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शुक्र का कुंभ में गोचर – राशियों पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत विवरण और समाधान

अंग्रेजी में वीनस के नाम से पहचाने जाने वाले शुक्र को पश्चिम में सुंदरता की देवी के रूप में मान्यता प्राप्त है। ठीक वैसे ही वैदिक ज्योतिष में भी शुक्र को काल पुरूष के सौंदर्य का प्रतीक माना गया है। ज्योतिष में शुक्र के स्वरूप का वर्णन – सुंदर, खूबसूरत, मुखाकृति, आकर्षक मन मोहिनी आँखें, सुडौल शरीर, मधुर आवाज़, प्रतिभाशाली, चालाक, चंचल, मिलनसार, पराई स्त्री के आकर्षण, विलासी और विविध प्रकार के भोग-भोगी जैसी व्याख्याें से किया गया है। एक ज्योतिषीय तथ्य के अनुसार शुक्र सूर्य से 47 अंश से अधिक दूर नहीं जाता, इसलिए कुंडली में सूर्य के साथ या सूर्य से दूसरे, तीसरे, ग्यारहवें व बारहवें घर में स्थान प्राप्त करता है। ज्योतिष में शुक्र को एक बलवान ग्रह माना गया है, क्योंकि इसका शरीर की सात धातुओं में से एक वीर्य पर अधिपत्य होता है। इस धातु के संग्रह से ही जातक में ओजस एवं प्रतिभा का विस्तार होता है।कुंडली में शुक्र अपने स्वभाव के अनुसार प्रेम व वैवाहिक जीवन के नैसर्गिक सुख प्रदान करते है। जिसका असर व्यक्ति के निजी जीवन में देखने को मिलता है। मौजूदा परिस्थिति में शुक्र मकर से कुंभ में गोचर करने वाले है। कुंभ में शुक्र का गोचर 2020 राशि चक्र की तमाम राशियों को प्रभावित करने वाला है। कुछ राशियों पर इसका सकारात्मक तो कुछ पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे, वहीं कुछ राशियों पर शुक्र के कुंभ गोचर 2020 का मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा। हमने कुंडली में शुक्र की स्थिति के अनुसार प्रत्येक राशि पर इसके प्रभाव की गणना कर उनके अनुसार समाधान सुझाने की कोशिश की है। आइए, विस्तार से जानने की कोशिश करते है कि, राशि चक्र की राशियों पर शुक्र गोचर 2020 के कैसे प्रभाव पड़ने वाले है।साल 2026 का विस्तृत व्यक्तिगत राशिफल प्राप्त करें अभी!


चंद्र राशि मेष कुंडली जातकों के लिए शुक्र का कुंभ गोचर 2020 बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। मेष राशि के स्वामी मंगल है और जिस कुंभ राशि में शुक्र का गोचर होना है उसके स्वामी शनि है। मेष राशि जातकों की कुंडली में शुक्र दसवें से ग्यारहवें भाव में गोचर करने वाले है, यहां से वे कुंडली के पांचवें भाव पर दृष्टि डालेंगे। कुंडली का ग्यारहवा भाव लाभ स्थान और पांचवां भाव विद्या भाव या संतान भाव के रूप में पहचाना जाता है। इन भावों से संबंधित क्षेत्रों में शुक्र का गहरा प्रभाव देखने काे मिलेगा। साथ ही कुछ अन्य क्षेत्रों पर भी इस गोचर के प्रभाव देखने को मिलेंगे, जिनमें करियर, व्यापार-व्यवसाय, आर्थिक, प्रेम व वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्र प्रमुख है। शुक्र गोचर 2026 का मेष राशि पर पड़ने वाले प्रभाव को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र के कुंभ गोचर 2020 का चंद्र राशि कुंडली वृषभ पर मिलाजुला प्रभाव पड़ने वाला है। चंद्र राशि वृषभ कुंडली के पहले और छठे भाव का स्वामी शुक्र है। कुंडली में शुक्र का गोचर नौवें से दसवें भाव में हो रहा है। इस दौरान वृषभ राशि जातकों को करियर, व्यापार, आर्थिक, प्रेम या वैवाहिक संबंध, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में शुक्र गोचर 2020 का गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दौरान वृषभ राशि जातक जीवन के कुछ क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे तो कुछ में मुश्किलों का सामना करेंगे। लेकिन वृषभ पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का कुछ साधारण ज्योतिषीय उपायों से सामना किया जा सकता है। वृषभ जातकों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने प्रभाव और उनके विस्तृत समाधान जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र का कुंभ गोचर 2020, मिथुन राशि जातकों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। चंद्र राशि मिथुन कुंडली में शुक्र का कुंभ गोचर 2020 आठवें से नौवें भाव में होने वाला है। चंद्र राशि मिथुन कुंडली के पांचवें और बाहरवें भाव का स्वामी भी शुक्र है। इस गोचर के दौरान मिथुन राशि जातकों के जीवन के प्रमुख क्षेत्रों पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। यह समयावधि विदेश में नौकरी या शिक्षा के लिए प्रयासरत जातकों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आने वाली है। जीवन के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे आर्थिक, व्यापारिक और प्रेम या वैवाहिक संबंधों पर इसके प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र का कुंभ गोचर 2020 का चंद्र राशि कर्क कुंडली के सातवें भाव से आठवें भाव में होने वाला है। कुंडली का आठवां भाव आयुष्य या मृत्यु भाव के नाम से जाना जाता है। कुंडली के चौथे व ग्यारहवें भाव का स्वामी शुक्र है। इस दौरान कर्क राशि जातकों के जीवन के कुछ प्रमुख क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। इस दौरान कर्क राशि जातकों के प्रेम व वैवाहिक जीवन में कुछ अमूलचूल बदलाव देखने को मिल सकते है। इस दौरान दीर्घकालिक निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। लेकिन जीवन के कुछ प्रमुख क्षेत्रों में कुछ सावधानियां बरतने की भी जरूरत है। कर्क राशि पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


