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शतभिषा नक्षत्र 2027: यहाँ जानें ज्योतिष भविष्यवाणी, नक्षत्र तिथि और समय

शतभिषा नक्षत्रों में चौबीसवें स्थान पर आता है और पूरी तरह कुंभ राशि के भीतर, 6°40′ से 20°00′ तक फैला हुआ है। इसका स्वामी ग्रह राहु है और अधिष्ठाता देव वरुण।

नाम को टुकड़ों में देखिए तो अर्थ खुल जाता है — “शत” यानी सौ, और “भिषज” यानी वैद्य। शतभिषा का अर्थ है सौ वैद्य, या सौ औषधियाँ।

यह 27 नक्षत्रों में चिकित्सा और उपचार का नक्षत्र है। और ध्यान दीजिए, यहाँ बात एक वैद्य की नहीं, सौ की है — यानी उपचार का कोई एक रास्ता नहीं होता। जहाँ एक इलाज काम न करे, वहाँ दूसरा खोजा जाता है।

यही इस नक्षत्र के जातकों का पूरा स्वभाव है। ये हार नहीं मानते, रास्ता बदल लेते हैं। कोई समस्या सामने आए तो ये उसे उसी तरीक़े से हल करने की कोशिश नहीं करते जो सब करते हैं — ये कोई नया तरीक़ा ढूँढ़ते हैं।

इसका प्रतीक एक ख़ाली घेरा है। घेरा वह रेखा है जो कुछ चीज़ों को भीतर रखती है और बाक़ी को बाहर। यह प्रतीक इस नक्षत्र के बारे में बहुत कुछ कह देता है — रक्षा भी, और अकेलापन भी।

शतभिषा नक्षत्र: एक नज़र में

विवरणजानकारी
नक्षत्र क्रमचौबीसवाँ नक्षत्र
संस्कृत नामशतभिषा (शततारका)
अर्थसौ वैद्य, सौ औषधियाँ
राशि और विस्तारकुंभ 6°40′ से 20°00′ तक
स्वामी ग्रहराहु
अधिष्ठाता देववरुण
प्रतीकख़ाली घेरा / सौ तारे
तत्वआकाश 
गणराक्षस गण
नाड़ीआदि
योनिअश्व (घोड़ा)
स्वभावचर (चल)
नाम अक्षरगो, सा, सी, सू

वरुण देव — जल, वचन और उपचार

इस नक्षत्र के देवता वरुण हैं, और वेदों में उनकी भूमिका सबसे दिलचस्प है।

वरुण जल के देवता हैं — पर सिर्फ़ नदी-समुद्र के नहीं, आकाश के जल के भी। वर्षा उन्हीं से आती है। और जल का अर्थ यहाँ शुद्धि है: जो बहता है, वह साफ़ करता है।

दूसरी भूमिका इससे भी गहरी है। वरुण ऋत के रक्षक हैं — ऋत यानी वह नियम जिससे सृष्टि चलती है। जो दिए हुए वचन को तोड़ता है, वरुण उसका हिसाब रखते हैं। इसीलिए परंपरा में शपथ और संकल्प वरुण के नाम पर लिए जाते थे।

और तीसरी बात, जो इस नक्षत्र को समझने की चाबी है। वेदों में वरुण के पास रोग भी है और उसका उपचार भी। वे बंधन डालते हैं और वही खोलते भी हैं। यानी बीमारी और दवा, दोनों एक ही जगह से आते हैं।

इसका अर्थ यह है कि शतभिषा के जातक अक्सर उस चीज़ के जानकार बनते हैं जिससे वे ख़ुद गुज़रे हैं। जो अपनी तकलीफ़ से लड़ा, वही दूसरों की तकलीफ़ समझता है। इस नक्षत्र में डॉक्टर, वैद्य, चिकित्सक, परामर्शदाता और शोधकर्ता इतने क्यों मिलते हैं — इसका जवाब यहीं है।

स्वामी ग्रह राहु इसमें एक और परत जोड़ते हैं। राहु परंपरा से बाहर सोचने वाले ग्रह हैं। और यहाँ राशि के स्वामी शनि हैं, जो अकेले चलने वाले। राहु और शनि, दोनों बाहरी माने जाते हैं — इसीलिए यह नक्षत्र भीड़ का नहीं, भीड़ से अलग खड़े व्यक्ति का है।

चर नक्षत्र — गति वाले कामों के लिए शुभ

श्रवण और धनिष्ठा की तरह शतभिषा भी चर नक्षत्र है। 27 में पाँच नक्षत्र चर कहे गए हैं — पुनर्वसु, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा। ध्यान दीजिए, इनमें तीन लगातार आते हैं: श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा।

परंपरा में इनमें गति वाले काम शुभ माने गए हैं — यात्रा आरंभ करना, वाहन ख़रीदना, स्थान परिवर्तन, और आवाजाही से जुड़े कार्य।

शतभिषा के मामले में परंपरा एक बात जोड़ती है। चिकित्सा का नक्षत्र होने से इसे औषधि आरंभ करने, उपचार शुरू करने और स्वास्थ्य से जुड़े संकल्प लेने के लिए भी अनुकूल माना गया है।

नक्षत्र मुहूर्त का एक हिस्सा है, पूरा मुहूर्त नहीं। तिथि, वार, योग और अपनी कुंडली भी साथ देखनी चाहिए। और किसी भी चिकित्सा संबंधी निर्णय में मुहूर्त से पहले डॉक्टर की सलाह आती है।

शतभिषा नक्षत्र 2027 की तिथि और समय

2027 में शतभिषा नक्षत्र तेरह बार पड़ रहा है। नीचे आरंभ तथा समाप्ति की तिथि और समय दिया गया है। सभी समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार हैं।

आरंभ तिथिदिनआरंभ समयसमाप्ति तिथिसमाप्ति समय
11 जनवरी 2027सोमवारशाम 05:5412 जनवरी 2027रात 08:14
07 फरवरी 2027रविवाररात 11:4909 फरवरी 2027रात 01:57
07 मार्च 2027रविवारसुबह 06:4208 मार्च 2027सुबह 08:35
03 अप्रैल 2027शनिवारदोपहर 02:4204 अप्रैल 2027शाम 04:33
30 अप्रैल 2027शुक्रवाररात 11:1002 मई 2027रात 01:16
28 मई 2027शुक्रवारसुबह 07:1529 मई 2027सुबह 09:43
24 जून 2027गुरुवारदोपहर 02:2125 जून 2027शाम 05:07
21 जुलाई 2027बुधवाररात 08:3522 जुलाई 2027रात 11:25
18 अगस्त 2027बुधवाररात 02:3219 अगस्त 2027सुबह 05:15
14 सितंबर 2027मंगलवारसुबह 08:5915 सितंबर 2027सुबह 11:33
11 अक्टूबर 2027सोमवारशाम 04:2212 अक्टूबर 2027शाम 06:56
08 नवंबर 2027सोमवाररात 12:3009 नवंबर 2027रात 03:14
05 दिसंबर 2027रविवारसुबह 08:4206 दिसंबर 2027सुबह 11:41

शतभिषा नक्षत्र के जातकों का स्वभाव

शतभिषा जातक की पहली पहचान यह है कि वह भीड़ के साथ नहीं चलता। न विरोध करने के लिए, बल्कि इसलिए कि उसे भीड़ का रास्ता ठीक नहीं लगता।

ये सवाल पूछते हैं — और वे सवाल जो लोग पूछना नहीं चाहते। किसी परंपरा के पीछे कोई कारण न दिखे तो ये उसे मानने से इंकार कर देते हैं। इसी वजह से ये कभी-कभी अकेले पड़ जाते हैं, और अक्सर उन्हें इसकी शिकायत भी नहीं होती।

दूसरी बड़ी ख़ूबी सहनशक्ति है। इस नक्षत्र के जातक जीवन में जल्दी सफल नहीं होते। शुरुआत में हालात अक्सर कठिन रहते हैं और परिणाम देर से आते हैं। पर ये टिके रहते हैं — और जो देर से आता है, वह टिककर आता है। शतभिषा को देर से खिलने वाला नक्षत्र कहा जाता है।

तीसरी बात वचन की है। वरुण के नक्षत्र में दिए हुए वचन का बहुत महत्व है। ये आसानी से वादा नहीं करते, पर करके निभाते हैं। और सामने वाले से भी यही अपेक्षा रखते हैं — किसी ने भरोसा तोड़ा तो ये उसे भूलते नहीं।

चौथी और सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें दूसरों का दर्द समझ में आता है। और अक्सर इसलिए कि ये ख़ुद उससे गुज़रे हैं। यही इन्हें अच्छा चिकित्सक, अच्छा सलाहकार और अच्छा सुनने वाला बनाता है।

