महा नवरात्रि के अवसर पर भोग(प्रसाद) भी अपना एक अलग महत्व रखता है। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अवतारों की पूजा की जाती है आैर प्रत्येक देवी को नौ प्रकार के अलग-अलग प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। मौसम के अनुसार, यह समय गरिष्ठ आैर चटपटे व्यंजन खाने का नहीं माना जाता, अपितु तले हुए व्यंजनों से परहेज रखने का होता है। गणेशजी आपको इन नौ दिनों के अवसर पर शाकाहारी भोजन ( एेसा भोजन जिसमें प्याज आैर लहसुन नहीं हो ) ग्रहण करने की सलाह देते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2026 कैलेंडर: तारीख, देवी और रंग
| दिन | तारीख | तिथि | देवी | रंग |
|---|---|---|---|---|
| पहला दिन | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 | प्रतिपदा (घटस्थापना) | मां शैलपुत्री | नारंगी |
| दूसरा दिन | सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 | द्वितीया | मां ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| तीसरा दिन | मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | तृतीया | मां चंद्रघंटा | लाल |
| चौथा दिन | बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | चतुर्थी | मां कुष्मांडा | रॉयल ब्लू |
| पांचवां दिन | गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 | पंचमी | मां स्कंदमाता | पीला |
| छठा दिन | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | षष्ठी | मां कात्यायनी | हरा |
| सातवां दिन | शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 | सप्तमी (महासप्तमी) | मां कालरात्रि | स्लेटी (ग्रे) |
| – | रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | सप्तमी जारी; अष्टमी सुबह 08:29 से प्रारम्भ | – | – |
| आठवां दिन | सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | अष्टमी (दुर्गाष्टमी) | मां महागौरी | बैंगनी |
| नौवां दिन | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | नवमी (महानवमी) | मां सिद्धिदात्री | मोरपंखी हरा |
| दशहरा | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | दशमी दोपहर 12:51 से प्रारम्भ | विजयादशमी | – |
देवी माँ की सच्चे मन से पूजा करें आैर उन्हें विभिन्न प्रकार के नौ व्यंजनों का भोग लगाएं। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों को कौन-से प्रसाद का भोग लगाना चाहिए –
पहला दिनः माँ शैलीपुत्री को शुद्घ घी का भोग लगाएं।
दूसरा दिनः अपने परिजनों की दीर्घायु के लिए माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाएं।
तीसरा दिनः सभी दुख दूर करने आैर खुशियों का स्वागत करने के लिए देवी चंद्रघंटा को खीर का भोग लगाएं।
चौथा दिनः अपनी बुद्घि आैर निर्णय लेने की क्षमता में सुधार के लिए देवी कुष्मांडा को मालपुआ अर्पित करें।
पांचवां दिनः शारीरिक रूप से निरोगी व ऊर्जावान बनने के लिए देवी स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं।
छठा दिनः प्राकृतिक आकर्षण प्राप्त करने के लिए देवी कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं।
सातवां दिनः सभी तकलीफों, परेशानियों से मुक्त होने आैर खुशियां प्राप्त करने के लिए माँ कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं।
आठवां दिनः माँ महागौरी को नारियल चढ़ाएं, इससे ये निःसंतानों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देंगी।
नौंवा दिनः माँ सिद्घिदात्री को तिल से बनी वस्तुओं का प्रसाद चढ़ाएं, इससे आप आकस्मिक दुर्घटनाओं, आपदा या मृत्यु से खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।
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