शारदीय नवरात्रि 2026 (11 अक्टूबर से) के नौ रंग इस प्रकार हैं: पहले दिन नारंगी (माँ शैलपुत्री), दूसरे दिन सफेद (माँ ब्रह्मचारिणी), तीसरे दिन लाल (माँ चंद्रघंटा), चौथे दिन रॉयल ब्लू (माँ कूष्मांडा), पांचवें दिन पीला (माँ स्कंदमाता), छठे दिन हरा (माँ कात्यायनी), सातवें दिन स्लेटी (माँ कालरात्रि), आठवें दिन बैंगनी (माँ महागौरी) और नौवें दिन मोरपंखी हरा (माँ सिद्धिदात्री)।
नवरात्रि का त्योहार जगमगाते कपड़ों, सजे हुए मंदिरों और गरबा की गूँज का समय होता है। इस पावन पर्व पर, विशेषकर शारदीय नवरात्रि के दौरान, प्रत्येक दिन एक निर्दिष्ट रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा काफी लोकप्रिय है।
नवरात्रि के ये नौ दिन माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना को समर्पित होते हैं। बहुत से श्रद्धालु उस दिन के निर्धारित रंग के अनुसार अपने परिधान चुनते हैं, और कुछ लोग पूजा स्थल की सजावट में भी इन रंगों का प्रयोग करते हैं, साथ ही उस दिन के प्रिय पुष्प और भोग भी अर्पित करते हैं।
शारदीय नवरात्रि के ये नौ रंग हर साल बदल सकते हैं। यहाँ वर्ष 2026 की नवरात्रि के नौ दिनों के रंगों का क्रम और उनके पारंपरिक मायने दिए जा रहे हैं।
नवरात्रि के रंग हर साल क्यों बदलते हैं?
महाराष्ट्र और देश के कुछ अन्य राज्यों में नवरात्रि के नौ रंगों का चयन मुख्य रूप से उस वार (दिन) के आधार पर किया जाता है जिस दिन से घटस्थापना या नवरात्रि का पहला दिन शुरू होता है। चूँकि हर साल शारदीय नवरात्रि की तिथि और वार बदल जाते हैं, इसलिए रंगों का क्रम भी बदल जाता है। यही कारण है कि पिछले साल की नवरात्रि के रंगों की सूची इस साल से मेल नहीं खाती।
हालाँकि, ये रंग उत्सव के उत्साह और सांस्कृतिक आनंद को बढ़ाने का एक माध्यम हैं। भक्त अपनी सच्ची निष्ठा और भक्ति भाव से किसी भी सात्विक रंग के कपड़े पहनकर माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2026 कैलेंडर: तारीख, देवी और रंग
| दिन | तारीख | तिथि | देवी | रंग |
|---|---|---|---|---|
| पहला दिन | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 | प्रतिपदा (घटस्थापना) | मां शैलपुत्री | नारंगी |
| दूसरा दिन | सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 | द्वितीया | मां ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| तीसरा दिन | मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | तृतीया | मां चंद्रघंटा | लाल |
| चौथा दिन | बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | चतुर्थी | मां कुष्मांडा | रॉयल ब्लू |
| पांचवां दिन | गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 | पंचमी | मां स्कंदमाता | पीला |
| छठा दिन | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | षष्ठी | मां कात्यायनी | हरा |
| सातवां दिन | शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 | सप्तमी (महासप्तमी) | मां कालरात्रि | स्लेटी (ग्रे) |
| – | रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | सप्तमी जारी; अष्टमी सुबह 08:29 से प्रारम्भ | – | – |
| आठवां दिन | सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | अष्टमी (दुर्गाष्टमी) | मां महागौरी | बैंगनी |
| नौवां दिन | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | नवमी (महानवमी) | मां सिद्धिदात्री | मोरपंखी हरा |
| दशहरा | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | दशमी दोपहर 12:51 से प्रारम्भ | विजयादशमी | – |
पहला दिन – नारंगी (ऑरेंज): माँ शैलपुत्री
नवरात्रि के प्रथम दिन नवदुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की उपासना की जाती है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है।
वर्ष 2026 के लिए नवरात्रि के पहले दिन का शुभ रंग नारंगी (ऑरेंज) है। नारंगी रंग उत्साह, आत्मीयता, नई ऊर्जा और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पर्व के पहले दिन का स्वागत करने के लिए श्रद्धालु नारंगी रंग के पारंपरिक वस्त्र धारण करते हैं।
पारंपरिक नियमों का पालन करने वाले घरों में पहले दिन ही घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। श्रद्धालु अपने पूजा स्थल को व्यवस्थित करते हैं, पवित्र कलश की स्थापना करते हैं और नौ दिवसीय नवरात्रि पूजा का संकल्प लेते हैं।
दूसरा दिन – सफेद (व्हाइट): माँ ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। भगवती के इस स्वरूप की कथा भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की गई उनकी घोर तपस्या और साधना से जुड़ी है।
सफेद रंग पवित्रता, सादगी, निष्कामता और असीम शांति का प्रतीक है। माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, निर्मल और तपस्वी है, जो सफेद वस्त्रों की पावनता से पूरी तरह मेल खाता है। इनकी साधना हमें जीवन में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए धैर्य, अनुशासन और निरंतरता बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
