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कर्णवेध मुहूर्त 2027: कान छिदवाने का शुभ दिन, समय और महत्व

कर्णवेध मुहूर्त

कर्णवेध संस्कार क्या है और क्यों किया जाता है?

हिंदू धर्म में हर शुभ अवसर मुहूर्त के अनुसार मनाया जाता है, जिसे अनुभवी ज्योतिषी तय करते हैं। जन्म के 28वें दिन, अन्नप्राशन और कान छेदने जैसी रस्में बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। कर्णवेध संस्कार वह हिंदू परंपरा है जिसमें बच्चे के कान पहली बार छेदे जाते हैं।

“कर्णवेध” दो शब्दों से बना है – कर्ण यानी कान और वेध यानी छेदन। इस संस्कार में बच्चे के कान सही तरीके से छेदकर उसे सजाया जाता है। इसे समय पर करना जरूरी माना जाता है क्योंकि ऐसा करने से बच्चे पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।

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कर्णछेदन का मुहूर्त जनवरी 2027

तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
11 जनवरी 2027सोमवारसुबह 07:15 बजे से शाम 05:42 बजे तकधनिष्ठाशुक्ल तृतीया
15 जनवरी 2027शुक्रवारसुबह 07:14 बजे से शाम 05:45 बजे तकरेवतीशुक्ल सप्तमी
20 जनवरी 2027बुधवारसुबह 07:14 बजे से शाम 04:19 बजे तकमृगशीर्षशुक्ल त्रयोदशी
28 जनवरी 2027गुरुवारदोपहर 03:52 बजे से शाम 04:56 बजे तक (श्रेष्ठ)चित्राकृष्ण सप्तमी
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
08 फरवरी 2027सोमवारसुबह 07:04 बजे से शाम 06:05 बजे तकशतभिषाशुक्ल द्वितीया
11 फरवरी 2027गुरुवारसुबह 07:02 बजे से शाम 06:07 बजे तकरेवतीशुक्ल पंचमी
18 फरवरी 2027गुरुवारसुबह 11:43 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक (श्रेष्ठ), सुबह 08:21 बजे से सुबह 09:46 बजे तक, दोपहर 03:24 बजे से शाम 06:13 बजे तकपुनर्वसुशुक्ल द्वादशी
19 फरवरी 2027शुक्रवारसुबह 06:56 बजे से शाम 06:13 बजे तकपुष्यशुक्ल त्रयोदशी
25 फरवरी 2027गुरुवारसुबह 06:50 बजे से सुबह 09:32 बजे तकचित्राकृष्ण पंचमी
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
10 मार्च 2027बुधवारदोपहर 02:00 बजे से शाम 06:26 बजे तक (श्रेष्ठ)रेवतीशुक्ल द्वितीया
11 मार्च 2027गुरुवारसुबह 06:35 बजे से सुबह 11:20 बजे तकरेवतीशुक्ल तृतीया
15 मार्च 2027सोमवारसुबह 09:30 बजे से सुबह 10:51 बजे तक (श्रेष्ठ)मृगशीर्षशुक्ल सप्तमी
18 मार्च 2027गुरुवारसुबह 06:27 बजे से शाम 06:31 बजे तकपुष्यशुक्ल एकादशी
24 मार्च 2027बुधवारसुबह 06:20 बजे से शाम 06:34 बजे तकचित्राकृष्ण द्वितीया
25 मार्च 2027गुरुवारसुबह 06:19 बजे से शाम 06:34 बजे तकस्वातिकृष्ण तृतीया
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
08 अप्रैल 2027गुरुवारसुबह 06:03 बजे से शाम 06:02 बजे तकअश्विनीशुक्ल द्वितीया
19 अप्रैल 2027सोमवारसुबह 05:51 बजे से शाम 06:48 बजे तकहस्तशुक्ल त्रयोदशी
23 अप्रैल 2027शुक्रवारसुबह 05:47 बजे से शाम 06:51 बजे तकअनुराधाकृष्ण तृतीया
30 अप्रैल 2027शुक्रवारशाम 05:16 बजे से शाम 06:55 बजे तक (श्रेष्ठ)धनिष्ठाकृष्ण दशमी
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
10 मई 2027सोमवारशाम 06:07 बजे से शाम 07:01 बजे तक (श्रेष्ठ)पुनर्वसुशुक्ल पंचमी
12 मई 2027बुधवारसुबह 05:32 बजे से दोपहर 02:54 बजे तकपुष्यशुक्ल सप्तमी
17 मई 2027सोमवारदोपहर 12:17 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक (श्रेष्ठ), सुबह 05:29 बजे से सुबह 07:11 बजे तक, सुबह 08:53 बजे से सुबह 10:35 बजे तक, दोपहर 03:41 बजे से शाम 07:05 बजे तकहस्तशुक्ल द्वादशी
27 मई 2027गुरुवारशाम 05:18 बजे से शाम 07:11 बजे तक (श्रेष्ठ)धनिष्ठाकृष्ण सप्तमी
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
02 जून 2027बुधवारसुबह 05:23 बजे से सुबह 07:07 बजे तक (श्रेष्ठ), सुबह 09:55 बजे से सुबह 10:35 बजे तकअश्विनीकृष्ण द्वादशी
07 जून 2027सोमवारसुबह 05:22 बजे से शाम 07:17 बजे तकपुनर्वसुशुक्ल तृतीया
14 जून 2027सोमवारसुबह 05:22 बजे से शाम 05:25 बजे तकचित्राशुक्ल एकादशी
24 जून 2027गुरुवारसुबह 05:24 बजे से दोपहर 02:22 बजे तकधनिष्ठाकृष्ण पंचमी
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
05 जुलाई 2027सोमवारसुबह 05:28 बजे से सुबह 09:19 बजे तकपुनर्वसुशुक्ल द्वितीया

अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान कर्णवेध के लिए कोई भी शुभ तिथियां उपलब्ध नहीं हैं।

तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
12 नवंबर 2027शुक्रवारसुबह 06:41 बजे से सुबह 07:55 बजे तकरेवतीशुक्ल त्रयोदशी
18 नवंबर 2027गुरुवारसुबह 06:45 बजे से शाम 05:26 बजे तकपुनर्वसुकृष्ण पंचमी
तारीखदिनमुहूर्त का समयनक्षत्रतिथि
03 दिसंबर 2027शुक्रवारसुबह 06:57 बजे से शाम 05:23 बजे तकश्रवणशुक्ल पंचमी
09 दिसंबर 2027गुरुवारसुबह 07:01 बजे से शाम 05:24 बजे तकरेवतीशुक्ल एकादशी
16 दिसंबर 2027गुरुवारसुबह 07:06 बजे से सुबह 09:13 बजे तकपुनर्वसुकृष्ण तृतीया
31 दिसंबर 2027शुक्रवारसुबह 07:13 बजे से दोपहर 01:06 बजे तकश्रवणशुक्ल तृतीया

आजकल कर्णवेध संस्कार में काफी बदलाव आ गए हैं। कई माता-पिता इसे अपने तरीके से कराते हैं और कभी-कभी विशेषज्ञ ज्योतिषियों से शुभ मुहूर्त नहीं पूछते। फिर भी, कर्णवेध मुहूर्त 2026 जानकर ही यह संस्कार करना सबसे अच्छा होता है।

कर्णवेध संस्कार निम्न समय पर किया जा सकता है:

  • जन्म के 12वें या 16वें दिन
  • जन्म के 6वें, 7वें या 8वें महीने में
  • जन्म के बाद विषम (odd) वर्ष में

आदर्श समय बच्चा 3 से 5 साल का होने पर होता है। इसके बाद कराना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन लाभ अब भी मिलता है।

कर्णवेध मुहूर्त 2027 में तिथि, नक्षत्र और समय बताए जाते हैं ताकि संस्कार शुभ और सही तरीके से हो। यह संस्कार हिंदू धर्म के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक माना जाता है और बच्चे के सुख-समृद्ध भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

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हिंदू धर्म में 16 संस्कार होते हैं, जिनका जीवन में गहरा महत्व है।

  • कर्णवेध संस्कार बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है।
  • बुजुर्गों का मानना है कि इससे कान की बीमारियाँ, बधिरता या मानसिक परेशानियाँ कम होती हैं।
  • परंपरा अनुसार यदि कर्णवेध नहीं किया गया, तो कुछ अन्य संस्कार जैसे पितृ श्राद्ध अधूरा माना जा सकता है।

इसके अलावा, यह संस्कार बच्चे की सुंदरता और गुणों को भी बढ़ाता है।

कर्णवेध संस्कार हिंदू परंपरा में 16 संस्कारों का दसवां संस्कार है। यह नामकरण, मुंडन और अन्नप्राशन के बाद किया जाता है।

  • यह संस्कार विद्यारंभ से पहले करना अच्छा माना जाता है ताकि बच्चा पढ़ाई में ध्यान लगाकर सीख सके।
  • यदि समय पर संस्कार न कर पाएँ तो इसे 3 से 5 साल तक किया जा सकता है।
  • कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार इसे जन्म के विषम वर्ष में करते हैं।
  • लड़कियों के लिए कभी-कभी कान के साथ नाक छेदन भी संस्कार में शामिल होता है।

कर्णवेध के शुभ मुहूर्त 2027

  • कर्णवेध संस्कार शुभ लग्न, दिन, तिथि, नक्षत्र और महीने में करना चाहिए।
  • ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति (गुरु) जब वृषभ, तुला, धनु या मीन लग्न में हो तो संस्कार करना शुभ होता है।
  • शुभ महीने हैं: कार्तिक, चैत्र, पौष और फाल्गुन
  • शुभ दिन हैं: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार
  • शुभ नक्षत्र हैं: मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी, पुष्य, अभिजीत, श्रवण, धनिष्ठा और पुनर्वसु

कर्णवेध संस्कार चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और ग्रहण के समय नहीं करना चाहिए।

नीचे अन्य सभी मुहूर्तों के बारे में पढ़ें:-

FAQs

कर्णवेध संस्कार क्या है और क्यों किया जाता है?

कर्णवेध संस्कार हिंदू परंपरा का एक महत्वपूर्ण संस्कार है जिसमें बच्चे के कान पहली बार छेदे जाते हैं। यह संस्कार बच्चे को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और उसकी सुंदरता व गुणों को बढ़ाने के लिए किया जाता है।

कर्णवेध के लिए आदर्श समय क्या है?

कर्णवेध संस्कार के लिए आदर्श समय तब होता है जब बच्चा 3 से 5 साल का होता है। इस उम्र में यह संस्कार करना शुभ माना जाता है।

कर्णवेध संस्कार किस समय नहीं करना चाहिए?

कर्णवेध संस्कार चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और ग्रहण के समय नहीं करना चाहिए।

कर्णवेध संस्कार के लाभ क्या हैं?

कर्णवेध संस्कार बच्चे की नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है और उसकी सुंदरता व गुणों को बढ़ाता है।

कर्णवेध संस्कार का महत्व क्या है?

कर्णवेध संस्कार हिंदू धर्म के 16 प्रमुख संस्कारों में से एक है और बच्चे के सुख-समृद्ध भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।