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खटीमा से लड़ेंगे पुष्कर सिंह धामी! ग्रह फिर दिलाएंगे कुर्सी या जाएगी सत्ता?

16 सितंबर 1975 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में जन्मे पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) की सूर्य कुंडली में आत्मकारक सूर्य (कुंडली में सबसे अधिक अंशों वाला ग्रह जो जातक के लिए सौभाग्यशाली व हर प्रकार से अच्छा माना जाता है।) अपनी ही राशि सिंह में स्थित है जो धामी को सपष्टवादी और अपने क्षेत्र में चौकस बनाता है। उनके पास एक रचनात्मक क्षमता है जो इनके व्यक्तित्व को डोमिनेन्स और गरिमा प्रदान करती है। यह दोनों ही गुण उनको लोगों को प्रभावित करने में सहायक साबित होते हैं। सूर्य के साथ शुक्र की युति के कारण उन्हें मान-सम्मान और व्यापक सफलता, उन्नति और समाजसेवी भावना मिली है।


Pushkar singh dhami कुंडली

16 सितंबर 1975 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में जन्मे पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) की सूर्य कुंडली में आत्मकारक सूर्य (कुंडली में सबसे अधिक अंशों वाला ग्रह जो जातक के लिए सौभाग्यशाली व हर प्रकार से अच्छा माना जाता है।) अपनी ही राशि सिंह में स्थित है जो धामी को सपष्टवादी और अपने क्षेत्र में चौकस बनाता है। उनके पास एक रचनात्मक क्षमता है जो इनके व्यक्तित्व को डोमिनेन्स और गरिमा प्रदान करती है। यह दोनों ही गुण उनको लोगों को प्रभावित करने में सहायक साबित होते हैं। सूर्य के साथ शुक्र की युति के कारण उन्हें मान-सम्मान और व्यापक सफलता, उन्नति और समाजसेवी भावना मिली है।


हालांकि इनकी कुंडली में जन्म के मंगल और केतु एक साथ दसवें भाव में उपस्थित है और मंगल की दृष्टि सूर्य पर है जो कई बार उन्हें अति ऊर्जावान, दूसरों पर हावी और आत्मकेंद्रित बना देता है। मंगल-केतु की युति के फलस्वरूप पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) बाहर से मजबूत दिखने पर, लेकिन अंदर से काफी संवेदनशील हैं, और इसीलिए उनकी भावनाएं आसानी से आहत हो जाती हैं। खासकर जब कोई उनके अहंकार या आत्मसम्मान को चुनौती देता है। ऐसे में कई बार उनके लिए अपनी ही पार्टी (BJP) के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बिठाना मुश्किल काम होता है।


पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) की सूर्य कुंडली में कन्या राशि में उच्च बुध उपस्थित है जिसपर बलवान बृहस्पति की दृष्टि है। बृहस्पति ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है और जब बुध बृहस्पति के साथ होता है, तो यह उस जातक की वाणी में बौद्धिकता, आकर्षण और आशावाद पैदा करता है। धामी को यही गुण उनकी राजनीती में रणनीतियां और चुनावी अजेंडा तैयार करने में मदद करते हैं। उच्च के बुध और स्वग्रही बृहस्पति के साथ मजबूत सूर्य उनकी कुंडली को शक्तिशाली बनाता है। Uttarakhand Election 2022 उनकी राजनीतिक सफलता के लिए यह ग्रहदशा बहुत मददगार सिद्ध हो सकती हैं।


वर्तमान की बात करें तो गोचर के बृहस्पति ने उन्हें पार्टी का नेतृत्व करने का मौका दिया है, लेकिन शनि की साढ़े साती का प्रभाव पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) के लिए अत्यधिक परिश्रम वाला रहेगा। 12 अप्रैल 2022 को राहु और केतु के गोचर का प्रभाव भी धामी के लिए प्रतिकूल रहेगा इसीलिए Uttarakhand Election 2022 में इनका मार्ग कठिन हो सकता है। आगामी उत्तराखंड चुनाव 2022 के दौरान ग्रहों के गोचर को देखें तो वांछित परिणाम प्राप्त करना उनके लिए एक कठिन कार्य होगा। उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर और साथ ही विपक्षी पार्टी के अपने प्रतिद्वंद्वियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। हालाँकि, अप्रैल 2022 के बाद का समय उनके लिए बेहतर होगा इसलिए वह वर्ष 2022 के दौरान वह किसी शक्तिशाली पद पर बने रहेंगे।

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उत्तराखंड में इस बार भाजपा की एक तरफ़ा जीत होना थोड़ा मुश्किल है। जिसका बहुत असर पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) पर भी पड़ेगा। दरअसल किसान बिल की वजह से किसानों के साथ-साथ कई लोग भाजपा से नाराज हैं। हालाँकि किसान बिल वापिस लेने के बाद से स्थितियां एक बार फिर भाजपा के पक्ष में जाती हुई दिखाई दे रही है। लेकिन ग्रह योग अगर अच्छे नहीं हुए तो भाजपा को उत्तराखंड चुनाव 2022 में हार का सामना करना पड़ सकता है। पुष्कर सिंह धामी (Pushkar singh dhami) ने 3 जुलाई 2021 को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री पद संभाला था। तब से अभी तक ग्रह उनके पक्ष में ही है। तय है कि Uttarakhand Election 2022 में ग्रहदशा उनको औसत से ऊपर ही फल प्रदान करेगी लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उनकी वापसी समय तय करेगा।

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