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श्राद्घ पक्ष 2023: दिवंगत परिजनों को मृत्यु की तिथि पर श्रद्धा से याद करके उनका आशीष पाएं!

हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद मृतक का श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना गया है। विधिपूर्वक श्राद्ध व तर्पण नहीं करने से मृत व्यक्ति को इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती और वह भूत बनकर इस संसार में ही रह जाता है। मान्यता है कि पितृ श्राद्ध पक्ष में किए गए दान व श्राद्ध से पितर प्रसन्न होते हैं। जातक को निरोगी, समृद्ध और खुशहाल रहने का आशीर्वाद देते हैं। सभी प्रकार के क्लेश शांत होने के साथ-साथ जीवन में सुख-शांति का स्थाई वास हो जाता है। इसीलिए, जीवन में मोक्ष प्राप्ति के लिए पितरों का तर्पण और श्राद्ध करना अति आवश्यक है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रति वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध के रुप में जाना जाता हैं। पिण्ड रूप में पितरों को दिया गया भोजन श्राद्ध का अहम हिस्सा होता है। हर साल के 15 दिन (पितृ पक्ष या श्राद्ध) की अवधि पितरों के लिए समर्पित की जाती है। यह कालावधि नवरात्रि के ठीक पहले की होती है। हर वर्ष की तरह गणेशजी इस साल भी गणेशजी चाहते हैं कि आप अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि दें। वर्ष 2017 में यह पर्व 5 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर को समाप्त होगा।


दिवंगत परिवार के सदस्यों की पुण्यतिथि पर किया गया श्राद्ध सर्वाधिक श्रेष्ठ कहा गया है। पर, अगर आपको इसकी तारीख ठीक से ज्ञात नहीं है तो आप इसे पितृ पक्ष के अंतिम दिन या फिर सर्वपितृ अमावस्या ( सर्व पितृ श्राद्ध के दिन) को भी कर सकते हैं।


29 सितंबर, 2023 को 15:26


30 सितंबर, 2023 को 12:21


1. किसी भी नए उद्यम को शुरू करना।
2. नए कपड़े या घरेलू वस्तुओं की खरीदारी।


– सुबह, शाम को अनुष्ठान नहीं करें।
– बाल कटाने और शेविंग करने से बचें।
– मांसाहारी खाना नहीं खाएं।
– भोजन तैयार करने और परोसने के लिए लोहे की चीजों का प्रयोग न करें।
– मद्यपान निषेध है।


पितृ दोष एक एेसा नकारात्मक योग कहा जाता है जो कि जातक की कुंडली में तभी बनता है जब राहु द्वितीय, चतुर्थ, पंचम और नवम भाव में विराजमान होता है। राहु की इस स्थिति के कारण, व्यक्ति अपने अंदर प्रतिभा व क्षमता होने पर भी जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता।

क्या आपकी कुंडली में पितृ दोष है? आपकी कुंडली में पितृ दोष है कि नहीं इसका पता करने के लिए हमारे ज्योतिषी से बात कीजिए सेवा रिपोर्ट द्वारा सलाह-मशवरा प्राप्त कर सकते हैं। पूर्वजों की आत्मा को शांति पहुंचाने और अपने परिवार में सुख व समृद्धि की स्थापना करने के लिए आज ही अपने घर पितृदोष यंत्र लाएं।


पौराणिक हिंदू मान्यताओं के अनुसार, हमारे पूर्वज जीवन की चुनौतियों से हमारी रक्षा करके हमे अपना आशीर्वाद देते हैं। उनका आदर और सम्मान करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। अगर इस श्राद्ध अनुष्ठान को सच्ची ईमानदारी, समर्पण, प्रेम और श्रद्धा के साथ किया जाए, तो हमारे पूर्वज प्रसन्न होकर अासुरी शक्तियों और ब्रह्मांड की नकारात्मक ऊर्जा से हमारी रक्षा करते हैं।

अपने पूर्वजों से संबंधित चीजों के प्रयोगों द्वारा आपको उनके पापों में भागेदारी प्राप्त होती है। कभी-कभी उनके द्वारा किये गए पापों से मृत्यु के बाद भी हमे छुटकारा नहीं मिलता। पौराणिक कथानुसार मृत्यु के बाद आत्मा इधर-उधर भटकती रहती है। पितृ पक्ष ही एक एेसा अवसर है जब हम दिवंगत पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करते हैं।

अप्राकृतिक मौतें जैसे कि परिजनों की अकाल मृत्यु जो किसी दुर्घटना या आत्महत्या के कारण हुई हो, आत्माओं की अशांति का एक बड़ा कारण मानी जाती है। कोई नहीं जानता यह कब घटित होगा और कौन इससे प्रभावित होगा। श्राद्ध में तर्पण अर्पित करने से अप्राकृतिक रूप से होने वाली मौतों के प्रभाव को दूर करने में मदद मिलती है। इस संस्कार की मदद से अशांत आत्माओं को असीम शांति प्राप्ति होती है।

अपनी जन्मकुंडली के अनुसार यदि आप काल सर्प दोष से प्रभावित हैं तो आपको वित्तीय या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। श्राद्ध और तर्पण की रस्में काल सर्प दोष के बुरे प्रभाव को कम करने में सहायक होती हैं। काल सर्प दोष के बुरे प्रभावों से छुटकारा पाने के लिए आज ही अपने घर में कालसर्प दोष योग निवारण यंत्र की प्रतिष्ठा करें।


– दिवंगत व्यक्ति के पसंदीदा शाकाहारी भोजन तैयार करें।
– अपने परिवार की परंपराओं के अनुसार खीर (मीठा चावल दलिया) बनाएं।
– पूर्वजों की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करें।
– विभिन्न प्रकार के फल, मिठाई, और अनाज भोजन में परोसें।
– ब्राह्मणों, गरीबों और वृद्ध लोगों को पहनने के लिए कपड़े और खाने के लिए खाद्य पदार्थ दें।
– पत्ते पर गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालकर उनको खिलाएं। कौए को पितरों का रूप माना जाता है, इसलिए श्राद्ध का प्रथम अंश कौओं को दिया जाना चाहिए।


पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने और शांतिपूर्ण जीवन यापन करने के लिए निम्न स्थानों में से किसी एक स्थान पर जाना उत्तम रहेगा-

हरिद्वार

ऋषिकेश

इलाहाबाद

वाराणसी

पुरी

रामेश्वरम


शास्त्रों में श्राद्ध पक्ष की महिमा का गुणगान करते हुए कहा गया है कि पितृ पक्ष के पर्व में जो भी अपने पितरों के लिए अपनी सामर्थ्य के अनुरूप श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं। परिवार, व्यवसाय तथा आजीविका में भी उन्नति होती है। कार्य व्यापार, शिक्षा और संतान से संबंधित रुकावटें नष्ट हो जाती हैं।


गणेशजी शांतिपूर्ण ढंग से श्राद्ध विधि के संपन्न होने की कामना करते हैं।


गणेशजी के आशीर्वाद सहित,

गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम


क्या आप अपनी कुंडली के अनुसार अपना फलकथन जानने के अभिलाषी हैं? क्या आप जानना चाहते हैं कि आपकी जन्मकुंडली में कालसर्प दोष या पितृ दोष है कि नहीं? तो फिर हमारी सेवा कोई भी सवाल पूछें रिपोर्ट द्वारा प्रश्न पूछकर विशेषज्ञ ज्योतिषियों द्वारा असरकारी समाधान प्राप्त करें!


https://www.youtube.com/watch?v=UJZsp39nziA


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