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हनुमान जयंती 2024 – हनुमान जयंती का महत्व, आजमाएं ये विशेष प्रयोग और लाभ पाएं

हनुमान जयंती 2024 – हनुमान जयंती का महत्व, आजमाएं ये विशेष प्रयोग और लाभ पाएं

“सब सुख लहै तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना॥“- हनुमान चालीसा जो भी व्यक्ति आपकी शरण में आता हैं वह सुख प्राप्त करता है। प्रभु, जब आप ही रक्षक हो तो डर किस बात की।
और
“मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।“– रामरक्षास्तोत्रम्

अर्थ– जिनकी गति मन की तरह और वायु के समान वेग है, जो परम जितेंद्रिय और बुद्धिमानों में सबसे श्रेष्ठ हैं, उन वानरों में अग्रणी श्रीरामजी के दूत पवनपुत्र की मैं शरण लेता हूं। इस कलयुग में हनुमान जी की भक्ति से बढ़कर और कुछ नहीं है।

उपरोक्त पंक्तियों को पढ़कर ही बजरंगबली हनुमान जी की प्रभुता का भान हो जाता है। इनके शरण मात्र में जीवन के तमाम सुख सिमटे हुए हैं। अगर इनकी कृपा हमारे ऊपर हो तो फिर किसी का भय व्यक्ति को नहीं सताता। एेसे हनुमान जी जितेंद्रिय बुद्धि में श्रेष्ठ बल में श्रेष्ठ, वायुपुत्र, वानरों में अग्रणी और भगवान श्री राम के अत्यंत प्रिय है। इस कलियुग में श्री हनुमान जी को जागृत अवस्था वाला देव माना जाता है। मुसीबत के समय में इनके स्मरण मात्र से ही सारी मुश्किलें छू मंतर हो जाती है और आगे बढ़ने का नया रास्ता दिखाई देता है।

हनुमान जयंती कब है

श्री संकटमोचन हनुमानजी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस बार 23-4-2024 को यानी मंगलवार के दिन हनुमान जंयती पड़ रही है।

हनुमान जयंती का महत्व

मंगलवार को जन्मे, मंगल कार्य करने वाले, मंगलमय और कष्ट भंजन देव श्री हनुमान जी को कोटि कोटि वंदन। हनुमान जी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था। चैत्र पूर्णिमा के रोज हमेशा चित्रा नक्षत्र होता है। इस नक्षत्र का स्वामी मंगल है। इसलिए, हनुमान की आराधना मंगलवार और शनिवार को ही की जाती है। इनकी पूजा-आराधना करने से जातक को विशेष फल की प्राप्ति होती है। हनुमान जी भगवान शिवजी के रुद्रावतार हैं। रामावतार में अपने प्रभु श्री राम की मदद करने के आशय से इन्होंने हनुमानजी के रूप में अवतार लेकर अपने आराध्य देव श्री राम की सेवा करते हैं। जहां श्री राम के आराध्य देव भगवान शिवजी हैं, वहीं भगवान शिवजी के आराध्य देव श्रीराम हैं। रामेश्वर शिवलिंग की स्थापना श्रीराम ने ही की थी। श्रीराम कहते हैं, रामस्य ईश्वर इति रामेश्वर। वहीं प्रभु शिव कहते हैं, राम: ईश्वर: यस्य, स: रामेश्वर:। इस प्रकार दोनों एक दूसरे को स्वयं का ईश्वर बताते हैं।

हनुमान जयंती पर क्या करें

चित्रा नक्षत्र में मंगल के होने से मंगलवार को हनुमानजी की पूजा–अर्चना करें तो साहस, आत्मबल, आत्मचिंतन, बल, बुद्धि और वीरता का गुण हमारे अंदर प्रवृष्ट होता है। कई शहरों में हनुमान जयंती के दिन हनुमानजी की शोभायात्रा भी निकलती है।
नीचे हनुमान जंयती के दिन श्री हनुमान जी की पूजा–अाराधना करने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां आपके लिए दी जा रही हैं।

  1. हनुमान जी को तेल, सिंदूर, अड़द चढ़ाएं। आकड़ा (मदार ) के फूल की माला भी चढ़ाई जा सकती है।
  2. हनुमान जी के मंदर में श्री राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से आपको मजबूत सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।
  3. पीपड़ के पेड़ के नीचे बैठकर हनुमान चालीसा करने से लाभ होता है।
  4. मारुती स्तोत्र का पाठ करने से बल और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। मन में छिपा डर दूर होता है।
  5. पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करने से भूत, प्रेत और अन्य बुरी आत्माओं से बचाव किया जा सकता है। कष्टभंजन देव दिलाएंगे आपको हर संकट से मुक्त।
  6. बजरंग बाण का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करने से शक्ति के पुंज महावीर हनुमान जी सभी संकटों को जल्द ही दूर कर देते हैं।
  7. इसके अलावा, हनुमान अष्टक के पाठ से घोर से घोर मुसीबत दूर हो जाती है और संकट मोचन हर मनोकामना पूरी करते हैं।

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व्यक्ति का आत्मविश्वास ही उसे सफलता के शिखर तक ले जाता है। राम रक्षा यंत्र की पूजा आपके हिम्मत और हौसले से भर देती है। जीवन में सुख के आगमन से आपके जीवन में शांति की स्थापना होती है। राम रक्षा यंत्र मंगाने के लिए कृपया यहां क्लिक करें।

हनुमान जयंती की बधाई एवं गणेश जी के आशीर्वाद सहित,

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
प्रकाशभाई पंड्या
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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