चुनौती इस अकेलेपन से आती है। ये अपनी बात किसी से नहीं कहते और सब भीतर रखते हैं। धीरे-धीरे यह एक दीवार बन जाती है — लोग बाहर, ये भीतर। घेरे वाला प्रतीक यही कहता है: जो रेखा रक्षा करती है, वही अलग भी करती है।

दूसरी चुनौती ज़िद है। राहु का प्रभाव इन्हें अपनी सोच पर अड़ जाने वाला बना देता है, और कभी-कभी ये सही होते हुए भी नुक़सान उठा लेते हैं।

मज़बूत पक्ष

  • स्वतंत्र सोच और सवाल पूछने का साहस
  • असाधारण सहनशक्ति; कठिन दौर से निकल आना
  • दूसरों का दर्द समझने की गहरी क्षमता
  • दिए हुए वचन पर टिके रहना
  • शोध और खोजबीन में स्वाभाविक रुचि
  • नया रास्ता खोज लेने की क्षमता

चुनौतियाँ

  • अपनी बात किसी से न कहना
  • अकेलेपन की ओर झुकाव
  • अपनी सोच पर ज़रूरत से ज़्यादा अड़ जाना
  • भरोसा करने में बहुत समय लेना
  • सफलता देर से मिलने पर निराशा
  • ख़ुद की सेहत को सबसे आख़िर में रखना

शतभिषा नक्षत्र 2027 भविष्यवाणी: जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार

करियर और कामकाज

शतभिषा जातक वहाँ सबसे अच्छा करते हैं जहाँ कोई पुरानी समस्या हो जिसका हल किसी को न मिला हो। इन्हें बने-बनाए रास्ते पर चलने वाला काम रास नहीं आता।

2027 में करियर की दिशा साफ़ होती दिखती है। साल की पहली छमाही में लगेगा कि आपका काम किसी को दिख नहीं रहा — यह भावना इस नक्षत्र के लिए बहुत सामान्य है, और इस साल इसे लेकर हड़बड़ी में कोई फ़ैसला न लें।

साल के मध्य के बाद पहचान मिलने के संकेत हैं। और वह पहचान अक्सर किसी अनपेक्षित जगह से आएगी — किसी बाहरी संस्था, दूसरे शहर, या किसी ऐसे व्यक्ति से जिससे आपका सीधा संबंध नहीं है। राहु के नक्षत्र में अवसर सामान्य रास्ते से नहीं आता।

एक बात ध्यान रखें। इस साल कोई ऐसा प्रस्ताव आ सकता है जो आपकी अभी की दिशा से हटकर हो — नया क्षेत्र, नई पढ़ाई, या विदेश से जुड़ा कुछ। इस नक्षत्र के लिए ऐसे मोड़ आमतौर पर शुभ रहते हैं। सोचकर हाँ कहिए, पर डर के कारण मना मत कीजिए।

अनुकूल क्षेत्र: चिकित्सा और शल्य चिकित्सा, आयुर्वेद तथा वैकल्पिक उपचार, औषधि निर्माण और अनुसंधान, मनोविज्ञान और परामर्श, वैज्ञानिक शोध, तकनीक और इंजीनियरिंग, ज्योतिष एवं गूढ़ विद्याएँ, पर्यावरण तथा जल से जुड़े क्षेत्र, समाज सुधार और सेवा संस्थाएँ, लेखन तथा विश्लेषण।

प्रेम और रिश्ते

रिश्तों में शतभिषा जातक देर से खुलते हैं। भरोसा बनने में समय लगता है, पर एक बार बन जाए तो ये पूरी तरह साथ रहते हैं। इनका प्रेम शोर वाला नहीं होता — दिखता कम है, टिकता ज़्यादा है।

2027 में सबसे बड़ा मुद्दा यही रहेगा। आप साथ हैं, पर साथी को यह पता नहीं चल रहा कि आपके मन में क्या है। अपनी बात न कहने की आदत इस साल दूरी बना सकती है। जो भीतर है, उसे शब्द दीजिए — इस नक्षत्र के लिए यही सबसे असरदार उपाय है।

साल की दूसरी छमाही रिश्तों के लिए बेहतर है। इस दौरान कोई पुरानी ग़लतफ़हमी दूर हो सकती है। अविवाहित जातकों के लिए विवाह प्रस्ताव आने की संभावना उत्तरार्ध में अधिक है, और रिश्ता किसी अप्रत्याशित रास्ते से आ सकता है।

