नवरात्रि माता दुर्गा को समर्पित एक नौ दिनों तक चलने वाला त्योहार है। जो नए हिंदू चंद्र वर्ष में चार बार मनाया जाता है। इनमें वर्ष की शुरूआत में चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। नवरात्रि उत्सव घटस्थापना या कलश स्थापना नामक एक अनुष्ठान से शुरू होता है। कलश या घट को स्थापित करने की यह परंपरा मां दुर्गा को घर में आमंत्रित करने का न्योता है। दूसरे शब्दों में कलश शुभता, सौभाग्य, ऊर्जा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। नवरात्रि के पहले दिन होने वाली शारदीय नवरात्रि घटस्थापना के मुहूर्त, कलश स्थापना शुभ मुहूर्त, विधि और अन्य विवरण जानने के लिए आगे पढ़ें।
नवरात्रि घटस्थापना क्या है (navratri ghatasthapana kya hai)
घटस्थापना नवरात्रि के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। हमारे शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए अच्छी तरह से परिभाषित नियम और दिशानिर्देश हैं। नवरात्रि घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है और इसे गलत समय पर करने से, जैसा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है, देवी शक्ति का आपपर प्रकोप हो सकता है। अमावस्या और रात के समय घटस्थापना वर्जित है।
घटस्थापना करने के लिए सबसे शुभ समय दिन का पहला एक तिहाई हिस्सा है। यदि किन्हीं कारणों से यह समय उपलब्ध नहीं हो पाता है तो, अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है। घटस्थापना के दौरान नक्षत्र चित्रा और वैधृति योग से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन वे निषिद्ध नहीं हैं। विचार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक यह है कि घटस्थापना दोपहर से पहले की जाती है। इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है।
नवरात्रि घटस्थापना 2026 घटस्थापना तिथि मुहूर्त (navratri ghatasthapana 2026 mahurat)
| विवरण | तिथि / समय |
|---|---|
| शारदीय नवरात्रि 2026 घटस्थापना तिथि | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 |
| हिंदू तिथि | आश्विन शुक्ल प्रतिपदा |
| घटस्थापना मुहूर्त | सुबह 06:21 से 10:14 बजे तक (3 घंटे 53 मिनट) |
| घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक (47 मिनट) |
| प्रतिपदा तिथि प्रारंभ | 10 अक्टूबर 2026, रात 09:21 बजे |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 11 अक्टूबर 2026, रात 09:32 बजे |
| चित्रा नक्षत्र | 2026 में प्रातःकालीन घटस्थापना मुहूर्त के दौरान रहेगा |
| वैधृति योग | 10 अक्टूबर रात 10:02 से 11 अक्टूबर रात 09:05 बजे तक |
घटस्थापना पूजा सामग्री (navratri ghatasthapana puja samagri)
घटस्थापना या मां दुर्गा को प्रतिस्थापित करने के लिए मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप, वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन -चूड़ी, सुगंधित तेल, आम के पत्तों का बंदनवार, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, साबुत सुपारी, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पाट, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेव (पाँच मेवे) , जायफल, जावित्री, नारियल, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल आदि सामग्री की जरूरत होती है।
नवरात्रि में घटस्थापना की तैयारी कैसे करें (navratri ghatasthapana ki tayari kaise karen)
नवरात्रि में माता की घटस्थापना करने के लिए निम्न विधि का उपयोग करें।
– पूजा कक्ष या उस क्षेत्र को साफ करें जहां आप घटस्थापना करने वाले हैं।
