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रैना को चयनकर्ताओं की नजर में आने के लिए अपनी सारी ताकत झोकनी होगी

रैना को चयनकर्ताओं की नजर में आने के लिए अपनी सारी ताकत झोकनी होगी

बाएं हाथ के तूफानी बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ ब्रेक गेंदबाज सुरेश रैना एक एेसे भारतीय क्रिकेटर हैं जिन्होंने अभी तक क्रिकेट मैदान में अपना पूरा जौहर नहीं दिखाया है। इन्होंने भारत के लिए 18 टेस्ट मैच, 223 वनडे और 51 टी -20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उत्तर प्रदेश का यह क्रिकेटर आईपीएल में गुजरात लायंस का कप्तान है। खेल के तीनों फॉरमैट्स में इन्होंने बेजोड़ रूप से शानदार प्रदर्शन किया है। रैना ने साल 2010 में श्रीलंका के खिलाफ खेलते हुए शतक जड़ा और साल 2011का विश्व कम जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य भी रहें। पर, दुर्भाग्य ने अभी तक इनका पीछा नहीं छोड़ा है। गणेशजी को लगता है कि ग्रहीय स्थिति सुधरने से अप्रैल 2017के बाद सुरेश रैना की भारतीय क्रिकेट टीम में फिर से वापसी हो सकती है। ये भी हो सकता है कि हमे इनके अच्छे प्रदर्शन भी देखने को मिले। रैना को अपने फैन्स और चयनकर्ताओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपनी सारी शक्तियों को इकट्ठा करके लक्ष्य की ओर लगा देनी की जरूरत होगी।

सुरेश रैना
जन्म तिथि: 27 नवंबर, 1986
जन्म समय: अनुपलब्ध
जन्म स्थान: गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत

सुरेश रैना की सूर्य कुंडली
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रैना के आक्रामक रूख के पीछे ग्रहों का पूरा समर्थन
मिडल ऑर्डर के दिग्गज इंडियन बैट्समैन सुरेश रैना की कुंडली में मंगल व शनि एक दूसरे की राशि में हैं जिससे इस उग्र ग्रह को और भी शक्ति मिलती है। शक्तिशाली मंगल स्पोर्ट्स पर्सनालिटीस को असीम शक्ति से लैस करता है। इसी वजह से सुरेश सशक्त और आक्रामक हैं। इसके अलावा, कुंडली में शुक्र और बुध युति में हैं, जो इनकी त्वरित जोश व शक्ति को दर्शाते हैं। मंगल गुरू के साथ उपस्थित है जिससे मंगल की पॉजिटिव शक्तियां और भी बढ़ जाती हैं। मंगल-गुरू की यह युति इनके एक बहुत ही अनुशासित और जुझारू इंसान बनाती है।

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मिस्टर टी-20 कहे जाने वाले रैना की कुंडली में प्रतिकूल ग्रहों का पारगमन इनकी प्रगति में बाधा डाल सकता है। वृश्चिक राशि में सूर्य व शनि का संयोजन हो रहा है। इसलिए, कभी-कभी इनके फाॅर्म में कमी दिखाई दे सकती है। फलस्वरूप, इनके द्वारा किए गए प्रयास उम्मीद से कम दिखाई दे सकते हैं। वर्तमान में गोचर का शनि इनके जन्म के सूर्य व शनि की युति के ऊप से होकर आगे बढ़ रहा है। यह प्रतिकूल पारगमन इनके लिए कुछ समस्याएं पैदा कर सकता है। राह में आए कुछ अवरोध इनका ध्यान भटका सकते हैं और बाधाएं उनकी प्रगति में अड़गे लगा सकती है।

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स्वास्थ्य और फिटनेस की समस्या चिंतित रखेंगी
टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज सुरेश रैला की कुंडली की पड़ताल करने पर पता चलता है कि गोचर का केतु इनके जन्म के मंगल के ऊपर से होकर गुजर रहा है। केतु का इनके इस ताकतवर ग्रह के ऊपर से भ्रमण करना इनके स्वास्थ्य और फिटनेस के स्तर पर चिंता का विषय उत्पन्न कर सकता है। लेकिन, जनवरी 2017 के मध्य से इनकी हालत में फिर से सुधार होगा और ये टीम इंडिया में जगह बनाने की अपनी कोशिशों में फिर से जुट जाएंगे। गोचर का बृहस्पति इन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में किसी प्रकार से निपटने में सक्षम बनाएगा। सुरेश इस समय मानसिक रूप से दृढ़ प्रतिज्ञ रहेंगे और अवसरों को भुनाने के लिए मतवाले रहेंगे।

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अप्रैल 2017, के बाद फिर से टीम में वापसी संभव
हालांकि, स्टाइलिश बल्लेबाज रैना का खेल में अच्छा योगदान रहेगा, परंतु फिर भी अप्रैल 2017 तक इनके परफॉरमेंस में उतार-चढ़ाव रहेगा। क्रिकेट में इनकी वापसी इतनी आसान नहीं होगी। टीम इंडिया में वापस जगह पाने के लिए इन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा से होकर गुजरना पड़ सकता है। हालांकि, अप्रैल 2017 के बाद इनका आत्मविश्वास फिर से बढ़ने से इनके प्रदर्शन में भी सुधार होगा। मई और सितंबर, 2017 की अवधि के बीच ये फिर से एक अच्छे फार्म में देखे जा सकेंगे। वैसे यदि देखा जाए तो आगामी वर्ष इनके लिए चुनौतीपूर्ण लगता है। इस दौरान इन्हें उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए और अधिक मेहनत व मशक्कत करने की आवश्यकता हो सकती है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
तन्मय के ठाकर
गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम