पितृ पक्ष क्या है ?हिंदू धर्म और धर्म ग्रंथ केवल जीवन तक सीमित नहीं उनमें मृत्यु के बाद के जीवन का भी बखूबी विवरण मिलता है। मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के बाद भी मनुष्य का सूक्ष्म रूप पितृ लोक में मौजूद रहता है। विक्रम संवत् के अनुसार साल के मध्य में पड़ने वाले अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक, सूक्ष्म रूप में रहने वाले हमारे पितृ या पूर्वजांे की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा, दान-पुण्य किया जाता है। इन दिनों में पितरों के श्राद्ध की परंपरा होती है। गणेश उत्सव के बाद अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक मानाये जाने वाले पंद्रह दिनी महापर्व को हम पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष के रूप में जानते है।
पितृ पक्ष 2026 की सही तारीख इस प्रकार हैं:
| विवरण | तिथि |
|---|---|
| पितृ पक्ष 2026 प्रारंभ तिथि | शनिवार, 26 सितंबर 2026 (पूर्णिमा श्राद्ध) |
| पितृ पक्ष 2026 समाप्ति तिथि | शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 (सर्व पितृ अमावस्या) |
| अन्य नाम | श्राद्ध पक्ष, महालया पक्ष, कनागत, जितिया, अपर पक्ष |
| चंद्र मास | भाद्रपद कृष्ण पक्ष (पूर्णिमांत) / आश्विन कृष्ण पक्ष (अमांत) |
| कुतुप मुहूर्त (सर्व पितृ अमावस्या पर) | सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक |
| रौहिण मुहूर्त | दोपहर 12:31 से 01:18 बजे तक |
| अपराह्न काल | दोपहर 01:18 से 03:37 बजे तक |
पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष का महत्व और विधि
भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म ग्रंथों में माता-पिता की सेवा को ही सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। धर्मानुसार पितृपक्ष वह पवित्र समय है, जब उन पुर्वजों को याद किया जाता है जिनके कारण हमारा अस्तित्व है। पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष के दौरान आने वाली उस तिथि को उनका श्राद्ध करना चाहिए, जिस दिन उनका देहावसान हुआ था। जिन्हे अपने पितरों के देहावसान की तिथि का ज्ञान नहीं वे लोग अमावस्या के दिन आहुति प्रदान कर सकते है।
श्राद्ध का सीधा संबंध श्रद्धा से है, श्राद्ध अर्थात अपने पितरों को श्रद्धापूर्वक उनके प्रिय व्यंजन और भोग्य वस्तुओं की आहुति देना। आहुति से निकली धूम्र पितरों के प्रति आपकी निष्ठा, सेवा भाव और समर्पण दर्शाती है। इस प्रक्रिया का पालन करते हुए हमें गाय, कुत्ते और कौआ को पितरों के लिए बना भोजन अर्पित करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार गाय, कुत्ते और कौआ परलोक के साथ संपर्क साधने में सक्षम है साथ ही इन्हे पितरों का दूत भी माना जाता है। पितरों के नाम से गरीबों और बेसहारा लोगों को भोजन कराने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। पितरों के प्रसन्न होने से आपके जीवन में सफलता और खुशहाली आती है।
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पितृपक्ष 2026 से जुड़ी हर जानकारी
2026 श्राद्धपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलने वाले है। मान्यताओं के अनुसार श्राद्धपक्ष में पितृ अपना लोक त्यागकर हमारे साथ रहने आते है इसलिए इस दौरान किसी प्रकार के तामसिक भोजन अर्थात मांस, मटन, मछली का सेवन ना करें। इन दिनों धुम्रपान, मदिरापान और अन्य बुरी आदतों का त्याग करना चाहिए। इन दिनों में श्रीमद् भगवत गीता या भागवत का पाठ करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
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गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम
FAQs
पितृपक्ष क्या है?
पितृपक्ष हिंदू धर्म में एक पवित्र समय है जब पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजा और दान-पुण्य किया जाता है। इसे अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक मनाया जाता है।
श्राद्धपक्ष 2026 की तिथियाँ क्या हैं?
श्राद्धपक्ष 2026 में 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा।
श्राद्ध कैसे किया जाता है?
श्राद्ध में पितरों को श्रद्धापूर्वक उनके प्रिय व्यंजन और भोग्य वस्तुओं की आहुति दी जाती है। गाय, कुत्ते और कौआ को भोजन अर्पित करना चाहिए।
पितृपक्ष के दौरान क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
पितृपक्ष के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मटन, मछली का सेवन नहीं करना चाहिए। धूम्रपान, मदिरापान और अन्य बुरी आदतों का त्याग करना चाहिए।
पितृपक्ष में किस दिन श्राद्ध करना चाहिए?
पितृपक्ष में उस तिथि को श्राद्ध करना चाहिए जिस दिन आपके पितरों का देहावसान हुआ था। यदि तिथि ज्ञात नहीं है, तो अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है।
