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बुध के कुंभ गोचर से किन राशियों की बढ़ेगी मुश्किलें और किन राशियों को मिलेगा लाभ

बुध के कुंभ गोचर से किन राशियों की बढ़ेगी मुश्किलें और किन राशियों को मिलेगा लाभ

सूर्य के सबसे करीब और आकार में छोटे बुध को सौरमंडल में युवराज का स्थान प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष में बुध को काल पुरूष की बुद्धि का प्रतीक माना गया है, बुध युवराज होने के साथ युवा अवस्था में मनुष्य के स्वभाव एवं व्यक्तित्व को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। छात्रावस्था एवं विद्या अभ्यास के कारक भी बुध ही है। इसी के साथ वे बुद्धि, मित्र, वीना, व्यापार, चतुरता और शिल्प शास्त्रों के भी कारक है। वहीं बुध के अशुभ प्रभावों की बात करें तो, इसके प्रभाव में मनुष्य वाक चातुर्यता, बुद्धि, और संपत्ति तीन का दुरुपयोग करने में माहिर होता है। बुध के दुष्प्रभाव में व्यक्ति लोगों को छलने के लिए उत्सुक, चोरी करने में उत्साद, गलत बातों को सही साबित करने की क्षमता, विचारों में अस्थिरता, तंत्र-मंत्र में अधिक रस, बुद्धिशली होने के बावजूद मूर्ख, डरपोक, विनयहीन, अज्ञानी होने के बावजूद ज्ञानी होने का आडंरबरकर्ता और गलत अफ़वाह फैलाने में चतुर होते है।

बुध अपने स्वरूप और स्वभाव के अनुसार राशिचक्र की तमाम राशियों को प्रभावित करते है। बुध सूर्य की परिक्रमा में 88 दिनों का समय लेते है। इस हिसाब से उन्हे एक राशि के भ्रमण में लगभग 14 दिनों का समय लगता है। वक्री या किसी विशेष परिस्थिति में राशि भ्रमण का समय कम या ज्यादा भी हो सकता है। फिलहाल बुध का मकर में गोचर हो चुका है और वह 31 जनवरी तक कुंडली के कर्म स्थान पर मकर राशि में अपने मित्र ग्रह सूर्य के साथ भ्रमण करेंगे। मकर राशि के स्वामी शनि है, और बुध व सूर्य दोनों ही अपने शत्रु ग्रह की राशि में भ्रमण कर रहे है। बुध मिथुन और कन्या राशि के स्वामी है और अपने स्थान से स्वाभाविक रूप से सातवें स्थान पर दृष्टि डालते है। मकर में गोचर के बाद 31 जनवरी को बुध मकर से कुंभ में गोचर 2020 करेंगे।सामान्य तौर पर एक राशि में 13 दिनों तक भ्रमण करने वाले बुध 31 जनवरी 2020 से 7 अप्रैल तक कुंभ में ही भ्रमण करने वाले है। इस दौरान वे वक्री और मार्गी होते हुए अपने निर्धारित समय से अधिक समय कुंभ राशि में रहेंगे। बुध का कुंभ गोचर 2020 राशिचक्र की सभी राशियों को प्रभावित करेगा, इस दौरान उन राशियों पर इस गोचर का अधिक प्रभाव पड़ेगा जिन में बुध वक्री या मार्गी होने वाला है।

बुध का कुंभ गोचर, मेष राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर चंद्र राशि मेष के दृष्टिकोण से बेहद ही सकारात्मक और फलदायी होने वाला है। बुध का कुंभ गोचर 2020 मेष जन्म कुंडली के ग्यारहवें भाव में हो रहा है। कुंडली का ग्यारहवां भाव जीवन के दिन-प्रतिदिन के लाभ से जुड़ा है। इस भाव का संबंध जीवन के अप्रत्याशित लाभ, विदेशी ज़मीन पर व्यापार, मित्र मंडल, सार्वजनिक जीवन और बड़े भाई से होता है। बुध के कुंभ गोचर 2020 के प्रभाव में आपको करियर से जुड़े मुद्दों में कड़ी मेहनत के बल पर सफलता मिलने की संभावना नजर आती है। इस दौरान आपको आर्थिक तौर पर भी सफलता मिलेगी और आप करियर या व्यापार में कुछ अप्रत्याशित लाभ के साक्षी बनेंगे। इस दौरान किए गए निवेश से भी आपको अच्छे लाभ मिलने की संभावना है। बुध के कुंभ गोचर 2020 के दौरान आप स्वयं को आर्थिक तौर पर अधिक सक्षम और स्थिर पाएंगे। बुध गोचर 2020 मेष राशि जातकों के प्रेम व वैवाहिक संबंधों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालने वाला है। इस दौरान मेष राशि जातकों के प्रेम संबंध अधिक गहरे और सुखद रहने वाले है, इसी के साथ वैवाहिक जीवन में भी इसके शुभ प्रभाव ही देखने को मिलेंगे। स्वस्थ्य की बात करें तो यह दौर औसत रहने वाला है लेकिन इस दौरान अपनी दिनचर्या और खाने-पीने की आदतों में सुधार लाने की कोशिश करें।

बुध का कुंभ गोचर, वृषभ राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर 2020, चंद्र राशि वृषभ के दसवें भाव में हो रहा है। इस दौरान बुध दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी है और अपने स्थान से कुंडली के सुख स्थान पर दृष्टि डाल रहे है। शनि की स्वराशि में कर्म स्थान पर भ्रमण कर रहे बुध इस समयावधि में वृषभ राशि जातकों के करियर और व्यापार में कुछ अनुकूल प्रभाव डालने वाले है, हालांकिजीवन में आ रही समस्याओं का समाधान प्राप्त करने के लिए बात करें एक अनुभवी ज्योतिषी विशेषज्ञ! इस दौरान आपको अपने पेशेवर जीवन में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। करियर और व्यापार के क्षेत्र में कड़ी मेहनत और सकारात्मक रूख आपको बुध के अनुकूल प्रभावों का अधिक बेहतर लाभ उठाने में मदद करेगा। गणेशा के अनुसार बुध के कुंभ गोचर 2020 के दौरान वृषभ राशि जातकों को धैर्य बनाए रखने की जरूरत है।

बुध का कुंभ गोचर, मिथुन राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर 2020 मिथुन राशि जातकों के जीवन पर मिला-जुला प्रभाव डालने वाला है। मिथुन राशि कुंडली में बुध का कुंभ गोचर 2020 नौवें भाव में हो रहा है, नौवां भाव भाग्य स्थान के नाम से जाना जाता है और इसका संबंध जातक के भाग्य से होता है।

बुध के कुंभ गोचर के दौरान, उन मिथुन राशि जातकों को लाभ होता दिखाई दे रहा है जो किसी प्रोजेक्ट में ऑन साइट काम करने की इच्छा रखते है। हालांकि इस दौरान आपको अपने करियर से जुड़े क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और प्रयास करने होंगे। वहीं इस दौरान शिक्षा प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील मिथुन राशि छात्रों को भी लाभ होता नजर आता है। बुध के कुंभ गोचर से उन छात्रों को अधिक लाभ मिलता नजर आता है, जो किसी विदेशी विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील है। इस दौरान करियर के दृष्टिकोण से आपको अधिक मान्यता मिलने वाली है, जिससे आपके मान-सम्मान में भी बढ़ोत्तरी की संभावना दिखाई देती है।

बुध का कुंभ गोचर, कर्क राशि पर प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर 2020, कर्क राशि कुंडली के आठवें भाव में होने वाला है। कर्क चंद्र कुंडली के अनुसार बुध तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी है। आठवां भाव जिसे आयुष्य स्थान के नाम से जाना जाता है, इसका संबंध जीवन में अचानक घटने वाली घटनाओं से होता है। कुंडली का आठवां भाव अप्रिय घटना, आयुष्य, मृत्यु, नुकसान, लंबी बीमारी, आकस्मिक धन, रहस्य विद्या और महिलाओं के लिए पति की उम्र से संबंध रखता है।

कर्क कुंडली में ग्रहों की स्थिति और बुध गोचर 2020 के प्रभावों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि कर्क राशि जातकों के लिए यह गोचर लाभकारी सिद्ध होने वाला है। इस दौरान आप में से कुछ को विरासत या किसी निवेश के माध्यम से लाभ प्राप्त होने वाला है। जो लोग शोध कार्य के लिए प्रयत्नशील है, उन्हे अपने क्षेत्र में सफलता मिलने की संभावना अधिक दिखाई देती है। बुध का कुंभ गोचर अपूर्ण या लंबित शोध परियोजनाओं या थीसिस के काम को सफलतापूर्वक करने के लिए सबसे शानदार है। इस दौरान आपको अपने प्रयासों को भी बढ़ाना होगा जिससे बुध गोचर के पूरे लाभ प्राप्त किए जा सकें। आपको इस दौरान अनुशासन और नियमित दिनचर्या का पालन करना चाहिए और सांसारिक चीजों के प्रति अधिक कठोर होने से बचना चाहिए। अपने क्षेत्र में सफल होने का सबसे अच्छा तरीका है, कि आप उन लोगों को छांट लें जो सही मायनों में आपकी सहायता करना चाहते है, और आपके शुभ चिंतक है।

