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दशहरा 2026 – जानें अर्थ, तिथि, मुहूर्त, महत्व, करने और न करने योग्य बातें, ज्योतिषीय महत्व

Dussehra 2025

 विजयादशमी 2026 के दिन जब आकाश के सुनहरे द्वार खुलेंगे, तब धर्म अधर्म पर विजय प्राप्त करेगा, सत्य असत्य पर, और आपके जीवन में नई ऊर्जा का संचार होगा।

दशहरे का अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व है। यह आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि** को मनाया जाता है और नवरात्रि के पावन नौ दिनों का समापन करता है।

आध्यात्मिक संदेश: इस दिन दो महान कथाओं का स्मरण किया जाता है – भगवान राम द्वारा रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर पर विजय। दोनों किस्से हमें यह सिखाते हैं कि अंततः सत्य और धर्म की हमेशा जीत होती है।

 एक सरल अनुष्ठान: हर सुबह जब सूरज उगता है, अपने घर के द्वार पर एक ताज़ा फूल रखें और इस संकल्प के साथ दिन की शुरुआत करें – आज मैं जीत के पथ पर अग्रसर हूँ।

दशहरा 2026 – तिथि और शुभ समय

विवरणतिथि / समय
दशहरा (विजयादशमी) 2026 तिथिमंगलवार, 20 अक्टूबर 2026
तिथिआश्विन शुक्ल दशमी
दशमी तिथि प्रारंभ20 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:52 बजे
दशमी तिथि समाप्त21 अक्टूबर 2026, दोपहर 02:13 बजे
विजय मुहूर्तदोपहर 02:01 से 02:47 बजे तक (46 मिनट)
अपराह्न पूजा का समयदोपहर 12:45 से 03:02 बजे तक (2 घंटे 17 मिनट)
श्रवण नक्षत्र19 अक्टूबर दोपहर 03:38 से 20 अक्टूबर शाम 06:02 बजे तक
बंगाल विजयादशमीबुधवार, 21 अक्टूबर 2026

माना जाता है कि विजय मुहूर्त के दौरान किया गया एक छोटा कार्य, सामान्य समय में किए गए सौ कार्यों के समान प्रभावी होता है।

 एक सरल अनुष्ठान: विजय मुहूर्त में पूर्व दिशा की ओर दीपक जलाकर “ॐ विजयाय नमः” मंत्र का नौ बार जप करें।

दशहरे का महत्व

**नैतिक शिक्षा:** धर्म कभी भी कमजोर नहीं पड़ता, बल्कि वह सदा मजबूत बना रहता है। दशहरा हमें यह सिखाता है कि सत्य हर परिस्थिति में विजयी होता है।

**नए आरंभ का पर्व:** नए वाहन की खरीद या किसी नए कार्य की शुरुआत के लिए यह दिन सबसे शुभ माना जाता है।

**शक्ति की पूजा:** पूर्वी भारत में यह पर्व मां दुर्गा की विजय और उनके स्वर्ग लौटने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

**सांस्कृतिक एकता:** रामलीला, रावण दहन, दुर्गा विसर्जन-इन सभी परंपराओं का एक ही उद्देश्य है: बुराई का समापन और अच्छाई की स्थापन।

छोटा अनुष्ठान: सूर्यास्त से पहले लाल कागज़ पर अपना एक लक्ष्य लिख कर उसे अपने ईश्वर की मूर्ति के नीचे रखें।

करने योग्य कार्य और न करने योग्य कार्य

करने योग्यन करने योग्य
विजय मुहूर्त में पूजा आरंभ करेंझगड़े, क्रोध और कटु वाणी से बचें
घर को रंगोली, दीपक और फूलों से सजाएँशुभ समय के अलावा नया काम शुरू न करें
आयुध पूजा / शास्त्र पूजा करेंनशे और नकारात्मक आदतों से दूर रहें
जरूरतमंदों को दान देंप्रार्थना और अनुशासन की अनदेखी न करें
ॐ दूं दुर्गायै नमः या राम रक्षा स्तोत्र का जप करें
संकल्प लें कि अपने भीतर के रावणों को जलाना है

