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जानिए कुछ ऐसे योगासन (yogasan) जिनसे ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता है !

जानिए कुछ ऐसे योगासन (yogasan) जिनसे ग्रहों के दुष्प्रभाव को दूर किया जा सकता है !

अक्सर हमारे स्वास्थ्य पर हमारे ग्रहों का प्रभाव जरूर पड़ता है। सूर्य से लेकर राहु तक सभी नवग्रहों के कुंडली में खराब इफेक्ट के कारण हमारे स्वास्थ्य में गिरावट आती है। बहुत से योग एक्सपर्ट्स ने अपने गहन अध्ययन से अलग-अलग आसनों को अलग-अलग ग्रहों को कनेक्ट करके सिद्ध किया है कि ग्रहों के दुष्प्रभावों को योगासन के जरिए ठीक किया जा सकता है। आज हम बता रहे हैं ऐसे ही कुछ योग आसन के बारे में, जो अलग-अलग ग्रहों के दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में किसी ग्रह का कोई दुष्प्रभाव मिल रहा है, तो आप इन योगासन के जरिए अपने ग्रहों को मजबूत बना सकते हैं।

सूर्य के लिए करें सूर्य नमस्कार

यदि आपकी कुंडली में सूर्य के नेगेटिव इफेक्ट मिल रहे हैं और सूर्य से मिलने वाले सभी लाभों से आप वंचित हैं, तो आपको कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। आपका आत्मविश्वास हमेशा कमजोर रहेगा। आपके नेतृत्व के गुण भी कमजोर ही रहेंगे। वहीं स्वास्थ्य की कई समस्याएं आपको हो सकती है। आपकी आंखों की रोशनी कमजोर रहेगी। आपको हार्ट अटैक, एनिमिया और कमजोर नर्वस सिस्टम की समस्या हो सकती है। सूर्य के इन दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए आपको योगासन में सूर्य नमस्कार करना चाहिए। इसके अलावा सूर्य के लिए योगसन में अग्निसार क्रिया को किया जाना चाहिए। सूर्य के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए भस्त्रिका आसन भी किया जा सकता है।

चंद्रमा के शुभ प्रभाव के लिए करें यह योग

यदि आपको कुंडली में चंद्रमा से संबंधित कोई नकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं, तो आप अतिरिक्त इमोशनल हो सकते हैं। बार-बार आपका मूड स्विंग होगा और आपको सर्दी-जुकाम की समस्या ज्यादा हो सकती है। चंद्रमा के इन्हीं नकारात्मक उपायों को दूर करने के लिए हमारे शास्त्र में योग के कई आसनों को शामिल किया गया है। योगासन के जरिए चंद्रमा से शुभ प्रभाव पाने के लिए भस्त्रिका प्राणायाम किया जाना चाहिए। वहीं अनुलोम-विलोम करने से चंद्रमा से जुड़ी कई तरह के दुष्परिणाम दूर हो सकते हैं। चंद्रमा से शुभ परिणाम पाने के लिए ओम मंत्र के साथ ध्यान करना चाहिए।

मंगल के लिए करें यह योगासन

मंगल ऊर्जा के लॉर्ड हैं। मंगल से संबंधित किसी भी समस्या के कुंडली में होने पर व्यक्ति हमेशा सुस्त रहता है। किसी भी काम को करने में ऊर्जा नहीं रहती है। मंगल से पीड़ित व्यक्तियों को सेक्स से संबंधित समस्याएं भी हो सकती है। ऐसे में कुंडली में मंगल के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के लिए पद्मासन में बैठकर ध्यान करना अच्छा रहता है। मंगल ग्रह से शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए मयूरासन, तितली आसन और शीतलीकरण प्राणायम करना अत्यधिक लाभदायक रहता है। इन योगासनों से मंगल के दुष्परिणाम दूर होते हैं और व्यक्ति ऊर्जावान बनता है।

