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Pitru Paksha 2021 – श्राद्ध पक्ष का महत्व,जानिए कैसे करें श्राद्ध और कैसे मिलेगी पितृ ऋण से मुक्ति

Pitru Paksha 2021 – श्राद्ध पक्ष का महत्व,जानिए कैसे करें श्राद्ध और कैसे मिलेगी पितृ ऋण से मुक्ति

सनातन धर्म ग्रंथों में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति की बड़ी ही सुंदर और वैज्ञानिक विवेचना देखने को मिलती है। भारतीय धर्म ग्रंथों के अनुसार जन्म लेने वाले हर मनुष्य पर तीन तरह के ऋण माने गये है, जिनमे पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण शामिल हैं। इन ऋणों में पितृ ऋण को सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना गया है। सनातन धर्म में उन सभी को पितृ माना गया है, जिन्होंने आपके जन्म के बाद आपके पालन पोषण में कोई भूमिका निभाई हो। पितृ ऋण में माता पिता के साथ वे सभी बड़े बुजुर्ग शामिल होते हैं, जिन्होंने आपको अपना जीवन धारण करने तथा उसे विकासित करने में सहयोग दिया। मान्यताओं के अनुसार देवता या भगवानों का आशीर्वाद प्राप्त करने से पहले आपको पितृ ऋण से मुक्त होना चाहिए। पितृ ऋण के महत्व के कारण हर साल के पंद्रह दिन पितृ ऋण उतारने और उनकी सेवा करने के लिए आरक्षित किए गये है। इन दिनों में पितरों का उचित विधि से किया गया श्राद्ध उन्हे पितृ लोक में संतुष्टि देता है और आपको जीवन की अनेक परेशानियों से मुक्ति मिलती है। इस साल पितृपक्ष 1 सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर तक जारी रहेगा।

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पितृ पक्ष क्या है?

हिंदू धर्म कैलेंडर के अनुसार आश्विन माह की कृष्ण प्रतिपदा से सर्वपितृ अमावस्या तक पितृ अपने लोक को छोड़कर पृथ्वी लोक में विचरण करते हैं। इन पंद्रह दिनों की अवधि को पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष के नाम से जाना जाता है। इन दिनों में किसी भी तरह के धार्मिक व मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। लोग अपने पितरों को याद करने के लिए उनके देहवासन की तिथि के अनुसार इन श्राद्ध पक्षों में आने वाली तिथि को उनका श्राद्ध करते हैं। इससे हमारे पूर्वजों को संतुष्टि मिलती है, जिससे आपको जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति और प्रेरणा मिलती है। इस साल पितृपक्ष 20 सितंबर 2021 से शुरू होगा।

पितृ पक्ष का महत्व

धार्मिक धर्म ग्रंथों की मानें तो पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष सालभर में आने वाले अन्य सभी कृष्ण या शुक्ल पक्ष से महत्वपूर्ण है। हालांकि श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्य की अनुमति नही होती है, लेकिन इस दौरान अपने पितृ और बुजुर्गों के नाम पर किया गया दान पुण्य आपको पितृ ऋण से मुक्ति दिला सकता है। इसी के साथ इस दौरान पितृ दोष की पीड़ा झेल रहे जातकों को अपने पितरों के श्राद्ध और तर्पण करने चाहिए। इस के अतिरिक्त पितृ पक्षों के दौरान विभिन्न तरह की समस्याओं के हल के लिए कई अलग अलग तरह के उपायों का उल्लेख ज्योतिष के समाधानों में मिलता है।

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पितृ पक्ष में क्या करें

पितृ पक्ष के दौरान दिवंगत व्यक्ति की तिथि का निर्धारण करें, और उस दिन सुबह से घर की साफ सफाई कर घर को दिव्य आत्माओं के आतिथ्य के लिए तैयार करें। अपने घर के दरवाजों पर पीले फूल या गिल्की के फूल लगाएं। दिवांगत आत्मा की पसंद का भोजन तैयार करें, पितरों का भोजन बनाते समय उसमें प्याज या लहसून का इस्तेमाल न करें, भोजन के साथ खीर, हलवा या कोई मीठा पकवान भी बनाएं। धर्म गुरूओं के अनुसार पितरों को श्राद्ध देने का सबसे उचित समय दोपहर में 12 बजे से 2 बजे के बीच का होता है। इस दौरान अपनी परंपराओं के अनुसार अपने पितरों को याद करें और अंगारे पर उनके लिए बनाये गए भोजन का भोग लगाएं। पितरों को भोग लगाते समय जातक को सदैव विषम संख्या में होम छोड़ना चाहिए। इसके बाद ब्राह्मणों, गरीबों और वृद्ध लोगों को रूचिकर भोजन करवाएं और दान पुण्य करें।

पितृपक्ष में श्राद्ध करने से क्या होगा

पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से आपको पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है, उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली चुनौतियों से लड़ने की क्षमता मिलती है। यदि पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध अनुष्ठान सच्ची ईमानदारी, समर्पण और श्रद्धा के साथ किया जाए तो पूर्वज प्रसन्न होकर हमारे जीवन की मुश्किलें और परेशानियां को समाप्त कर सकतेे हैं। श्राद्ध से व्यक्ति अपने प्रिय लोगों की आत्मा को शांति पहुंचा सकते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध करने से जातकों को अप्राकृतिक या असामयिक मौत के डर से छुटकारा मिलता है। इसी के साथ काल सर्प दोष और पितृ दोष के प्रतिकूल प्रभावों को पितृ पक्ष के दौरान भक्ति भाव से श्राद्ध कर्म करके कम किया जा सकता है।

पितृपक्ष 2021 की तिथि

इस वर्ष पितृपक्ष 20 सितंबर 2020 से शुरू होकर 06 अक्टबूर 2021 तक जारी रहने वाला है।

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