तीसरा दिन – लाल (रेड): माँ चंद्रघण्टा
पूजा के तीसरे दिन भगवती के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघण्टा की आराधना की जाती है। मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा धारण करने वाली माँ चंद्रघण्टा का स्वरूप उग्र और रक्षात्मक है।
लाल रंग शक्ति, साहस, शौर्य और उमंग का प्रतीक है। सनातन परंपरा में देवी पूजन के लिए लाल रंग को अनादि काल से अत्यंत पवित्र माना गया है—चाहे वह माँ को चढ़ाई जाने वाली चुनरी हो या पूजा में चढ़ने वाले गुड़हल के फूल।
तीसरे दिन महिलाएँ विशेष रूप से लाल रंग की साड़ियाँ या पोशाकें पहनकर मंदिर दर्शन के लिए जाती हैं और शाम को गरबा रास का आनंद लेती हैं।
चौथा दिन – रॉयल ब्लू (गहरा नीला): माँ कूष्मांडा
चतुर्थी तिथि पर माँ कूष्मांडा का पूजन किया जाता है, जिनके बारे में मान्यता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान से इस पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी।
इस दिन के लिए निर्धारित रंग रॉयल ब्लू (गहरा नीला) है। नीला रंग विश्वास, स्थिरता, गरिमा और अपार शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। श्रद्धालु इस दिन रॉयल ब्लू रंग की साड़ियाँ, कुर्ते या पारंपरिक परिधान पहनते हैं। माँ कूष्मांडा की कथा दिव्य प्रकाश और सृजनात्मक ऊर्जा से भरपूर है।
पांचवां दिन – पीला (येलो): माँ स्कंदमाता
नवरात्रि का पांचवां दिन भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता ‘माँ स्कंदमाता’ की उपासना का होता है।
पीला रंग एक अत्यंत उज्ज्वल और जीवंत रंग है, जो प्रसन्नता, नई आशा, ताजगी और सकारात्मकता का संचार करता है। हिंदू धर्म के सभी मांगलिक और धार्मिक कार्यों में पीले रंग का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है—चाहे वह पूजा के फूल हों, हल्दी हो या वस्त्र।
पारिवारिक पूजा या गरबा उत्सव में भाग लेने के लिए पीला रंग पहनना उत्सव के माहौल में पूरी तरह घुल-मिल जाने का बेहतरीन तरीका है।
छठा दिन – हरा (ग्रीन): माँ कात्यायनी
षष्ठी तिथि पर भक्त माँ कात्यायनी की पूजा करते हैं—जो माँ दुर्गा का एक अत्यंत पराक्रमी और शक्तिशाली स्वरूप हैं और जिन्होंने महिषासुर का संहार किया था।
हरा रंग प्रकृति, ताज़गी, खुशहाली और निरंतर वृद्धि का प्रतीक है। अपनी सौम्य और सुखद अनुभूति के कारण, यह रंग उत्सवों के दौरान कपड़ों और सजावट के लिए सबसे अधिक पसंद किया जाता है।
श्रद्धालु निर्भयता और विजय का आशीर्वाद पाने के लिए माँ कात्यायनी की आराधना करते हैं। उनकी कथा हमें कठिन परिस्थितियों से उबरने और अन्याय से लड़ने की प्रेरणा देती है।
सातवां दिन – स्लेटी (ग्रे): माँ कालरात्रि
सप्तमी तिथि को माँ कालरात्रि का पूजन किया जाता है। उनका योद्धा स्वरूप और उग्र रूप अंधकार और अज्ञान पर विजय पाने की उनकी अलौकिक क्षमता को दर्शाता है।
इस दिन के लिए संस्तुत रंग स्लेटी (ग्रे) है। यह रंग संतुलन, परिपक्वता और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है, जो उत्सव के दौरान पहने जाने वाले अन्य चकीले रंगों के बीच एक सुंदर और गंभीर संतुलन बनाता है।
यद्यपि माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत विकराल और भयानक है, फिर भी भक्तों का विश्वास है कि देवी का यह रूप हर प्रकार के भय, भूत-प्रेत और नकारात्मक ऊर्जा को भगाने वाला है।
आठवां दिन – बैगनी (पर्पल): माँ महागौरी
महाअष्टमी का पावन दिन पवित्रता, करुणा और अलौकिक कांति की देवी ‘माँ महागौरी’ को समर्पित है।
बैगनी (पर्पल) रंग भव्यता, राजसी गरिमा, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊँचाइयों का प्रतीक है। पारंपरिक आभूषणों और गोटा-पत्ती के साथ बैगनी रंग की पारंपरिक पोशाक पहनना नवरात्रि के इस खास दिन के लिए बेहद खूबसूरत विकल्प बनता है।
कई परिवारों के लिए अष्टमी का दिन नवरात्रि का सबसे शुभ और मुख्य दिन होता है। इस दिन घर-घर में हवन, महापूजा, भगवती का महाप्रसाद वितरण और नन्ही कन्याओं का पूजन (कन्या पूजन) किया जाता है।
नौवां दिन – मोरपंखी हरा (पीकॉक ग्रीन): माँ सिद्धिदात्री
नवमी तिथि सिद्धियों, अलौकिक शक्तियों और आध्यात्मिक सफलता की देवी ‘माँ सिद्धिदात्री’ को समर्पित है।
मोरपंखी हरा (पीकॉक ग्रीन) रंग गहरे नीले और जीवंत हरे रंग का एक अद्भुत और आकर्षक मिश्रण है। यह रंग अपनी अनूठी भव्यता, शांति और समृद्धि के भाव के लिए बहुत पसंद किया जाता है।
अधिकांश श्रद्धालुओं के लिए महानवमी का दिन नौ दिवसीय साधना का चरमोत्कर्ष (समापन) होता है। इस दिन विशेष पूजा, अनुष्ठान, हवन और महाप्रसाद का वितरण किया जाता है।
क्या नवरात्रि के हर दिन निर्धारित रंग पहनना अनिवार्य है?
