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प्रदोष व्रत 2026 – प्रदोष व्रत कथा, विधि, तिथि एवं लाभ

प्रदोष व्रत 2024 – प्रदोष व्रत कथा, विधि, तिथि एवं लाभ

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा होती है अति फलदायी

अक्सर लोग पूछते हैं और यह जानना चाहते हैं कि प्रदोष व्रत कब है, तो हम आपको बता देते हैं कि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि यानी प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के तेरहवें दिन रखा जाता है। इस दिन भगवान शंकर की पूजा की जाती है। चूंकि यह समय दिन और रात के मिलन का वक्त होता है, ऐसे में यह काफी उत्तम माना जाता है। प्रदोष व्रत का अत्यंत धार्मिक महत्व है और इस दौरान भगवान शंकर की पूजा काफी फलदायी होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि प्रदोष काल में व्रत एवं पूजा से इच्छापूर्ति भी होती है।

प्रदोष व्रत कथा

स्कंद पुराण के अनुसार एक गांव में एक विधवा ब्राह्मणी अपने बच्चे के साथ रहकर भिक्षा से गुजारा करती थी। एक दिन उसे भिक्षा लेकर लौटते समय नदी किनारे एक बालक मिला। वह विदर्भ देश का राजुकमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं ने उसके पिता का राज्य हड़प लिया था और पिता की हत्या कर दी थी। उसकी माता की मृत्यु हो चुकी थी। ब्राह्मण महिला ने उसे अपना लिया। एक दिन ऋषि शांडिल्य ने उस ब्राह्मण महिला को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। प्रदोष व्रत के फलस्वरूप राजकुमार धर्मगुप्त का विवाह गंधर्व राज की कन्या से हुआ। जिनकी बदौलत उसने अपना खोया राज्य प्राप्त कर लिया।

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दिन के हिसाब से प्रदोष व्रत कथा पाठ से मिलता है शुभ फल

जिस तरह प्रत्येक माह की एकादशी को पुण्य फलदायी माना जाता है, ठीक उसी तरह प्रत्येक कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी व्रत उपवास के लिये अत्यंत शुभ होती है। एकादशी में जहां भगवान विष्णु की पूजा की जाती है वहीं त्रयोदशी या प्रदोष व्रत में भोलेनाथ की आराधना की जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत का पालन करने से सभी प्रकार के दोषों का निवारण होता है और संतान की प्राप्ति होती है। वैसे तो प्रदोष व्रत का काफी महत्व होता है, लेकिन अगर दिन के हिसाब से प्रदोष व्रत और पूजा की जाए तो शुभ फलों में वृद्धि हो जाती है। इसके मुताबिक सप्ताह के दिन के हिसाब से यानी जिस दिन व्रत की तिथि हो, उस दिन के हिसाब से ही प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना चाहिए, क्योंकि दिन के हिसाब से व्रत कथाएं भी अलग-अलग हैं। प्रदोष व्रत के लिए दिन का काफी महत्व होता है और उसके मुताबिक व्रत से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

प्रदोष व्रत की विधि

शनि प्रदोष व्रत के दिन व्रती को सुबह जल्द उठकर नित्य क्रम आदि से निवृत हो स्नान कर शंकर भगवान का पूजन करना चाहिये। पूरे दिन निराहारी रहकर मन ही मन “ऊँ नम: शिवाय” का जप करना चाहिए। त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त से तीन घड़ी पूर्व, शिवजी का पूजन (शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम 05:45 बजे से लेकर शाम 08:09 बजे के बीच की जाती है) करना चाहिए। शाम को दुबारा स्नान कर स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण कर घर के पूजन स्थल की शुद्धीकरण कर पूजा करें। शिव मंदिर में भी पूजा की जा सकती है।

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प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए

वैसे तो प्रदोष व्रत पूरे दिन निराहार रहकर किया जाता है। इसके बावजूद आप सुबह दैनिक क्रियाओं से निपट कर दूध पी सकते हैं। इसके बाद दिन भर कुछ भी खाने-पीने से परहेज करें। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के बाद फल खा सकते हैं, लेकिन नमक से परहेज करना है।

