माँ महागौरी की कथा, मंत्र एवं पूजा विधि, नवरात्र का आठवां दिन

माँ महागौरी

नवरात्रि के आठवें दिन यानी दुर्गाष्टमी के दिन माता महागौरी की पूजन का विधान है। राजा हिमावन के घर बेटी के रूप में जन्मी छोटी पार्वती ने बालपन से शिव को पाने के लिए कड़ी तपस्या की। इस तपस्या के बाद शिव उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें स्वीकार किया। कड़ी तपस्या के ताप से माता महागौरी का शरीर काला हो गया और उस पर धूल मिट्टी जम गई। शिव ने उन्हें गंगाजल से नहलाया, तब मां का शरीर स्वर्ण के समान कांतिमय हो गया। मां तभी से महागौरी के नाम से जानी जाती है। इस साल महाष्टमी 24 अक्टूबर 2020 को मनाई जाएगी।

मां महागौरी ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तप किया था। 

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया। देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया और इनके शरीर को गंगा-जल से धोते गए जिससे देवी पुनः विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गई जिसकी वजह से इनका नाम गौरी पड़ा। आपके जीवन में बदलाव लाने के लिए आज ही लग्न विघ्न यन्त्र ख़रीदे और जीवनको समृद्ध बनाएं।माता महागौरी अंत्यंत सौम्य है। मां दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। मां गौरी का ये रूप बेहद सरस, सुलभ और मोहक है। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मां गौरी की उपासना नीचे लिखे मंत्र से करनी चाहिए-

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |

महागौरी शुभं दद्यान्त्र महादेव प्रमोददा ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। 

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां महागौरी अपने भक्तों के विचारों को सही दिशा देती है 

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा करने से भक्त से सभी पाप धुल जाते है। जिसके बाद मां का भक्त हर तरह से शुद्ध हो जाता है। मां महागौरी भक्तों के विचारों की तरंगों को सदमार्ग की ओर ले जाती है और भक्तों के अपवित्र व अनैतिक विचारों को नष्ट कर देती है। हर कोई सुखी वैवाहिक जीवन चाहता है ? लेकिन क्या आप इसमें बाधाओं का सामना कर रहे है ? तो 2020 विवाह संभावना रिपोर्ट से इनका समाधान पाए।

इस दिन होने वाले अन्य सेलीब्रेशनः 

सरस्वती पूजा का दूसरा दिन सरस्वती प्रधान पूजा का दिन माना जाता है। प्रधान यानि प्रमुख। ये पूजा नवरात्रि के आठवें दिन होती है।

सरस्वती प्रधान पूजा का समय

पूर्वाआषाढ़ पूजा मुहूर्तः 16ः03 से 18ः26 तक

अवधिः 2 घंटे 22 मिनट

2020 महाष्टमी, दुर्गाष्टमी 

महाष्टमी को महादुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। जो कि दुर्गा पूजा का दूसरा दिन होता है और सबसे महत्वपूर्ण भी। महाष्टमी पर दुर्गा पूजा महास्नान और षोडशोपचार पूजा से शुरू होती है जो कि काफी हद तक महा सप्तमी पूजा जैसी होती है लेकिन इसमें प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती कि जो कि सिर्फ महासप्तमी को होती है। महाष्टमी पर नौ एक जैसे छोटे बर्तन स्थापित किए जाते है और इसमें सभी नौ दुर्गाओं का आहवान किया जाता है। देवी दुर्गा के सभी नौ रूपों की इस दिन पूजा होती है। देश के ज्यादातर हिस्सों में इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। छोटी बच्चियों को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भेंट दी जाती है। इस खास दिन को दुर्गाष्टमी के रूप में भी मनाया जाता है। दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की पूजा करी जाती है। मां से अपने शत्रुओं पर नियंत्रण करने के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। इस दिन माता दुर्गा की 32  नामावली का पाठ करना अत्यंत सौभाग्यशाली होता है। ये इस प्रकार है-

1) दुर्गा   2) दुर्गार्तिशमनी   3) दुर्गाद्विनिवारिणी 4) दुर्गमच्छेदनी   5) दुर्गसाधिनी 6) दुर्गनाशिनी 7) दुर्गतोद्धारिणी 8) दुर्गनिहन्त्री  9) दुर्गमापहा 10) दुर्गमज्ञानदा  11) दुर्गदैत्यलोकदवानला 12) दुर्गमा   13) दुर्गमालोका   14) दुर्गमात्मस्वरुपिणी  15) दुर्गमार्गप्रदा 16) दुर्गमविद्या  17) दुर्गमाश्रिता 18) दुर्गमज्ञानसंस्थाना    19) दुर्गमध्यानभासिनी 20) दुर्गमोहा   21) दुर्गमगा 22) दुर्गमार्थस्वरुपिणी   23) दुर्गमासुरसंहंत्रि 24) दुर्गमायुधधारिणी   25) दुर्गमांगी 26) दुर्गमता 27) दुर्गम्या 28) दुर्गमेश्वरी   29) दुर्गभीमा 30) दुर्गभामा  31) दुर्गभा 32) दुर्गदारिणी ।

इसके आखिरी में ये जरूर बोलें-  जो भी इन 32  नामों का पाठ करता है, उसके सभी शत्रुओं का मां दुर्गा विनाश कर देती है और उसे सुखी जीवन का आशीर्वाद देती है।

महागौरी का मंत्र और उनसे जुड़े अन्य तथ्यः 

मां महागौरी मंत्रः ओम महागौरियेः नमः, इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

आठवें दिन का रंगः गुलाबी रंग

आठवें दिन का प्रसादः मिठाई जैसे मलाई बर्फी, पेडा, रसमलाई, एवं दूध व फल से निर्मित मिठाई

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,

गणेशास्पीक्स डॉटकॉम टीम

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21 Oct 2020

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