बुध का कुंभ गोचर, सिंह राशि पर प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर 2020, सिंह चंद्र कुंडली के सातवें भाव में गोचर करने वाला है। इस दौरान बुध दूसरे और ग्यारहवें भाव का स्वामी भी है। कुंडली का सातवां भाव मुख्य रूप से वैवाहिक जीवन और साझेदारियों से संबंध रखता है।

बुध का कुंभ गोचर सिंह राशि जातकों के जीवन को प्यार और रोमांस से भरने वाला है, इस दौरान सिंह राशि जातकों को प्रेम और वैवाहिक जीवन में बेहद ही अनुकूल परिवर्तन देखने को मिलेंगे। इस समयावधि में आपके और आपके जीवन साथी के बीच की सारी दूरियाँ महज चंद पलों के साथ से ही मिटने वाली है। इस दौरान आप अपने साथी की भावनाओं को अधिक बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और आपका साथी भी आपकी कही अनकही भावनाओं को अधिक बेहतर ढंग से समझने में सक्षम रहेगा। इस दौरान आप अपने जीवन के कुछ खास लम्हें अपने जीवन साथी के साथ बिताने वाले है, इस दौरान आपके प्रेम और आपसी समझ में भी इज़ाफा होने वाला है। बुध सातवें भाव में बैठकर आप में से कुछ को अपने जीवन साथी के साथ पुराने मतभेद दरकिनार कर एक नई शुरूआत करने का मौका भी देगें।

बुध का कुंभ गोचर, कन्या राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर कन्या राशि जन्म कुंडली के छठे भाव में हो रहा है, इस दौरान बुध छठे स्थान पर भ्रमण करते हुए प्रथम और दसवें भाव के स्वामी भी है। कुंडली का छठा भाव शत्रु भाव, पहला भाव लग्न, दसवां भाव कर्म स्थान के नाम से जाना जाता है। शत्रु भाव पीड़ा, पहला भाव शरीर और दसवां भाव कर्म से संबंध रखता है।

बुध के कुंभ गोचर 2020 के दौरान आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक बेहतर तरीके से काम करेगी। लेकिन फिर भी आपको इस दौरान अपने मानसिक तनाव का बेहतर प्रबंधन करना चाहिए। इस दौरान आप अपने मानसिक तनाव को निजी और प्रोफेशनल लाइफ़ के दिन-प्रतिदिन के कार्यों में व्यस्त रहकर मेनेज कर सकते है। हालांकि कुंभ में बुध गोचर 2020 के कन्या राशि जातकों के स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ने वाले है। इस दौरान आप अपनी बुद्धि और चातुर्य को अधिक बेहतर तरीके से लागू कर पाएंगे। इस अवधि में आपको नकारात्मक भावनाओं से बचना होगा अन्यथा आप पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने से आप स्वयं को अपने निर्धारित लक्ष्य के अधिक नज़दीक पाएंगे।

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बुध का कुंभ गोचर, तुला राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

तुला राशि के लिए बुध का कुंभ गोचर 2020, चंद्र कुंडली के पांचवें भाव में होने वाला है, इस दौरान बुध नौवें और बारहवें भाव के स्वामी भी है। कुंडली का पांचवा भाव शिक्षा संतान, नौवां भाव भाग्य, धर्म और बारहवां भाव व्यय से संबंध रखता है। कुंडली का पांचवें भाव के स्वामी शनि है और इसी भाव में बुध का गोचर होने वाला है। ज्ञात हो कि शनि और बुध शत्रु ग्रह है, और उनका संयोजन अप्रत्याशित प्रभाव डालने का काम करता है।

