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क्या होगी भारत की डे-नाइट टेस्ट में भूमिका – ज्योतिषी विवेचना

भारत-बांग्लादेश के बीच बहुप्रतिक्षित डे-नाइट टेस्ट क्रिकेट शुक्रवार 22 नवंबर 2019 को भारतीय क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ईडन गार्डन्स में खेला गया। आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में पहले पायदान पर अपना कब्ज़ा जमाए बैठी भारत की क्रिकेट टीम ने इस ऐतिहासिक मैच को 1 पारी और 46 रन से अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक मैच का गवाह बनने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की तरफ से पूर्व सफल कप्तान और मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने कई महान क्रिकेटर, राजनेताओं और राजनायिकों को आमंत्रण दिया था। भारत-बांग्लादेश के बीच 22 से 26 नवंबर तक खेले गए इस पहले डे-नाइट टेस्ट पर पूरे वर्ल्ड क्रिकेट की निगाहें टिकी हुई थी। लाल की जगह पिंक गेंद से खेले जाने वाले इस खेल को लेकर कोलकाता ही नहीं वरना देश-विदेश के क्रिकेट प्रशंसकों में भी उत्साह देखने को मिला। देशी-विदेशी प्रसंशकों की बड़ी-बड़ी टौलियां इस मैच का लुत्फ़ उठाने के लिए 2 दिन पहले से ही कोलकाता की सड़कों पर नजर आने लगी थी। लेकिन डे नाइट टेस्ट मैच में ऐसा क्या खास है जो हर कोई इसे लेकर इतना उत्साहित रहा। क्रिकेट के इस प्रारूप को लेकर प्रशंसकों का यह उत्साह ज़िम्मेदारी बढ़ाने के साथ ही कई सवाल भी खड़े करता है जैसे आने वाले समय में क्रिकेट के इस प्रारूम में भारत का भविष्य कैसा रहेगा? और सबसे अहम इस ऐतिहासिक आईसीसी टेस्ट चैंपियनशिप में भारत का क्या स्थान रहेगा ? इन सभी सवालों के जवाब हमने सदियों पुराने भारतीय वैदिक ज्योतिष के माध्यम से खोजने की कोशिश की आईये जानते है कैसा रहेगा डे-नाइट टेस्ट क्रिकेट का भविष्य? अगर आपको अपना भविष्य जानना है, तो अभी हमारे ज्योतिषियों से बात करें!

डे-नाइट टेस्ट का इतिहास, भारत की भूमिका

वैसे तो डे-नाइट टेस्ट का इतिहास अधिक लंबा नहीं, आईसीसी पुरूष क्रिकेट टीम के बीच पहला डे-नाइट टेस्ट मैच 27 नवंबर 2015 को एजबेस्टन में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। वैसे तो दुनिया का पहला आधिकारिक डे-नाइट टेस्ट मैच आज से 10 साल पहले 2009 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की महिला क्रिकेट टीम के बीच खेला गया था। लेकिन पुरूष क्रिकेट टीमों को इस पिंक बाॅल क्रिकेट को अपनाने में 6 से अधिक वर्ष लग गए। फिलहाल अभी तक 11 डे-नाइट टेस्ट खेले जा चुके हैं, जिनसे लगभग सभी दिग्गज टेस्ट टीमों के नाम जुड़े हैं। भारत-बांग्लादेश के लिए यह पहला मौका था जब उन्होंने अपने बल्ले से गुलाबी गेंद का सामना किया। भारत-बांग्लादेश के बीच होने वाला यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय प्रशंसकों के लिए क्रिकेट भावना से जुड़ा मुद्दा है। वे किसी भी परिस्थिति में खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन टेस्ट मैच में पांच दिन का खेल, नौकरी पेशा और व्यापारी वर्ग दोनों प्रशंसकों को खेल से दूर कर रही थी। डे-नाइट फाॅर्मेट अपने टेस्ट प्रशंसकों को फिर अपने पसंदीदा खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए मैदान में पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इस क्रम में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत में टेस्ट मैच के प्रशंसकों के बढ़ने से विश्व क्रिकेट में प्रशंसकों की संख्या के लिहाज से पिछड़े टेस्ट प्रारूप को जीवन दान मिलने की भी संभावना दिखती है। इस बात के प्रमाण डे-नाइट टेस्ट की कुंडली में भी दिखाई देते है। यदि हम डे-नाइट टेस्ट की कुंडली की गहन ज्योतिष विवेचना करें, तो पता चलता है कि डे-नाइट टेस्ट के लग्न में वायु तत्व की राशि कुंभ है। लग्न में एक निश्चित और स्पष्ट राशि का होना वैदिक ज्योतिष में शुभ माना गया है।