प्रदोष व्रत खोलने के नियम

प्रदोष व्रत का उद्यापन यानी त्रयोदशी तिथि पर ही व्रत को खोलना चाहिए। हालांकि इसका उद्यापन 11 या 26 त्रयोदशी व्रत के बाद ही करना चाहिए। व्रत खोलने से एक दिन पूर्व विघ्नहर्ता श्री गणेश का पूजन किया जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पूजा की सारी तैयारी के बाद ‘ॐ उमा शिवाय नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करते हुए हवन करना चाहिए। इस दौरान किसी भी तरह का भोजन नहीं करना चाहिए, क्योंकि व्रत निर्जल रहकर किया जाता है।

शनि प्रदोष का महत्व

वैसे तो हर माह की त्रयोदशी के व्रत पुण्य फलदायी माने जाते हैं, लेकिन शनिदेव को भगवान शिव का भक्त माना जाता है, इसलिए शनिवार के दिन त्रयोदशी का व्रत समस्त दोषों से मुक्ति देने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भोलेनाथ की कृपा से नि:संतानों को भी संतान सुख की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है एवं मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत में लोहा, तिल, काली उड़द, शकरकंद, मूली, कंबल, जूता और कोयला आदि वस्तुओं का दान करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।

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प्रदोष व्रत सामग्री

– धूप, दीप, घी, सफेद पुष्प, सफेद मिठाइयां, सफेद चंदन, सफेद वस्त्र, जनेउ, जल से भरा हुआ कलश, कपूर, बेल-पत्र, अक्षत, गुलाल, मदार के फूल, धतुरा, भांग, हवन सामग्री आदि, आम की लकड़ी

प्रदोष व्रत के लाभ

– रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष या भानु वारा प्रदोष कहते हैं। इस दिन व्रत रखने से अच्छी सेहत के साथ लम्बी उम्र का वरदान मिलता है।- सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष कहा जाता है। इस दिन व्रत से सकारात्मक विचारों की प्राप्ति होती है और सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।- मंगलवार के दिन भौम प्रदोष होता है। इस दिन व्रत रखने से स्वास्थ्य बेहतर होता है, बीमारियों से राहत मिलती है और जीवन में समृद्धि आती है।- बुधवार के दिन बुध या सौम्य वारा प्रदोष होता है। इस दिन व्रत से सभी मनोकामनाएं एवं इच्छाएं पूर्ण होती हैं।- गुरुवार को गुरु प्रदोष होता है। इस दिन व्रत करने से दुश्मनों पर विजय प्राप्त होती है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।- शुक्रवार को शुक्र या भृगु वारा प्रदोष होता है। इस दिन व्रत करने से जीवन की नकारात्मकताएं खत्म होती हैं और वैवाहिक जीवन आनंदमय होता है।- शनिवार को शनि प्रदोष होता है, जो काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से संतान प्राप्ति के साथ ही जीवन में सफलता मिलती है।

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प्रदोष व्रत तिथि / कैलेंडर 2026

