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ज्योतिषशास्त्र के ग्रह:चंद्र

सूर्य

चंद्र

मंगल

बुध

गुरु

शुक्र

शनि

राहु और केतु

खगोलशास्त्रीय विवरण
यह पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है। यद्यपि ज्योतिष में चंद्रमा को एक तारा के रुप में माना जाता है, लेकिन यह अपने आप प्रकाश का उत्सर्जन नहीं करता है बल्कि सूर्य के प्रकाश के विकिरण के कारण चमकता है। सतह से चांद 356404 किलोमीटर तथा शिरोबिंदू से यह 406680 किलोमीटर पृथ्वी से दूर है। अन्य ग्रहों की तरह चांद का रास्ता भी अंडाकार है। पृथ्वी के आकार का लगभग एक चौथाई है। दिलचस्प बात यह है कि पृथ्वी से चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही दिखाई देता है।

पौराणिक कथा:
हरिवंश पुराण के मुताबिक, चांद अटरी के पुत्र ते और उसे दिग्पालों (दस दिशाओं ) ने पाला। चांद ने दक्ष प्रजापति की बेटियों से शादी की, जो संख्या में 27 थीं। इन बेटियों के नाम राशि चक्र के 27 नक्षत्र हैं। चाँद इनमें से प्रत्येक के पास एक दिन के चक्र में दौरा करता है लेकिन इनमें से एक रोहिणी के साथ उसने अनुचित पक्षपात दिखाया। वह देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी के साथ भाग गया। बुध का जन्म इसी अंतःक्रिया का परिणामस्वरुप हुआ था। दक्ष ने चांद को नष्ट होने का शाप दिया, क्रमिक क्षय का।

पश्चिमी अवधारणा बताता है कि रोमन कैथोलिक के अनुसार, चांद को वर्जिन मैरी का रुप मानते हैं। वह रात की रानी भी है जिसे लूना (डायना) कहा जाता है। डायना अपोलो की जुड़वां बहन है। वह पवित्रता तथा प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करती है।

ज्योतिषीय महत्व:
उत्तरा कालमित्रा के अनुसार, चंद्रमा के कुछ मुख्य महत्व इस प्रकार हैं –

1. बुद्धि 2. सुंगध 3. पेट में छिपे हुएनासूर वाले परेशानियां 4 महिला 5. नींद 6. खुशी 7. तरल पदार्थ 8. मलेरिया बुखार 9. माता 10. मोती 11. नमक 12. दिमाग 13. मुहुर्तया 48मिनट की अवधि 14. गौरी की पूजा 15. दही प्रेम 16. वह जो तपस्या करता है 17. रात को मजबूत 18. भोजन 19. चेहरे की चमक 20. अच्छे फल 21. मछली और अन्य जलीय प्राणी 22. कपड़े।

यह देखा गया है कि मजबूत चन्द्र उपर्युक्त चीजों में काफी अच्छा रखता है जबकि एक कमजोर चांद इन्हीं वस्तुओं में कुछ कमी लाता है।

अन्य ज्योतिषीय महत्व:
चाँद कर्क राशि का मालिक है, लेकिन यह 3 डिग्री वृषभ में उच्च का और 3 डिग्री वृश्चिक पर नीच का है। इसका मूलत्रिकोण राशि वृषभ है। यह मन का कारक ग्रह है तथा सभी ग्रहों के बीच एक राजसी स्तर का आनंद उठाता है। इसका रंग पीला भूरा है तथा लिंग स्त्रीलिंग है। यह वैश्य वर्ण तथा सात्विक गुण का है।

चन्द्र बहुत ही हवादार और शांतचित्त है। उसका शरीर गोल है और वह काफी ज्ञानी है। उसकी निगाह काफी शुभ है और वाणी मधुर है, काफी चंचल मन तथा कामुक दिमाग का है। वह एक मुहूर्त का यानी 48 मिनट की अवधि का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा खारे स्वाद का प्रतिनिधित्व करता है।

चंद्रमा सूर्य और बुध का मित्र यानि अनुकूल है जबकि मंगल, शुक्र, वृहस्पति और शनि के लिए तटस्थ है। चंद्रमा किसी भी ग्रह को अपना दुश्मन नहीं मानता। फिर भी शनि, बुद्ध, शुक्र , राहु और केतु चंद्र को अपने दुश्मन के रूप में समझते हैं। चंद्र उत्तरी दिशा में मजबूत है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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