बुध के कुंभ में गोचर के दौरान, आप स्वयं को ऊर्जा और उत्साह के उच्चतम स्तर पर पाएंगे। इस दौरान आपको अपनी नीतियों में कुछ लचीला होने के साथ ही सुझावों के प्रति अधिक खुला होना चाहिए। इससे आपको निजी और पेशेवर दोनों ही क्षेत्रों में लाभ मिलने की संभावना है। इस दौरान तुला राशि छात्रों को शिक्षा प्राप्ति के लिए अधिक प्रयास और मेहनत करना होगा। कुंभ में बुध गोचर 2020 के तुला राशि चंद्र कुंडली के पांचवें भाव में होना शिक्षा के क्षेत्र में कुछ बाधाएं उत्पन्न करने का काम करेगा। इस दौरान जीवन से सभी क्षेत्रों में पूर्व निर्धारित लक्ष्यों की ओर सकारात्मक सोच से निरंतर आगे बढ़ने से सफलता मिलने की संभावनाओं में इज़ाफा होगा। आपको बाधाओं के बारे में चिंता करने की अपेक्षा उसके उजले पक्ष के बारे में विचार करना चाहिए, जिसे आप अपना लक्ष्य मानते है।

बुध का कुंभ गोचर, वृश्चिक राशि पर प्रभाव

चंद्र राशि वृशिचक कुंडली के आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी बुध है और वे अपने कुंभ गोचर के दौरान कुंडली के चौथे भाव में भ्रमण करने वाले है। वैदिक ज्योतिष में कुंडली के चौथे भाव को सुख स्थान माना जाता है, इसका संबंध जातक की माता, सुख, मकान, वाहन, ज़मीन, महत्वकांशा और अचल संपत्ति से होता है। वृश्चिक कुंडली में बुध आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी भी है, आठवें भाव का संबंध आयुष्य से होता है और इसे मृत्यु भाव के नाम से भी जाना जाता है। वहीं ग्यारहवा भाव लाभ स्थान होकर दिन-प्रतिदिन के लाभ से संबंध रखता है।

बुध के कुंभ गोचर के दौरान वृश्चिक राशि जातक अपने जीवन में शांति और सौहार्द का अनुभव करेंगे। इस दौरान आप कुछ नयी चीजें भी खरीदने वाले है, इनमें ज़मीन, मकान, कार या लाइफस्टाइल से संबंधित कोई वस्तु हो सकती है। आपकी संयुक्त रूप से रहने की प्रकृति आपको अपने परिवार के सदस्यों पर निर्भर बना सकती है। कुंभ राशि में बुध गोचर के दौरान आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने जाने की योजना बना सकते है।

बुध का कुंभ गोचर, धनु राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

चंद्र राशि धनु कुंडली के सातवें और दसवें भाव का स्वामी बुध है। धनु कुंडली में बुध का कुंभ गोचर तीसरे भाव में हो रहा है, तीसरा स्थान जातक के पराक्रम से संबंध रखता है इसलिए इसे पराक्रम भवन के नाम से भी जाना जाता है। कुंडली का सातवां भाव साझेदारी और वैवाहिक संबंधों से संबंध रखता है, वहीं दसवां भाव कर्म स्थान होकर काम-धंधा, प्रतिष्ठा, व्यापार-व्यवसाय, सरकारी कार्य, सार्वजनिक जीवन से संबंध रखता है।

बुध के कुंभ गोचर के दौरान धनु राशि जातकों को अपनी मेहनत का लाभ मिलने वाला है। इसके अलावा आर्थिक तौर पर भी यह दौर आपके लिए बेहद कारगर सिद्ध होने वाला है, इस दौरान आपके कमाई के साधनों में इज़ाफा होने वाला है और निवेश के बदले मिलने वाले लाभ में भी वृद्धि होने वाली है। इस समयावधि के दौरान आप अपने कार्यों में अधिक उत्साह और आत्मविश्वास के साथ जुटे होंगे और परिणामों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे होंगे। इस दौरान चीजों और परिस्थिति के अनुसार यथार्थवादी दृष्टिकोण रखना आपके वित्तीय लाभ को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। कुल मिलाकर सूझबूझ और धैर्य के साथ काम करें, क्योंकि बुध का कुंभ गोचर तो आप पर अनुकूल प्रभाव ही डालने वाला है, लेकिन जल्दबाज़ी और हड़बड़ाहट में आप खुद के लिए किसी प्रतिकूल स्थिति का निर्माण कर सकते है।