संक्षिप्त अनुष्ठान: शाम की प्रार्थना के पश्चात, चुपचाप उन तीन गुणों को लिखें जिन्हें आप अपने जीवन में शामिल करना चाहते हैं, साथ ही ईश्वर का आभार व्यक्त करें।


ज्योतिषीय पहलू

खगोलीय स्थिति: दशमी तिथि पर ग्रह-नक्षत्र साहस और सफलता का संचार करते हैं।

विजय मुहूर्त की महत्ता: इस अवधि में किए गए कार्य दीर्घकालिक सफलता और सुरक्षा प्रदान करते हैं।

ऋतुओं का परिवर्तन: शरद ऋतु का आगमन – जैसे-जैसे प्रकृति में बदलाव होता है, वैसे ही हमारी आत्मा भी नए प्रकाश को स्वीकार करती है।

राशि के अनुसार आशीर्वाद:

मेष: भय पर विजय प्राप्त करें।

वृषभ: स्थिरता का विकास करें।

सिंह: धर्म के अनुसार नेतृत्व करें।

मीन: गहरी भक्ति की प्रगति करें।

संक्षिप्त अनुष्ठान: विजयादशमी की रात आकाश के नीचे…

परंपरा को कैसे जीवित रखें?

कहानियाँ बताएं: भगवान राम का धनुष या मां दुर्गा की दास्तान साझा करें। इन कहानियों को बच्चों के साथ बांटें ताकि वे संस्कृति की गहराई को समझ सकें।

रिवाजों का अनुभव करें: रावण दहन या दुर्गा विसर्जन जैसे समारोहों को देखें और सामूहिक उत्साह का अनुभव करें। यह आपको परंपराओं से जुड़ने में मदद करेगा।

व्यक्तिगत विजय की अग्नि: अपनी किसी कमजोरी को लिखकर दीपक की लौ में जलाएं और उस पर मंत्र का उच्चारण करें। यह एक नई शुरुआत का प्रतीक है।

रचनात्मक गतिविधियाँ: परिवार के साथ मिलकर पर्यावरण-अनुकूल रावण बनाएं और मिठाइयाँ तैयार करें। इस प्रक्रिया में एकता और रचनात्मकता का अनुभव होगा।

ज्योतिष के अनुसार योजना: अपनी राशि के अनुसार संकल्प लें और उस दिशा में आगे बढ़ें, ताकि आपकी विजय सुनिश्चित हो सके।

अंतिम सन्देश

 इस दशहरे पर सिर्फ रावण के पुतले ही नहीं, बल्कि अपने भीतर के रावण को भी पराजित करें। विजय के समय दीप जलाएं और सकारात्मकता का संचार करें।

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FAQs

दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा?

दशहरा 2026 आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाएगा।

दशहरे का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

दशहरे का आध्यात्मिक महत्व बुराई पर अच्छाई की विजय है, जो भगवान राम द्वारा रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर पर विजय की कथाओं से जुड़ा है।

विजय मुहूर्त का क्या महत्व है?

विजय मुहूर्त के दौरान किया गया कार्य दीर्घकालिक सफलता और सुरक्षा प्रदान करता है।

दशहरे के दिन कौन से अनुष्ठान किए जाते हैं?

दशहरे के दिन सुबह घर के द्वार पर ताज़ा फूल रखना, विजय मुहूर्त में दीपक जलाना और ‘ॐ विजयाय नमः’ मंत्र का जप करना शामिल है।

दशहरा क्यों नए आरंभ के लिए शुभ माना जाता है?

दशहरा नए वाहन की खरीद या किसी नए कार्य की शुरुआत के लिए सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि यह विजय और सकारात्मकता का प्रतीक है।