नवरात्रि के नौ रंग, जानिए गणेशजी के संग  

नवरात्रि के नौ रंग

रंगों का अपना ही एक अलग महत्व होता है। वे न सिर्फ हमारे व्यवहारिक रूप पर ही अपना असर डालते हैं बल्कि, जिंदगी के विभिन्न क्षेत्रों पर भी अपना असर छोड़ जाते हैं। हमारे पर्वो का भी रंगों से गहरा नाता होता है। अगर बात करें की तो ये पर्व माँ दुर्गा के नौ अवतारों के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। देवी का प्रत्येक रूप एक विशेष रंग को दर्शाता है। इस लेख में, हर दिन के लिए सही रंग जानें आैर उसके अनुसार ही अपनी ड्रेस प्लान करके नवरात्रि के रंग में रंग जाईए।

1) प्रतिपदा – पहला दिन:

महा के पहले दिन माँ शैलपुत्री की शक्ति को प्रतिबिंबित करने के लिए गहरे लाल रंग का चयन करें।

लाल रंग के प्रयोग का कारण :

हिमालयराज की पुत्री होने के कारण, माँ शैलपुत्री ब्रह्मा, विष्णु आैर महेश की संयुक्त शक्ति को व्यक्त करती हैं। लाल रंग माँ  शैलपुत्री के निर्भीक, शक्तिशाली आैर आकर्षक व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करता है। लाल रंग का वस्त्र पहनने से आप देवी माँ के प्रति अपने उत्साह को प्रदर्शित करते हुए इस पर्व को ऊर्जापूर्ण ढंग से प्रारंभ करने में सक्षम रहेंगे।

2) द्वितीया – दूसरा दिन:

देवी ब्रह्मचारिणी को संतुष्ट करने के लिए सफेद रंग के परिधान पहनें।

सफेद रंग के इस्तेमाल का कारण:

ब्रह्मचारिणी देवी के नाम का अर्थ है कि जो सच्चे दिल से कठोर तपस्या करें। पार्वती का ये रूप सौभाग्य आैर यश प्रदान करता है। सफेद रंग शांति, विश्वास आैर धीरता का द्योतक है। महा के दूसरे दिन ये रंग अपना ही अलग महत्व रखता है।

3) तृतीया – तीसरा दिन:

महा के तीसरे दिन, माँ चंद्रघंटा से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए चमकदार पीला धारण करना उपयुक्त रहेगा।

पीले रंग के इस्तेमाल का कारण:

पीला रंग उज्जवलता, खुशी, कीर्ति आैर संतृप्ति को दर्शता है। माँ चंद्रघंटा शांति, शुद्घता आैर साहस के लिए जानी जाती है। पीला रंग अापकी मानसिक आैर शारीरिक स्थिति को आशावादी आैर उत्साही बनाएगा।

4) चतुर्थी – चौथा दिन:

देवी कुष्मांडा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हरे रंग के परिधान धारण करें।

हरे रंग के इस्तेमाल का कारण:

माँ कुष्मांडा ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली मानी जाती हैं। वो जिंदगी का निरूपण करती हैं आैर विकास और कायाकल्प का शाश्वत संकेत देती हैं। इसके अलावा, हरा रंग जीवन में उत्कर्ष को भी निर्दिष्ट करता है।

5) पंचमी– पांचवां दिन:

स्मार्ट आैर शालीन ग्रे(स्लेटी) रंग के परिधान पहनें आैर देवी स्कंदमाता की पूजा-आराधना करें।

ग्रे(स्लेटी) रंग के इस्तेमाल का कारण:

कार्तिकेय आैर स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए ग्रे रंग के वस्त्र पहनें। ये पापियों के संहार के लिए जाने जाते हैं।

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6) महा षष्ठी – छठां दिन: 

चमकीले केसरी(आेरेंज) रंग के परिधान देवी कात्यायनी को संतुष्ट करने के लिए पहनें।

केसरी रंग के इस्तेमाल का कारण:

कात्यायन नामक महान ऋषि ने कर्इ वर्षो पहले कठिन तपस्या की आैर उन्हें माँ  दुर्गा पुत्री के रूप में प्राप्त हुर्इ, जो कात्यायनी के रूप में पहचानी गर्इ। उन्हें प्रसन्न करने के लिए आैर ऊर्जायुक्त दिखाई पड़ने के लिए केसरी रंग पहनें।

7) महा सप्तमी– सातवां दिन:

देवी कात्यायनी को खुश करने के लिए काले रंग की पोषाक पहनें।

काले रंग के इस्तेमाल का कारण:

माँ कालरात्रि देवी पार्वती का सबसे भयंकर रूप है। काला रंग पूर्णरूप से माँ के इस रूप के प्रति भावना का अनुनाद  करता है। इस दिन काला रंग पहनना इनकी शक्ति के पूरक होगा।

8) महा अष्टमी – आठवां दिन:   

माँ महागौरी को संतुष्ट करने के लिए गुलाबी रंग पहनें।

गुलाबी रंग के इस्तेमाल का कारण:

हिन्दू पौराणिक कथाआें के अनुसार, जब देवी शैलपुत्री युवावस्था में थी तो वे अत्यधिक सुंदर आैर गुलाबी रंग से रूपवान थी। गुलाबी रंग शुक्र का कारक है, एेसे में इस रंग के कपड़े पहनकर उत्सव का मजा लीजिए।

9) महा नवमी– नौंवा दिन:

नवरात्रि के अंतिम दिन देवी सिद्घिदात्री का आशीर्वाद पाने के लिए स्टाइलिश आसमानी रंग की ड्रेस पहनें।

आसमानी रंग के इस्तेमाल का कारण:

आसमानी रंग उपलब्धि, प्रतिष्ठा आैर ज्ञान का सूचक है। इस रंग को पहनकर देवी के दिव्य जादू का अनुभव करें।

गणेशजी आपको रंगीली नवरात्रि की शुभकामनाएं देते है।

गणेशजी के आर्शीवाद सहित 

गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम टीम

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28 Sep 2019

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