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महेश नवमी 2025: महेश नवमी कथा, पूजन विधि और दिनांक

महेश नवमी 2019: महेश नवमी कथा, पूजन विधि और दिनांक

महेश नवमी को शिव पूजन से पूरी होती है सारी मनोकामनाएं

भगवान शंकर का एक नाम महेश भी है। ऐसे में महेश नवमी का पर्व भी उन्हें ही समर्पित है। इस दिन भगवान शिव और जगतजननी माता पार्वती की आराधना की जाती है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व माहेश्वरी समाज के लोगों का प्रमुख त्योहार है। इस साल महेश नवमी बुधवार, जून 4, 2025 को मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है की भगवान शिव के वरदान से इसी दिन माहेश्वरी समाज की उत्पति हुई थी। इस उत्सव की तैयारी 2-3 दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। इस दिन धार्मिक एवम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

क्या है महेश नवमी की पौराणिक कथा

महेश नवमी से जुड़ी एक पौराणिक कथा के मुताबिक प्राचीन समय में खडगलसेन नामक एक राजा राज करते थे। प्रजा सेवा और धर्म-कर्म के कार्यों में उनकी काफी रुचि थी, लेकिन कोई संतान न होने के कारण वे काफी दुखी थे। पुत्र प्राप्ति की इच्छा से राजा ने कामेष्टि यज्ञ करवाया और ऋषियों ने राजा को वीर और पराक्रमी पुत्र होने का आशीर्वाद दिया साथ ही बीस वर्ष तक उसे उत्तर दिशा में जाने से रोकना को कहा। ईश्वर की कृपा से राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम सुजान कंवर रखा। वह वीर, तेजस्वी और शस्त्र विद्या में निपुण था। इस बीच एक दिन राजकुमार शिकार खेलने वन में गये और अचानक उत्तर दिशा की और जाने लगे। सहयोगियों द्वारा मना करने पर भी वे नहीं माने। उत्तर दिशा में सूर्य कुंड के पास कुछ ऋषि यज्ञ कर रहे थे। राजकुमार ने सोचा कि उन्हें अंधरे में रखकर ही उत्तर दिशा में नहीं आने दिया गया और क्रोधित होकर उन्होंने यज्ञ में विघ्न उत्पन्न करवा दिया। यज्ञ रुकने से नाराज ऋषियों ने क्रोधित होकर श्राप दिया और वे सभी पत्थर बन गये। इसकी जानकारी मिलते ही शोक में राजा की मृत्यु हो गई और उनकी रानियां सती हो गयीं। इसके बाद राजकुमार सुजान की पत्नी चन्द्रावती सहयोगियों की पत्नियों के साथ ऋषियों के पास गई और क्षमा याचना करने लगी। इसपर ऋषियों ने उन्हें भगवान भोले नाथ व मां पार्वती की आराधना करने को कहा। इसके बाद सभी ने सच्चे मन से भगवान महेश व मां पार्वती की आराधना की और उनके आशीर्वाद से राजकुमार सहित उनके सहयोगियों को जीवनदान मिला। भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोडकर वैश्य धर्म को अपनाया।

महेश नवमी पूजन विधि

– महेश नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद भगवान शिव की प्रतिमा के समीप पूर्व या उत्तर में मुख करके बैठ जाएं।
– हाथ में जल, फल, फूल और चावल लेकर इस मंत्र – मम् शिवप्रसाद प्राप्ति कामनया महेश नवमी निमित्तं शिवपूजनम् करिष्ये – से संकल्प करें।
– संकल्प के बाद माथे पर भस्म का तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें।- गंध, पुष्प और बिल्वपत्र आदि से भगवान शिव-पार्वती का पूजन करें।
– भगवान शंकर की मूर्ति न होने की स्थिति में महेश्वराय नम: का स्मरण करते हुए भीगी हुई चिकनी मिट्टी से हाथ के अंगूठे के आकार की मूर्ति बनाएं।
– इसके बाद शूलपाणये नम: से मूर्ति की प्रतिष्ठा और पिनाकपाणये नम: से भगवान का आह्वान करें।
– तदोपरांत शिवाय नम: से स्नान कराने के बाद पशुपतये नम: से गंध, पुष्प, धूप, दीप के बाद भोग अर्पित करें।
– इसके बाद भगवान शिव से प्रार्थना करेंजय नाथ कृपासिंधोजय भक्तार्तिभंजन।जय दुस्तरसंसार-सागरोत्तारणप्रभो॥प्रसीदमें महाभाग संसारात्र्तस्यखिद्यत:।सर्वपापक्षयंकृत्वारक्ष मां परमेश्वर॥
– पूजन के बाद उद्यापन कर शिव मूर्ति का विसर्जन कर देनी चाहिए।
– महेश नवमी के दिन इस तरह भगवान शिव का पूजन करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है।

महेश नवमी 2025

बुधवार, जून 4, 2025

नवमी तिथि प्रारम्भ – जून 03, 2025 को 09:56 पी एम बजे
नवमी तिथि समाप्त – जून 04, 2025 को 11:54 पी एम बजे

गणेशजी के आशीर्वाद सहित
आपका मार्गदर्शक
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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