विवाह और अनुकूलता

वैवाहिक जीवन में ये वफ़ादार और ज़िम्मेदार होते हैं, पर अपनी निजी जगह को लेकर सजग भी। इन्हें कुछ समय अकेले चाहिए होता है, और साथी को यह समझना पड़ता है कि यह दूरी नहीं, इनकी बनावट है।

अनुकूलता केवल नक्षत्र से तय नहीं होती। दोनों की पूरी जन्मकुंडली और अष्टकूट गुण मिलान साथ देखने पर ही सही तस्वीर बनती है। शतभिषा की नाड़ी आदि है और गण राक्षस, इसलिए मिलान में नाड़ी और गण दोष की जाँच विशेष रूप से करानी चाहिए। ध्यान रहे, कोई एक दोष अकेले रिश्ते को अस्वीकार करने का आधार नहीं होता — पूरी कुंडली देखी जाती है।

धन और आर्थिक स्थिति

पैसों के मामले में यह नक्षत्र देर से जमता है। शुरुआती वर्षों में तंगी या अस्थिरता आम है, पर मध्य आयु के बाद स्थिति मज़बूत होती जाती है।

2027 में आय स्थिर रहेगी और मध्य के बाद बढ़ने के संकेत हैं। किसी नए क्षेत्र या विदेश से जुड़ी आय की संभावना भी बनती है।

दो सावधानियाँ ज़रूरी हैं। पहली — राहु के नक्षत्र में जल्दी अमीर बनाने वाली योजनाएँ बहुत आकर्षक लगती हैं। इस साल ऐसी किसी भी योजना से पूरी दूरी रखें। दूसरी — शतभिषा जातक अपनी बचत के बारे में किसी से बात नहीं करते और अकेले फ़ैसले ले लेते हैं। इस साल कोई बड़ा वित्तीय निर्णय लेने से पहले किसी जानकार से राय लेना उपयोगी रहेगा।

स्वास्थ्य

यह चिकित्सा का नक्षत्र है, और इसमें एक विडंबना है — ये दूसरों की सेहत का ध्यान रखते हैं और अपनी अनदेखी करते हैं।

राशि के हिसाब से पिंडलियों, टख़नों और घुटनों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि कुंभ राशि का संबंध इन्हीं अंगों से है। वरुण के नक्षत्र में शरीर के तरल संतुलन, गुर्दों और मूत्र मार्ग से जुड़ी शिकायतें भी संभव हैं — पर्याप्त पानी पीना इनके लिए सबसे सरल उपाय है।

राहु के प्रभाव से कभी-कभी ऐसी शिकायतें आती हैं जिनकी वजह जाँच में जल्दी पकड़ में नहीं आती। ऐसी स्थिति में डॉक्टर बदलते रहने के बजाय एक ही जगह पूरी और व्यवस्थित जाँच कराना बेहतर रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। सब कुछ भीतर रखने की आदत इस नक्षत्र में सबसे प्रबल है, और अकेलापन इनके लिए एक असली चुनौती है। अगर मन लंबे समय से भारी है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति या पेशेवर से बात करना कमज़ोरी नहीं — इस नक्षत्र के लिए यह सबसे ज़रूरी उपचार है। सौ वैद्यों के नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति के लिए अपना इलाज कराना भी उसी परंपरा का हिस्सा है।

शतभिषा नक्षत्र के चार पद

यह पूरा नक्षत्र कुंभ राशि में है, इसलिए राशि स्वामी शनि पूरे विस्तार में एक ही रहते हैं। अंतर नवांश से आता है।

प्रथम पद (कुंभ 6°40’–10°00′) — धनु नवांश, स्वामी गुरु यहाँ दर्शन, नैतिकता और सिखाने की क्षमता जुड़ जाती है। जातक अपनी खोज को किसी बड़े उद्देश्य से जोड़ता है। शिक्षण, दर्शन, कानून, परामर्श और अध्यात्म इनके अनुकूल हैं।

द्वितीय पद (कुंभ 10°00’–13°20′) — मकर नवांश, स्वामी शनि यह सबसे मेहनती और व्यावहारिक पद है। धैर्य असाधारण होता है और सफलता देर से पर पक्की मिलती है। प्रशासन, इंजीनियरिंग, शोध, निर्माण और सरकारी सेवा इनके लिए उपयुक्त हैं।