– मिट्टी या तांबे से बने बड़े मुंह वाला घड़ा लें और उसमें मिट्टी भर दें और सात प्रकार के अनाज जैसे गेहूं, ज्वार आदि बोएं। आजकल लोग एक अनाज या मसूर अथवा चना चुनते हैं। अनाज बोते समय भगवान वरुण को समर्पित मंत्रों का जाप किया जाता है। यदि आप कोई वैदिक मंत्र नहीं जानते हैं, तो आप विशेष रूप से देवी शक्ति को समर्पित किसी भी मंत्र का उपयोग कर सकते हैं।
– पूजा कक्ष या क्षेत्र में पाँच या सात सेंटीमीटर की मोटाई के साथ एक मोटा ‘चौकोर या आयत बिस्तर बनाएँ। इस पर भी अनाज बोया जाता है।
– पूजा कक्ष या पूजा क्षेत्र में देवी दुर्गा या देवी शक्ति के किसी अन्य अवतार की तस्वीर स्थापित की जाती है। यदि उपलब्ध हो तो श्री यंत्र को देवी दुर्गा के चित्र के पास स्थापित किया जाता है। पेंटिंग के साथ मिट्टी वाला मटका भी लगाया जाता है।
– एक तांबे या चांदी अथवा मिट्टी के बर्तन को कलश के रूप में लिया जाता है – इसे पानी, चंदन, फूल, दूर्वा घास, हल्दी, चावल, सुपारी, पांच पत्ते, पांच रत्न या एक सोने के सिक्के से भरें। इन सभी वस्तुओं को एक ही बर्तन में डाल दिया जाता है। कलश के ऊपर एक नारियल रखा जाता है – कुछ लोग नारियल रखने से बचते हैं और इसके बजाय शीर्ष को ढकने के लिए माला का उपयोग करते हैं।
– गमले, पेंटिंग या मूर्ति पर माला और फूल चढ़ाए जाते हैं। – सुबह और शाम के दीपक जलाए जाते हैं और आरती की जाती है। कुछ घरों में पूरे नौ दिनों तक अखंड दीपक जलता रहता है।
– पूजा के दौरान जिन मंत्रों का जाप किया जाता है, वे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भिन्न होते हैं और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भिन्न होते हैं। कुछ लोग सरल देवी दुर्गा मंत्रों को चुनते हैं।
– प्रसाद, फूल आदि चढ़ाते समय भक्त को कहना चाहिए कि मैं देवी दुर्गा या शक्ति को फूल (फूल का नाम) अर्पित करता हूं।
– सुनिश्चित करें कि आपके द्वारा बोए गए अनाज अच्छे से उत्पन्न हो और उस स्थान पर सदैव नमी बनी रहें। सभी नौ दिनों में ताजे फूल और माला अर्पित करें ।
– दसवें दिन, अनाज 3 इंच या 5 इंच बढ़ गया होगा और इसे काटकर परिवार के सदस्यों, दोस्तों और पड़ोसियों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इन जवारों को नदी या किसी कुंड में प्रवाहित कर दिया जाता है।
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नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें (navratri me kalash sthapna kaise karen)
चैत्र नवरात्रि या साल में आने वाली अन्य तीनों नवरात्रि (2 गुप्त नवरात्रि, 1 चैत्र और 1 शरद नवरात्रि) में माता की स्थापना कलश के रूप ही होती है। इसी के साथ अखंड दीपक को भी माता का स्वरूप माना जाता है। आइए अब नवरात्रि कलश स्थापना विधि जानें।
– कलश के बाहरी भाग पर हल्दी लगायें और उसमें पानी डालें।
– पानी में कुछ मुद्रा के सिक्के डालें।
– कलश के मुख पर कुछ आम के पत्ते रखें।
– पत्तियों का आधार कलश के अंदर भरे पानी को छूना चाहिए, जबकि दूसरा ऊपर की ओर होना चाहिए।
– कलश पर एक साबुत भूरा नारियल उसकी भूसी के साथ रखें। भूसी को छत की ओर इशारा करना चाहिए।
– कलश पर चंदन, हल्दी और कुमकुम का टीका लगाएं।
– कलश को मिट्टी के बर्तन के बीच में रखें और चारों ओर समान रूप से मिट्टी फैला दें।
– नवधान्य के बीज सतह पर समान रूप से बोयें और उन्हें मिट्टी की एक पतली परत से ढक दें।
– थोड़ा पानी छिड़कें ताकि बीज अंकुरित हो जाएं। (नौवें दिन के अंत में बीज अंकुरित होकर छोटे – छोटे पौधे बन जाते हैं। यह वृद्धि प्रगति और सफलता का संकेत देती है।)
– इस इकाई को एक लकड़ी की चौकी पर रखें जो साफ कपड़े से ढकी हो और रंगोली से सजा हो।
– इस चरण के बाद कलश पर नया कपड़ा और ताजे फूलों से बनी माला चढ़ाएं।
– संकल्प करें कि इस व्रत को अत्यंत समर्पण और भक्ति के साथ पूरा करेंगे, इसके बाद ध्यान करें और देवी दुर्गा का आह्वान करें।