बुध का कुंभ गोचर, मकर राशि पर पड़ने वाले प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर चंद्र राशि मकर के दूसरे भाव में होने वाला है। इस दौरान कुंडली के छठे और नौवें भाव का स्वामी भी बुध ही है। कुंडली का दूसरा भाव धन, कुटुंब, संपत्ति, परिवार और जन संचार से संबंध रखता है, वहीं छठा और नौवां भाव क्रमशः शत्रु और भाग्य से संबंध रखते है।

कुंभ में बुध गोचर के दौरान आप अपने जीवन की विभिन्न परिस्थितियों से अधिक बेहतर और समझदारी से निपट पाएंगे। इस दौरान आप अपने अनुभवों और वित्तीय स्थितियों का अधिक बेहतर ढंग से उपयोग कर पाएंगे। बुध का कुंभ गोचर आपको बेहद जटिल और मुश्किल परियोजनाओं को अधिक बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। इस अवधि में आप मौलभाव के साथ नयी परियोजनाओं के या अन्य प्रकार के सौदे हासिल कर सकते हैं।

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बुध का कुंभ गोचर, कुंभ राशि पर प्रभाव

बुध का कुंभ गोचर कुंभ राशि के पहले भाव में गोचर करने वाला है, इस दौरान बुध चंद्र राशि कुंभ कुंडली के पांचवें और आठवें भाव का भी स्वामी है। वैदिक ज्योतिष में कुंडली के पहले भाव को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। प्रथम भाव को लग्न स्थान भी कहा जाता है, देश के कई हिस्सों खासकर उत्तर भारतीय क्षेत्र में जन्म कुंडली को लग्न कुंडली ही कहा जाता है। प्रथम भाव का संबंध जातक के शरीर, कद-काठी, संरचना, चरित्र, इच्छा, मनोबल, मनोवृत्ति, संतोष, बल और कीर्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होता है।

बुध का गोचर कुंभ राशि में हो रहा है, और कुंडली के पहले भाव में इस गोचर का होना इसे अधिक महत्वपूर्ण भी बना देता है। बुध के कुंभ गोचर के दौरान आपका ध्यान चीजों और परिस्थितियों को नए तरीके से रचनात्मक संतुष्टि के साथ पूरा करने पर होगा। यह बुध गोचर कुंभ राशि जातकों पर अनुकूल प्रभाव डालने वाला है, गोचर के प्रभाव में आप नए लक्ष्यों के साथ नई रणनीतियां बनाएँगे। यह समयावधि आपको अपने निर्धारित लक्ष्यों के अधिक नज़दीक ले जाने में सहायक होने वाली है। बुध के कुंभ गोचर के दौरान आप कुछ दिलचस्प विचार या कोई बौद्धिक दृष्टिकोण पेश कर सकते है। बुध का कुंडली के प्रथम भाव में गोचर आपको और आपकी उपस्थिति को अधिक आकर्षक और प्रभावशाली बनाने का काम कर सकता है। बुध के कुंभ गोचर के दौरान आपको सम्मान, प्रशंसा और उत्सावर्धन मिलने वाला है, बुध गोचर के प्रभाव आपके विचार और दृष्टिकोण में अधिक ईमानदारी और सच्चाई लाने का काम करेंगें।

बुध का कुंभ गोचर, मीन राशि पर प्रभाव

चंद्र राशि मीन कुंडली के बारहवें भाव में हो रहा बुध का कुंभ गोचर, मीन राशि जातकों को कुछ हद तक परेशान भी कर सकता है। इस दौरान बुध गोचर कुंडली के बारहवें भाव में हो रहा है और साथ ही बुध कुंडली के चौथे और सातवें भाव के स्वामी भी बुध हैं। कुंडली के बारहवें भाव का संबंध व्यय, मोक्ष, खर्च, चिंता, त्रास, राज्य भय, जेल, तलाक, विदेश यात्रा और नुकसान से होता है।

बुध के कुंभ गोचर के दौरान मकर राशि जाताकों के जीवन में कुछ प्रतिकूल प्रभाव पड़ने वाले है। इस दौरान आपको अपनी वित्तीय योजना का पुनर्वालोकन करना चाहिए। इस दौरान आपकी लापरवाही, बेपरवाही और निजी संपत्ति तैयार करने की जल्दबाजी आपकी आय को प्रभावित कर सकती है। अपनी कमाई की क्षमताओं के बारे में अधिक आत्मविश्वासी होना आपको नुकसान पहुंचा सकता है, अनुचित जोखिम लेने से बचें। इस दौरान आपको उधार या लोन लेने से भी बचने की भी सलाह है।

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