नवरात्रि के दौरान निर्धारित रंग के कपड़े पहनना एक सुंदर परंपरा है जिससे लोग उत्सव से अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं, लेकिन यह धार्मिक पूजा-विधि का कोई अनिवार्य नियम नहीं है।
चाहे परिवार हर दिन नौ रंगों की इस थीम का पालन करें या फिर पूरे नौ दिनों तक लाल, पीले व अन्य शुभ रंगों के वस्त्र पहनें—हर किसी की अपनी इच्छा और श्रद्धा होती है। कई जगह रीति-रिवाज स्थानीय और पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर करते हैं।
यदि आपके पास किसी विशिष्ट दिन के रंग का परिधान उपलब्ध नहीं है, तो भी आप अपनी नित्य पूजा और साधना जारी रख सकते हैं। ईश्वर के दरबार में सबसे अधिक महत्व आपकी निष्छल भक्ति और श्रद्धा भाव का है, न कि किसी विशेष ड्रेस कोड का।
क्या 2027 आपके लिए तरक्की और मजबूती का साल होगा या तनाव और चुनौतियों का? अपनी विस्तृत रिपोर्ट अभी पाएं!
रंगों और परंपराओं के संग मनाएं नवरात्रि
नवरात्रि के ये नौ रंग उत्सव के आनंद को और बढ़ा देते हैं। ये लोगों को एक साथ मिलकर कपड़ों की योजना बनाने, घरों को सजाने और भक्तिमय माहौल में रँग जाने का एक सुंदर अवसर प्रदान करते हैं।
फिर भी, नवरात्रि का मूल आधार माँ दुर्गा और उनके 9 दिव्य स्वरूपों की साधना ही है। इसलिए, चाहे आप रंगों की सूची के अनुसार कपड़े पहनें या अपनी सुविधानुसार पारंपरिक पोशाक धारण करें, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सच्चे मन से प्रार्थना करें, अपनी सांस्कृतिक परंपराओं का आदर करें और अपने भीतर छुपी दैवीय नारी शक्ति (शक्ति तत्त्व) को नमन करें।
FAQs
नवरात्रि के रंग हर साल क्यों बदलते हैं?
नवरात्रि के नौ रंग हर साल बदलते हैं क्योंकि इनका चयन मुख्य रूप से उस वार के आधार पर किया जाता है जिस दिन से घटस्थापना या नवरात्रि का पहला दिन शुरू होता है। चूँकि हर साल शारदीय नवरात्रि की तिथि और वार बदल जाते हैं, इसलिए रंगों का क्रम भी बदल जाता है।
नवरात्रि 2026 के पहले दिन का रंग क्या है और उसका महत्व क्या है?
वर्ष 2026 के लिए नवरात्रि के पहले दिन का शुभ रंग नारंगी (ऑरेंज) है। नारंगी रंग उत्साह, आत्मीयता, नई ऊर्जा और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पर्व के पहले दिन का स्वागत करने के लिए श्रद्धालु नारंगी रंग के पारंपरिक वस्त्र धारण करते हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी के दिन का रंग क्या है और उसका क्या प्रतीक है?
नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है और इस दिन का रंग सफेद है। सफेद रंग पवित्रता, सादगी, निष्कामता और असीम शांति का प्रतीक है।
माँ चंद्रघंटा के दिन का रंग क्या है और उसका क्या महत्व है?
पूजा के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना की जाती है, जिसका रंग लाल है। लाल रंग शक्ति, साहस, शौर्य और उमंग का प्रतीक है और देवी पूजन के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है।
नवरात्रि के दौरान रंगों का प्रयोग कैसे किया जाता है?
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु उस दिन के निर्धारित रंग के अनुसार अपने परिधान चुनते हैं, और कुछ लोग पूजा स्थल की सजावट में भी इन रंगों का प्रयोग करते हैं, साथ ही उस दिन के प्रिय पुष्प और भोग भी अर्पित करते हैं।