– फिर पंचोपचार पूजा करें और इसके लिए आपको सरसों, तिल के तेल या देसी घी से दीया जलाना चाहिए। धूप (अगरबत्ती), फूल, पान, सुपारी, केला, नारियल, हल्दी, कुमकुम और कुछ मुद्रा के सिक्के चढ़ाएं।
– अंत में भोग या नैवेद्य अर्पित करें।
– जय अम्बे गौरी आरती गाकर पूजा का समापन करें।
– नैवेद्य, भोग को प्रसाद के रूप में बांटें।
नवरात्रि घटस्थापना का महत्व (navratri ghatasthapana ka mahatva)
नवरात्रि के दौरान भक्त देवी दुर्गा और उनके विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदायिनी शामिल हैं। इसी के साथ भक्त देवी शक्ति के तीन रूपों, यानी दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा करते हैं ताकि उनका दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
इस त्योहार को मनाने के लिए परंपरा के अनुसार परिवार और दोस्त एक जगह इकट्ठे होते हैं। इस दौरान गुजरात में, डांडिया खेला जाता है और ज्यादातर लोग उपवास रखते हैं और अपना समय प्रार्थना में बिताते हैं। भारत के पूर्वी हिस्सों में नवरात्रि के त्योहार को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे नवरात्रि के नाम से ही मनाया जाता है। माता की भक्ति से भरे इन नौ दिनों का अंत दशहरा के साथ होता है, जिसके दौरान रावण के पुतले को जलाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता हैं।
समापन
नवरात्रि हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है। और, घटस्थापना या कलश स्थापना नवरात्रि के दौरान सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। नवरात्रि के दौरान घटस्थापना का अत्यधिक महत्व है। उपरोक्त नियमानुसार माता का पूजन और घटस्थापना करें और नवदुर्गा को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाएं।
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FAQs
नवरात्रि घटस्थापना क्या है?
नवरात्रि घटस्थापना एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो नवरात्रि के पहले दिन किया जाता है। यह देवी दुर्गा को घर में आमंत्रित करने का प्रतीक है और शुभता, सौभाग्य, ऊर्जा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?
घटस्थापना का सबसे शुभ समय दिन का पहला एक तिहाई हिस्सा है। यदि यह समय उपलब्ध नहीं है, तो अभिजीत मुहूर्त के दौरान घटस्थापना की जा सकती है।
नवरात्रि घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री क्या है?
घटस्थापना के लिए मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप, वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन, आम के पत्तों का बंदनवार, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, साबुत सुपारी, हल्दी, पाट, आसन, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, दीपक, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेव, नारियल, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश, हवन सामग्री, पूजन थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों, गंगाजल आदि की जरूरत होती है।
घटस्थापना की विधि क्या है?
घटस्थापना के लिए पूजा कक्ष को साफ करें और मिट्टी या तांबे के घड़े में मिट्टी भरकर उसमें सात प्रकार के अनाज बोएं। देवी दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें और कलश में पानी, चंदन, फूल, दूर्वा घास, हल्दी, चावल, सुपारी, पत्ते, रत्न या सोने का सिक्का डालें। कलश पर नारियल रखें और पूजा करें।
नवरात्रि के दौरान कौन-कौन से देवी रूपों की पूजा की जाती है?
नवरात्रि के दौरान शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदायिनी के रूप में देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। साथ ही, देवी शक्ति के तीन रूपों दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।
