इस दिन होती है रसोईघर की पूजा
मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष 23 दिसंबर 2026 को अन्नपूर्णा जयंती मनायी जायेगी। वैसे तो अन्न का अनादर कभी नहीं करना चाहिए, लेकिन इस दिन खास सावधानी बरतनी चाहिए। माना जाता है कि इस दिन रसोई, चूल्हे आदि का पूजन करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और देवी की कृपा बनी रहती है।
अन्नपूर्णा जयंती 2026 तारीख एवं समय
| विवरण | दिनांक / समय |
|---|---|
| अन्नपूर्णा जयंती 2026 तारीख | बुधवार, 23 दिसंबर 2026 |
| तिथि | मार्गशीर्ष (अग्रहायण) शुक्ल पूर्णिमा |
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 23 दिसंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 24 दिसंबर 2026 को सुबह 06:57 बजे |
| इसी दिन पड़ने वाले अन्य पर्व | दत्तात्रेय जयंती, त्रिपुर भैरवी जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा |
अन्नपूर्णा देवी की पूजा से नहीं होती अन्न और जल की कमी
ऐसी मान्यता है जब पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गयी थी, तब मां पार्वती ने अन्न की देवी, मां अन्नपूर्णा के रूप में प्रकट होकर पृथ्वी लोक पर अन्न उपलब्ध कराकर लोगों की रक्षा की थी। जिस दिन मां अन्नपूर्णा की उत्पत्ति हुई, वह मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा थी। इसी कारण मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा तथा त्रिपुरा भैरवी जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन दान का विशेष महत्व है।
अभी अपनी ऑनलाइन निःशुल्क जन्मपत्री डाउनलोड करें और अपने भविष्य की योजना स्मार्ट तरीके से बनाएं!
माँ अन्नपूर्णा की उत्पति – अन्नपूर्णा माता की कथा
एक बार जब पृथ्वी लोक पर पानी और अन्न समाप्त होने लगा तो परेशान लोगों ने परेशानी से निजात दिलाने के लिए भगवान ब्रह्मा और विष्णु की स्तुति शुरू की। लोगों की परेशानी जान ब्रह्मा और विष्णु ने भगवान शिव की आराधना कर उन्हें योग मुद्रा से जगाया और पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद भगवान शिव ने पृथ्वी का भ्रमण किया। इसके बाद माता पार्वती ने अन्नपूर्णा रूप और भगवान शिव ने भिक्षु का रूप धारण किया। इसके बाद भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा लेकर पृथ्वीवासियों के बीच वितरित किया। इस कारण आज के दिन माता अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है।
अन्नपूर्णा जयंती पूजन विधि
माता अन्नपूर्णा देवी अन्न की देवी है। इस दिन रसोई घर साफ रखना चाहिए। इसके बाद गंगा जल छिड़क कर घर को शुद्ध करना चाहिए एवं घर के चूल्हे की पूजा करनी चाहिए। अन्नपूर्णा जयंती के दिन माता पार्वती तथा भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चहिए। माता अन्नपूर्णा की पूजा करने से घर में कभी अन्न और जल की कमी नहीं होती है।
गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम
FAQs
अन्नपूर्णा जयंती 2026 कब मनाई जाएगी?
अन्नपूर्णा जयंती 2026 मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा को मनाई जाएगी।
अन्नपूर्णा जयंती का क्या महत्व है?
अन्नपूर्णा जयंती के दिन रसोई और चूल्हे का पूजन करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती और देवी की कृपा बनी रहती है।
अन्नपूर्णा जयंती पर कौन-कौन से पूजा विधि अपनाई जाती है?
अन्नपूर्णा जयंती पर रसोई घर साफ करके गंगा जल छिड़क कर शुद्ध करना चाहिए एवं चूल्हे की पूजा करनी चाहिए। माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना भी की जाती है।
अन्नपूर्णा देवी कौन हैं?
माता अन्नपूर्णा देवी अन्न की देवी हैं, जो पृथ्वी लोक पर अन्न की कमी होने पर प्रकट हुई थीं और लोगों को अन्न उपलब्ध कराया था।
अन्नपूर्णा जयंती के दिन दान का क्या महत्व है?
अन्नपूर्णा जयंती के दिन दान का विशेष महत्व होता है, जिससे देवी अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त होती है और घर में समृद्धि बनी रहती है।