कुंभ में शुक्र गोचर 2020 का चंद्र राशि सिंह कुंडली पर बेहद मिलाजुला असर रहने वाला है। इस दौरान सिंह राशि जातकों की कुंडली के तीसरे और दसवें भाव का स्वामी गोचर शुक्र है। शुक्र का कुंभ में गोचर 2020 छठे से सातवें भाव में होने वाला है। वैदिक ज्योतिष में सातवें भाव को कलत्र स्थान के नाम से जाना जाता है। कुंडली के सातवें भाव का संबंध मुख्य रूप से जीवन साथी और साझेदाराें से होता है। इस दौरान आपको अपनी व्यापारिक साझेदारी में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है, साथ ही अपने सहकर्मियों से अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए बेहद गंभीर प्रयास करने होंगे। शुक्र गोचर 2026 के करियर, प्रेम व वैवाहिक जीवन, आर्थिक, स्वास्थ्य व शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र का कुंभ गोचर 2020 का चंद्र राशि कन्या कुंडली जातकों के जीवन पर अधिक नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। इस दौरान शुक्र कुंडली के पांचवें से छठे भाव में गोचर करेगा और वह दूसरे और नौवें भाव का स्वामी है। कुंडली के छठे भाव को शत्रु भाव के नाम भी जाना जाता है, इसका संबंध रोग की अवधि, दैनिक कार्यों और शत्रु से होता है। शुक्र गोचर 2020 के नकारात्मक प्रभावों के कारण कन्या राशि जातकों को अपने करियर, व्यापार, आर्थिक, प्रेम व वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। कन्या राशि पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र गोचर 2020 का चंद्र राशि तुला कुंडली के जीवन के प्रमुख क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। लेकिन इन दौरान कुछ क्षेत्रों में सावधानियां बरतने की भी जरूरत होगी। शुक्र का कुंभ गोचर 2020 तुला कुंडली के चौथे भाव से पांचवें भाव में होने वाला है, कुंडली के पहले और आठवें भाव का स्वामी भी शुक्र है। कुंडली के पांचवें भाव को संतान या विद्या भाव के नाम से भी जाना जाता है। इसका सीधा संबंध आपकी शिक्षा और संतान से होता है। तुला राशि पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


