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सीता अष्टमी 2025: दिनांक, व्रत कथा, मुहूर्त और पूजन विधि

सीता अष्टमी 2019: दिनांक, व्रत कथा, मुहूर्त और पूजन विधि

सीता अष्टमी व्रत से दांपत्य जीवन होता है सुखद

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि को माता सीता धरती पर अवतरित हुईं थी। इस‍ कारण इस दिन सीता अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह त्योहार सोमवार, मई 5, 2025 को मनाया जाएगा।

माता सीता ने किया था अपने कर्तव्यों का बखूबी पालन

महाराज जनक की पुत्री महाशक्तिस्वरूपा माता सीता का विवाह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के साथ हुआ था। विवाह के पश्चात माता सीता ने एक संस्कारी बहू और वनवास के दौरान अपने पतिव्रत धर्म का पूरी तरह पालन किया। उन्होंने भगवान श्रीराम की श्री शक्ति भी माना जाता है। यही कारण है कि फाल्गुन कृष्ण अष्टमी के दिन व्रत रखकर सुखद दांपत्य जीवन की कामना की जाती है।

सीता अष्टमी व्रत कथा

धार्मिक शास्त्रों के मुताबिक फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि फाल्गुन माह के पुष्य नक्षत्र में जब राजा जनक संतान प्राप्ति की इच्छा से यज्ञ के लिए हल से भूमि तैयार कर रहे थे, उसी समय यज्ञ भूमि से एक बालिका प्रकट हुई। उस बालिका का नाम सीता रखा गया। इस तिथि को जानकी जयंती या सीता अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने से माता सीता की तरह धैर्य की प्राप्ति होती है।

सीता अष्टमी व्रत कथा – पौराणिक मान्यता

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार मारवाड़ क्षेत्र में देवदत्त नामक विद्वान ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी शोभना काफी रुपवति थी। एक बार ब्राह्मण भिक्षाटन के लिए किसी दूसरे गांव गए थे। इस बीच ब्राह्मणी कुसंगत में फंसकर गलत रास्तों पर चलने लगी। पूरे गांव में उसकी निंदा होने लगी तो उसने पूरे गांव को जलवा दिया। पति का त्याग करने के कारण मृत्यु के बाद उसका जन्म चांडाल के घर में हुअा। गांव जलाने के कारण उसे कुष्ठ रोग हो गया और गलत कर्मों के कारण वह अंधी हो गई। इसके बाद वह एक स्थान से दूसरे स्थान भटकने लगी। भटकते हुए वह कौशलपुरी पहुंची। उस दिन सभी पापों का नाश करने वाली फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि थी। भूख से परेशान होकर उसने लोगों से भोजन की मांग की, लेकिन लोगों ने उसे यह कहते हुए भोजन देने से इंकार कर दिया कि, आज जानकी जयंती है, और आज भोजन में अन्न देने वाले को पाप का भागी बनना पड़ता है। लोगों ने उसे दूसरे दिन प्रसाद देने की बात कही। इधर, भूख प्यास से उसकी मौत हो गई, लेकिन अनजाने में उससे जानकी जयंती का व्रत पूरा हो गया और उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इसके बाद उसका पुनर्जन्म हुआ और वह महाराजा जयसिंह की महारानी काम कला के नाम से विख्यात हुई। उसने अपने राज्य में माता सीता और श्री राम के कई मंदिर भी बनवाए। मान्यता है कि सीता अष्टमी पर माता सीता का पूजन करने वाले को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

सीता अष्टमी पूजन विधि

  • सुबह स्नानादि के बाद माता सीता तथा भगवान श्रीराम की पूजा करें।
  • उनकी प्रतिमा पर श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
  • दूध और गुड़ से बने व्यंजन बनाकर दान करना चाहिए।
  • शाम को पूजा करने के बाद बनाए गए व्यंजन से ही व्रत खोलना चाहिए।

सीता अष्टमी मुहूर्त

सोमवार, मई 5, 2025

अष्टमी तिथि प्रारंभ – मई 05, 2025 को 07:35 ए एम बजे

अष्टमी तिथि समाप्त – मई 06, 2025 को 08:38 ए एम बजे

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,

गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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