बुध ग्रह के लिए कौन सा है योगासन है श्रेष्ठ

बुध ग्रह यदि कमजोर है तो आपकी बुद्धि को प्रभावित करता है। इससे आपकी निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है। कई तरह के त्वचा से संबधित रोग भी बुध के नकारात्मक परिणामों का ही असर है। बुध के लिए योगसन में भस्त्रिका आसन करना श्रेष्ठ रहता है। वहीं बुध के शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए बालासन, उत्तनासन और शीर्षासन किया जाना चाहिए। इससे दिमाग स्थिर रहता है और व्यक्ति फोकस्ड रहता है। बुध के शुभ प्रभावों को इन योगसानों के जरिए बढ़ाया भी जा सकता है। वहीं बुध के कारण त्वचा से संबंधित कोई परेशानी आ रही है, तो हलासन किया जा सकता है।

गुरु ग्रह के लिए यह योगासन है अच्छा

यदि आपकी कुंडली में गुरु के सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो आपको मोटापा, डायबिटीज, लीवर और पेट सेे संबंधित बीमारियां देता है। कभी-कभी गुरु के खराब प्रभाव के कारण कैंसर जैसे रोग भी हो जाते हैं। गुरु के नकारात्मक परिणामों को दूर करने के लिए कपाल भांति, सर्वांगासन और सूर्य नमस्कार से संबंधित 12 योगासन किए जाने चाहिए। गुरु के सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए इन योगासनों के साथ प्राणायाम भी किया जाना चाहिए। वहीं गुरु के दुष्परिणाम कुंडली में मिल रहे हैं, तो मिठाई छोड़ देना चाहिए

शुक्र ग्रह को मजबूत करेंगे यह योग

यदि आपको शुक्र से संबंधित सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो आपकी सेक्सुअल लाइफ में दिक्कत आ सकती है। वहीं जेनेटिक हार्मोनल इमबैलेंस भी बहुत ज्यादा हो सकता है। महिलाओं को शुक्र से संबंधित नकारात्मक परिणाम के असर के चलते मंथली साइकिल में भी दिक्कत आ सकती है। शुक्र से संबंध योगासन जैसे धनुरासन, हलासन, मूलबंध और जानूशीर्षासन करने से काफी फायदा मिलता है। ये आसन शरीर में हार्मोनल इमबैलेंस को खत्म करते हैं। वहीं यदि सेक्सुअल लाइफ से संबंधित कोई परेशानी है, तो भूजंगासन, सेतुबंधासन और गरुड़ासन करना चाहिए।

रूठे शनि ग्रह को इन योगासन से मनाएं

शनि के दुष्प्रभावों के चलते आर्थराइटिस की समस्या, जोड़ों में दर्द, हार्ट से संबंधित समस्या, चिंता और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। शनि ग्रह से जुड़े इन दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए भ्रामरी प्राणायाम करना अच्छा रहता है। वहीं कपालभांति के साथ मंडूकासन और उष्ट्रासन किया जाना चाहिए। इसके अलावा अग्निसार और शीतलीकरण क्रिया भी शनि के दुष्प्रभावों को कम करता है। इन आसनों के करने से जोड़ों में दर्द की समस्या तो दूर होती है, मन से चिंता दूर होती है और नींद भी पर्याप्त मात्रा में मिलती है।

केतु को मजबूत करें इन योगासनों से

जब केतु के खराब परिणाम मिल रहे हों, तो आपको एनिमिया की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा पाइल्स, अपच और स्किन से संबंधित कई रोग भी केतु के दुष्प्रभाव के चलते होते हैं। इन दुष्प्रभावों को योगासन के जरिए दूर किया जा सकता है। केतु से जुड़े योगासन जैसे शीर्षासन, कपाल-भांति करने से कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं।

राहु के लिए करें इन योगासनों को

राहु यदि खराब है, तो आपको कई तरह से नुकसान दे सकता है। आप हमेशा किसी ना किसी डर में बने रहते हैं। मस्तिष्क से संबंधित रोग होते हैं। कई बार आप गुमसुम हो जाते हैं। इन बीमारियों का कोई कारण कभी समझ नहीं आता है। राहु के शुभ प्रभावों को बढ़ाने के लिए भ्रामरी प्राणायाम करना श्रेष्ठ रहता है। वहीं शीर्षासन करना और ओम उच्चारण के साथ ध्यान करना राहु के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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