कुंभ में शुक्र गोचर 2020 का चंद्र राशि वृश्चिक कुंडली धारकों पर कई मायनों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दौरान शुक्र कुंडली के तीसरे से चौथे भाव में गोचर करेगा, साथ ही वह कुंडली के सातवें और बारहवें भाव का स्वामी भी है। कुंडली के चौथे भाव को सुख स्थान कहा जाता है, इसका संबंध जीवन से जुड़े प्रत्येक सुख से होता है। वृश्चिक राशि जातकों को जीवन के कई क्षेत्रों में शुक्र गोचर 2020 के सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। हालांकि कुछ सावधानियां और उपायों के माध्यम से आप इन सकारात्मक प्रभावों का उपयोग अधिक अनुकूल परिस्थितियां निर्मित करने के लिए कर सकते है। 2026 का वृश्चिक राशि जातकों के जीवन में पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र का गोचर चंद्र राशि धनु कुंडली के तीसरे भाव में होने वाला है। कुंडली के छठे और ग्यारहवें भाव का स्वामी भी शुक्र है। कुंडली का तीसरा भाव पराक्रम भवन के नाम से जाना जाता है। इसका संबंध कुंडली के महत्वपूर्ण फेरबदल और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होता है। शुक्र के कुंभ गोचर 2020 के प्रभावों के दौरान धनु राशि जातक अपने करियर से संबंधित किसी बड़े बदलाव के साक्षी बनेंगे। इस दौरान विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे जातकों को सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। इस दौरान व्यापार और करियर से जुड़े क्षेत्रों में वृद्धि दिखाई देगी लेकिन स्वास्थ्य और कुछ अन्य क्षेत्रों में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। धनु राशि पर पड़ने वाले प्रभावों को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र गोचर 2020, मकर से कुंभ राशि में होने वाला है, इस गोचर का मकर राशि पर मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा। शुक्र का कुंभ गोचर 2020 चंद्र राशि मकर कुंडली के पहले भाव से दूसरे भाव में होने वाला है। कुंडली के पांचवें और दसवें भाव का स्वामी भी शुक्र है। कुंडली का दूसरा भाव धन स्थान या कुटुंब स्थान के नाम से पहचाना जाता है। इसका संबंध जातक के जीवन में धन और परिवार के समर्थन से होता है। कुंभ में शुक्र गोचर 2020 का मकर राशि जातकों के जीवन के कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक वहीं कुछ क्षेत्रों में नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। 2026 के मकर राशि जातकों पर पड़ने वाले प्रभाव को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


चंद्र राशि कुंभ कुंडली जातकों के लिए शुक्र का कुंभ गोचर 2020 बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, शुक्र का यह गोचर कुंभ राशि जातकों की स्वराशि में होने वाला है। कुंडली में इसका गोचर बारहवें भाव से पहले भाव में होने वाला है, साथ ही शुक्र चौथे और नौवें भाव का स्वामी भी है। कुंडली के पहले भाव को तनुभाव, देह भवन या लग्न स्थान के नाम से भी जाना जाता है। इसका संबंध जातक के चरित्र, शरीर, मनोबल, मनोवृत्ति, बल और कीर्ति से होता है। कुंभ कुंडली का फौरी तौर पर अध्ययन करने पर पता चलता है कि, कुंभ में शुक्र गोचर 2020 का कुंभ जातकों पर कई मायनों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सावधानी और धैर्य बनाए रखने की भी जरूरत है। 2026 का कुंभ राशि पर पड़ने वाले प्रभाव को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!


शुक्र के कुंभ गोचर 2020 का चंद्र राशि मीन पर मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा। शुक्र का कुंभ गोचर 2020, मीन कुंडली के ग्यारहवें से बारहवें भाव में होने वाला है। कुंडली के तीसरे और आठवें भाव का स्वामी भी शुक्र है। कुंडली का बारहवां भाव व्यय स्थान या मोक्ष स्थान के नाम से जाना जाता है। इसका संबंध जीवन के व्यय, खर्च और भोगविलास जैसे महत्वपूर्ण पहलूओं से होता है। कुंभ में शुक्र गोचर 2020 के मीन राशि जातकों के जीवन के कुछ क्षेत्रों जैसे करियर, व्यापार और आर्थिक स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे, लेकिन प्रेम व वैवाहिक और स्वास्थ्य जैसे निजी क्षेत्रों में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। शुक्र गोचर 2026 का मीन राशि जातकों के जीवन के प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को विस्तार से जानने के लिए यहां क्लिक करें!अपने व्यक्तिगत समाधान प्राप्त करने के लिए, एक ज्योतिषी विशेषज्ञ से बात करें अभी!गणेशजी के आशीर्वाद सहित,

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A Chemist and Jyotish Parasharam from London, he is a global grandmaster. Author of 19 stock market books, with a massive legacy of analyzing 275,000+ horoscopes and 2,500+ media shows, he is the ultimate, most trusted solver for Vastu, Tarot, Numerology, Pranic Healing, Tantra-Mantra, and Yantra-Gem-Rudraksha therapies.

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