये बहुत संकोची होते हैं और केवल कुछ ही लोगो से मिल्ते जुलते हैं | इस नक्षत्र के प्रभु शनि होते हैं |ये त्यागी, तनहाई को प्यार करने वाले और मानसिक रुप से आवेगी हो सकते हैं | इनकी ज्ञान की गहराई और सामूहिक चेतना इन्हे अहंकार के बंधन में नहीं बांध पाती हैं | ये परम ज्ञान प्राप्त करते हैं |यह एक योद्धा सितारा भी हैं और इसलिए इस तरह के लोग अपने लेखन और भाषण के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करते हैं | ये हंसमुख, उदार, और आत्म त्याग, और अपने प्यारो के प्रति अत्यंत रक्षात्मक होते हैं | इनका उग्र गुस्सा और यौन गतिविधियों में अधिक लिप्तता मुसीबत पैदा कर सकती हैं | ये अपने दुश्मनों का सफाया करने की ताकत रखते हैं | ये सीखने की अपार क्षमता रखते हैं और किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर लेते हैं | उत्तर भाद्रपद में जब चंद्रमा आता हैं तो इन्हें उपहार या विरासत धन प्राप्त होता हैं | इन्हे पक्षाघात, पेट की समस्याएं, बवासीर, और हर्निया से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं | पेशे से ये दान से संबंधित काम, तंत्र, श्मशान, और पुर्वा भाद्रपद की तरह कई नौकरियां कर सकते हैं |

गणेशजी के आशीर्वाद सहित
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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