डे-नाइट टेस्ट क्रिकेट की कुंडली

डे-नाइट टेस्ट का भविष्य, क्या होगी भारत की भूमिका – ज्योतिषी विवेचना
डे-नाईट टेस्ट क्रिकेट की ये कुंडली तब की है, जब पहला डे-नाईट टेस्ट मैच खेला गया था।

ज्याेतिष के अनुसार डे-नाइट टेस्ट का भविष्य

कुंडली में कुंभ लग्न को स्थिर और फलदायी माना जाता है। कुंभ में लोगों को आकर्षित करने की क्षमता होती है। कुंभ राशि लग्न को बेहद अलग और विशेष माना जाता है, यह राशि किसी आम या निश्चित पैटर्न पर काम नहीं करती। डे-नाइट टेस्ट के लग्न में कुंभ राशि का होना इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आने वाले समय में यह प्रारूप अपने चरम पर पहुँचेगा और टेस्ट क्रिकेट को वापस अपने सुनहरे दौर में ले जाने का काम करेगा। लेकिन कुंभ राशि के स्वामी शनि जो कि राशि से अस्त हो चुके है, इसलिए वह अकेले सकारात्मक परिणाम देने में सक्षम नहीं है। साथ ही यह इस बात का भी सूचक है कि अंतिम लक्ष्य हासिल करने से पहले कई बाधाओं का सामना करना होगा। इसी के साथ इस बात को जोड़ना भी उचित रहेगा कि डे-नाइट टेस्ट की कुंडली के 10वें भाव का स्वामी मंगल 8वें भाव में राहु के साथ बैठा है इस योग के कारण डे-नाइट टेस्ट प्रारूप के सामने कई मुश्किलें आएँगी जो उसके विकास में बाधा पहुंचाएंगी और इसके प्रचलन की गति को धीमा करेगी साथ ही कई अन्य कठिनाईयां भी पैदा होगी। लेकिन 10वें भाव का स्वामी मंगल शुक्र के साथ मौजूद है इसलिए यह लोगों का मनोरंजन करने में सक्षम रहेगा और लोगों को खेल के प्रति और उत्साहित करेगा। इसी के साथ यह प्रारूप लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने का काम करेगा जिससे आर्थिक लाभ होने की भी प्रबल संभावना है।

कुंडली के 8वें भाव में मंगल-राहु का मेल सिर्फ मुश्किलें ही नहीं बल्कि कुछ सकारात्मक संकेत भी देता है जैसे इनका योग तकनीकी रूप से सक्षम और आधुनिक तकनीकों का अच्छा उपयोग करने के साथ नवीन विचारों से उत्थान का भी प्रतीक है। इसी के साथ सूर्य शनि के साथ 10वें भाव में मौजूद है जो डे-नाइट टेस्ट प्रारूप के सामने ऐसी परिस्थिति निर्मित करेगा जिससे कुछ देश इस प्रारूप को अस्वीकार करेंगे या इसके विरोध में नजर आएँगे। हालांकि 10वें भाव के स्वामी का 8वें भाव के स्वामी की राशि में और 8वें भाव के स्वामी का 10वें भाव के स्वामी के स्थान पर बैठना इस प्रारूप के लिए अन इच्छुक देशों को इसे नियमित रूप से खेलने के लिए प्रोत्साहित करेगा। हांलाकि अंत में इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि डे-नाइट टेस्ट लाल गेंद टेस्ट की तुलना में कभी पूरी तरह आगे नहीं निकल पाएगा। लेकिन समय के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट प्रारूप में अपना एक उचित स्थान ज़रूर हासिल कर लेगा।

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गणेशजी के आशीर्वाद सहित
आपका मार्गदर्शक
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

28 Nov 2019

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