तिथिप्रदोष व्रत का प्रकारमास व तिथिप्रदोष कालतिथि प्रारंभतिथि समाप्त
1 जनवरी, गुरुवारगुरु प्रदोष व्रतपौष, शुक्ल त्रयोदशी05:45 PM – 08:09 PM01:47 AM, 1 जनवरी10:22 PM, 1 जनवरी
16 जनवरी, शुक्रवारशुक्र प्रदोष व्रतमाघ, कृष्ण त्रयोदशी05:57 PM – 08:19 PM08:16 PM, 15 जनवरी10:21 PM, 16 जनवरी
30 जनवरी, शुक्रवारशुक्र प्रदोष व्रतमाघ, शुक्ल त्रयोदशी06:09 PM – 08:27 PM11:09 AM, 30 जनवरी08:25 AM, 31 जनवरी
14 फरवरी, शनिवारशनि प्रदोष व्रतफाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी06:20 PM – 08:34 PM04:01 PM, 14 फरवरी05:04 PM, 15 फरवरी
1 मार्च, रविवाररवि प्रदोष व्रतफाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी06:31 PM – 06:59 PM08:43 PM, 28 फरवरी07:09 PM, 1 मार्च
16 मार्च, सोमवारसोम प्रदोष व्रतचैत्र, कृष्ण त्रयोदशी06:40 PM – 08:44 PM09:40 AM, 16 मार्च09:23 AM, 17 मार्च
30 मार्च, सोमवारसोम प्रदोष व्रतचैत्र, शुक्ल त्रयोदशी06:48 PM – 08:47 PM07:09 AM, 30 मार्च06:55 AM, 31 मार्च
15 अप्रैल, बुधवारबुध प्रदोष व्रतवैशाख, कृष्ण त्रयोदशी06:57 PM – 08:50 PM12:12 AM, 15 अप्रैल10:31 PM, 15 अप्रैल
28 अप्रैल, मंगलवारभौम प्रदोष व्रतवैशाख, शुक्ल त्रयोदशी07:04 PM – 08:54 PM06:51 PM, 28 अप्रैल07:51 PM, 29 अप्रैल
14 मई, गुरुवारगुरु प्रदोष व्रतज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी07:14 PM – 08:59 PM11:20 AM, 14 मई08:31 AM, 15 मई
28 मई, गुरुवारगुरु प्रदोष व्रतज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी07:22 PM – 09:05 PM07:56 AM, 28 मई09:50 AM, 29 मई
12 जून, शुक्रवारशुक्र प्रदोष व्रतज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी07:46 PM – 09:10 PM07:36 PM, 12 जून04:07 PM, 13 जून
27 जून, शनिवारशनि प्रदोष व्रतज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी07:33 PM – 09:13 PM10:22 PM, 26 जून12:43 AM, 28 जून
12 जुलाई, रविवाररवि प्रदोष व्रतआषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी07:32 PM – 09:14 PM02:04 AM, 12 जुलाई10:29 PM, 12 जुलाई
26 जुलाई, रविवाररवि प्रदोष व्रतआषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी07:26 PM – 09:11 PM01:57 PM, 26 जुलाई04:14 PM, 27 जुलाई
10 अगस्त, सोमवारसोम प्रदोष व्रतश्रावण, कृष्ण त्रयोदशी07:15 PM – 09:04 PM08:00 AM, 10 अगस्त04:54 AM, 11 अगस्त
25 अगस्त, मंगलवारभौम प्रदोष व्रतश्रावण, शुक्ल त्रयोदशी07:01 PM – 08:54 PM06:20 AM, 25 अगस्त07:59 AM, 26 अगस्त
8 सितंबर, मंगलवारभौम प्रदोष व्रतभाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी06:45 PM – 08:42 PM02:42 PM, 8 सितंबर12:30 PM, 9 सितंबर
24 सितंबर, गुरुवारगुरु प्रदोष व्रतभाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी06:26 PM – 08:29 PM10:50 PM, 23 सितंबर11:18 PM, 24 सितंबर
8 अक्टूबर, गुरुवारगुरु प्रदोष व्रतआश्विन, कृष्ण त्रयोदशी06:09 PM – 08:17 PM11:16 PM, 7 अक्टूबर10:15 PM, 8 अक्टूबर
23 अक्टूबर, शुक्रवारशुक्र प्रदोष व्रतआश्विन, शुक्ल त्रयोदशी05:54 PM – 08:06 PM02:35 PM, 23 अक्टूबर01:36 PM, 24 अक्टूबर
6 नवंबर, शुक्रवारशुक्र प्रदोष व्रतकार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी05:43 PM – 07:59 PM10:30 AM, 6 नवंबर10:47 AM, 7 नवंबर
22 नवंबर, रविवाररवि प्रदोष व्रतकार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी05:35 PM – 07:56 PM04:56 AM, 22 नवंबर02:36 AM, 23 नवंबर
6 दिसंबर, रविवाररवि प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी05:34 PM – 07:57 PM12:51 AM, 6 दिसंबर02:22 AM, 7 दिसंबर
21 दिसंबर, सोमवारसोम प्रदोष व्रतमार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी05:46 PM – 08:03 PM05:36 PM, 21 दिसंबर02:23 PM, 22 दिसंबर

प्रदोष व्रत की तिथि का खास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यह सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है। जिस दिन सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी तिथि प्रबल होती है, उसी दिन प्रदोष का व्रत किया जाता है। यही कारण है कि कभी-कभी प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि के एक दिन पूर्व यानी द्वादशी तिथि को ही पड़ जाता है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित
आपका मार्गदर्शक
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A Chemist and Jyotish Parasharam from London, he is a global grandmaster. Author of 19 stock market books, with a massive legacy of analyzing 275,000+ horoscopes and 2,500+ media shows, he is the ultimate, most trusted solver for Vastu, Tarot, Numerology, Pranic Healing, Tantra-Mantra, and Yantra-Gem-Rudraksha therapies.

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