तृतीय पद (कुंभ 13°20’–16°40′) — कुंभ नवांश, स्वामी शनि यहाँ शनि अपने ही नवांश में आते हैं, इसलिए इस पद में स्वतंत्र सोच और सामाजिक दृष्टि सबसे प्रबल है। समाज सुधार, तकनीक, वैज्ञानिक शोध, पत्रकारिता और नीति से जुड़े काम इनके अनुकूल हैं।

चतुर्थ पद (कुंभ 16°40’–20°00′) — मीन नवांश, स्वामी गुरु इस पद में करुणा और अंतर्ज्ञान सबसे गहरा होता है। यह पद उपचार के लिए सबसे मज़बूत माना जाता है। चिकित्सा, सेवा कार्य, मनोविज्ञान, अध्यात्म और देखभाल से जुड़े पेशे इनके लिए सबसे उपयुक्त हैं।

2027 में क्या ध्यान रखें

यह साल शतभिषा जातकों के लिए पहचान का है, पर वह पहचान अपेक्षित रास्ते से नहीं आएगी।

तीन बातें याद रखें: कोई अवसर आपकी अभी की दिशा से हटकर आए तो डर के कारण मना मत कीजिए; जो मन में है उसे कहना सीखिए; और दूसरों की सेहत से पहले अपनी सेहत देखिए।

शतभिषा नक्षत्र के लिए सरल उपाय

  • शनिवार को शनि देव तथा भगवान शिव की उपासना करें
  • “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का नियमित जप करें
  • वरुण देव को जल अर्पित करें और “ॐ वं वरुणाय नमः” का जप करें
  • जल का दान करें, प्याऊ लगवाएँ अथवा किसी जलस्रोत की सफ़ाई में सहयोग करें
  • किसी बीमार व्यक्ति की सहायता करें अथवा औषधि दान करें — चिकित्सा के नक्षत्र के लिए यह सबसे उपयुक्त उपाय है
  • दिए हुए वचन को हर हाल में निभाएँ; वरुण वचन के रक्षक हैं
  • अपनी बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें — इस नक्षत्र के लिए यह किसी मंत्र से बड़ा उपाय है
  • अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत उपाय के लिए अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लें

शतभिषा नक्षत्र की असली ताक़त

घेरा इस नक्षत्र का सबसे सच्चा प्रतीक है, और उसमें एक बात छिपी है जिस पर ध्यान देना चाहिए। घेरा एक ही रेखा से दो काम करता है — भीतर वाले की रक्षा करता है और बाहर वाले को दूर रखता है। यह वही रेखा है। आप तय करते हैं कि वह दीवार बनेगी या घर।

शतभिषा की सीख यही है। इस नक्षत्र के जातकों को अकेलापन स्वाभाविक लगता है, और कुछ हद तक वह उनकी ताक़त भी है — जो अकेले बैठ सकता है, वही गहराई तक सोच सकता है। पर वही रेखा जब बहुत मोटी हो जाती है, तो भीतर सिर्फ़ वे बचते हैं।

नाम में सौ वैद्य हैं, और यह संख्या बेकार नहीं है। इसका अर्थ यह है कि इलाज एक नहीं होता। जो रास्ता बंद दिखे, वह आख़िरी नहीं होता — निन्यानबे और हैं। इस नक्षत्र के जातक यही बात दूसरों को सिखाते हैं, और यही बात ख़ुद पर लागू करना भूल जाते हैं।

पर केवल जन्म नक्षत्र से पूरी तस्वीर नहीं बनती। राहु की स्थिति और बल, कुंभ में ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र का पद, भाव और चल रही दशा — इन सबको साथ देखने पर ही असली चित्र सामने आता है।

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FAQs

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?

शतभिषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है।

शतभिषा नक्षत्र में जन्मे लोगों का स्वभाव कैसा होता है?

शतभिषा नक्षत्र में जन्मे लोग हार नहीं मानते और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए नए तरीकों की तलाश करते हैं।

शतभिषा नक्षत्र के देवता कौन हैं?

शतभिषा नक्षत्र के देवता वरुण हैं, जो जल के देवता माने जाते हैं।

शतभिषा नक्षत्र किस राशि के अंतर्गत आता है?

शतभिषा नक्षत्र पूरी तरह से कुंभ राशि के भीतर आता है।

शतभिषा नक्षत्र का प्रतीक क्या है?

शतभिषा नक्षत्र का प्रतीक एक ख़ाली घेरा है, जो रक्षा और अकेलेपन का संकेत देता है।