कुंडली के नौवें भाव में सूर्य की महत्ता जातक को न्याय प्रिय, धार्मिक और सदाचारी बनाती है

वैदिक ज्योतिषी के अनुसार कुंडली का नौवां भाव धर्म भाव के नाम से भी जाना जाता है। वैसे नौवां भाव एक धार्मिक प्रवृत्ति, धार्मिकता, अच्छे कर्म कांड, नैतिकता, उच्च मूल्यों के अभ्यास और आध्यात्मिकता में रुचि के लिए भी होता है। नौवां भाव यह भी दर्शाता है कि क्या व्यक्ति पारंपरिक धार्मिक मूल्यों का पालन करेगा या उनके प्रति प्रश्न खड़े करेगा। साथ ही नौवां भाव व्यक्ति के भाग्य और उच्च शिक्षा की संभावनाओं को भी पूरा करता है। नौवें भाव से यह भी निर्धारित होता है कि भाग्य आपका कितना साथ देगा। इसलिए जिनकी कुंडली के नौवें भाव में सूर्य होता है वे आध्यात्मिकता के प्रति अत्यधिक झुकाव रख सकते हैं, और बहुत भाग्यशाली भी हो सकते हैं।

नौवें भाव में सूर्य के कारण प्रभावित क्षेत्र

रिश्ते और प्रेम जीवन

जीवन के प्रति दृष्टिकोण

नैतिकता और मूल्य प्रणाली

सामाजिक और सार्वजनिक छवि

सकारात्मक लक्षण/प्रभाव

कुंडली के नौवें भाव में सूर्य की उपस्थिति जातक को विदेशी भाषा या संस्कृति सीखने में रूचि होती है। ऐसे व्यक्ति एक धर्मार्थ और सदाचारी स्वभाव वाले भी हो सकते हैं। क्योंकि इनके पास आध्यात्मिक और धार्मिक प्रवर्ति का मस्तिष्क होता है। ऐसे जातक एक निश्चित दर्शन को स्वीकार कर लेते हैं और जीवन पर्यन्त उस पर चलते हैं, यद्यपि उसके बारे में इन्हें आश्वस्त होना चाहिए।

इसके अलावा, नौवें घर में सूर्य की उपस्थिति वाले जातक अपने रिश्तेदारों और जीवनसाथी या व्यावसायिक भागीदारों के प्रति बहुत घनिष्ठ और सौहार्दपूर्ण संबंध रखते हैं। ये वे काफी उदार होते हैं तो इन्हें अपने क़रीबी लोगों द्वारा पसंद किया जाता है। वे एक ही घनिष्ठता को बार बार दोहराते हैं जिससे एक स्वस्थ और मजबूत संबंध बना रहता है।

चूंकि ये जातक दार्शनिक झुकाव रखते हैं, इसलिए वे जीवन के पीछे के सत्य को खोजने के लिए तड़पते रहते हैं। ये अस्तित्व के अंतिम उद्देश्य की खोज करना चाहते हैं। ये उत्सुक होते हैं और अपने आसपास की दुनिया की खोज करते रहते हैं, जो इन्हें अधिक जानने और प्राप्त करने के लिए निकट और दूर के स्थानों की यात्रा करने के लिए भी प्रेरित करता है। क्या आप भी अपने भविष्य को लेकर उत्सुक हैं? 2020 विस्तृत वार्षिक राशिफल प्राप्त करें और इस साल के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें।

इसके अलावा, 9 वें भाव में सूर्य की उपस्थिति वाले जातक अपने आसपास के वातावरण में शांति और सद्भाव की इच्छा रखते हैं। यहाँ तक की वे ऐसा करने के लिए स्वयं भी दूसरों से साथ अच्छा व्यवहार करते हैं। 9 वें भाव में सूर्य की स्थिति वाले जातक आशावाद और सकारात्मकता से भरे हुए होते हैं। इनके पास एक संक्रामक उत्साह होता है, जो इन्हें बहुत प्रभावी तरीके से समस्याओं से निपटने में सक्षम बनाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 9 वें भाव में सूर्य की विद्यमानता के कारण जातक बड़ी संख्या में लोगों के जीवन को प्रभावित और प्रेरित कर सकते हैं।

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नकारात्मक लक्षण/प्रभाव

जिनकी कुंडली के नौवें भाव में सूर्य स्थित होता है, वे दूसरों में केवल अच्छी चीजों को देखते हैं। ये उनके नकारात्मक पहलुओं को देखने में असमर्थ होते हैं। यदि दूसरा व्यक्ति आपकी सकारात्मकता को स्वीकार नहीं करता है, तो वह आपसे उदार व्यवहार नहीं कर सकता है। यह आपकी आत्मा को ठेस पहुंचा सकता है, और अच्छाई में आपके विश्वास को ख़त्म कर सकता है।

इसके अलावा, जातक अपने विचारों के बारे में कुछ अभिमानी हो सकते हैं। इनका झुकाव स्वधर्म की ओर हो सकता है। ये विश्वास कर सकते हैं कि केवल इनके विचार ही सही और वास्तविक हैं। जिससे इनको परेशानी हो सकती है, क्योंकि ये दूसरों के साथ समस्याओं का सामना कर सकते हैं। जो इनके मन की शांति को भी छीन सकता है। क्या आप भी एक शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण जीवन चाहते हैं? अपनी जन्मपत्री खरीदें और अपने जीवन की समस्याओं को दूर करें।

ऐसे जातकों को समाज में अपनी स्थिति के बारे में बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। इन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि आसपास के क्षेत्र में कोई भी इन्हें नकारात्मक रूप में न देखे। इनके पास अपने व्यक्तित्व को विकसित करने और पेशेवर ऊँचाइयों को प्राप्त करने की क्षमता होती है। लेकिन फिर भी इन्हें बेहतर तरीके से अपने जीवन और भविष्य की योजना बनाने की आवश्यकता है।

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निष्कर्ष

कुंडली के नौवें भाव में सूर्य की उपस्थिति वाले जातक न्याय प्रिय, धार्मिक और सदाचारी होते हैं। ये बहुत सकारात्मक और उत्सुक भी होते हैं। इसके अलावा, ये भाग्यशाली भी होते हैं, क्योंकि कई अवसरों पर भाग्य इनका समर्थन करता है। ये कोई विदेशी भाषा और संस्कृति सीखने चाह रखते हैं। हालाँकि, यह बेहतर होगा कि नई भाषा (या संस्कृति) की सीख इन्हें किसी ऐसी चीज़ में मदद करे, जो इनके करियर की संभावनाओं को प्रभावित करती हो। इसके अलावा, अहंकार के किसी भी रूप के खिलाफ विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यह व्यक्ति जीवन को नष्ट कर सकता है।

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गणेशजी की कृपा से,

गणेशस्पीक्स.कॉम टीम