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क्या है शापित या श्रापित दोष के प्रभाव और इसके आसान घरेलू उपाय?

श्रापित योग को शापित दोष भी कहा जाता है। श्रापित शब्द का शाब्दिक अर्थ है शापित व्यक्ति। कहा जाता है कि जब कुंडली के एक ही घर में शनि और राहु एक साथ होते हैं तो शापित या श्रापित दोष बनता है। कुछ ज्योतिषियों का मत है कि राहु पर शनि की दृष्टि से भी शापित या श्रापित दोष निर्मित होता है। यह माना जाता है कि संयोजन पिछले जन्मों के बुरे कर्मों या कार्यों का परिणाम होता है। इसके अलावा, ज्योतिषियों का यह भी कहना है कि यदि किसी विशेष कुंडली में शापित या श्रापित दोष मौजूद है, तो यह उसी कुंडली में मौजूद अच्छे योगों के प्रभाव को समाप्त कर देता है।

शनि की राशि

शनि दो राशियों का स्वामी है, दसवीं राशि मकर और 11वीं राशि कुंभ । मकर कर्म का प्रतिनिधित्व करता है और कुंभ राशि लाभ को दर्शाती है। किसी भी कुंडली में शनि की स्थिति निर्णायक होती है, और कोई भी भविष्यवाणी करने से पहले शनि के स्वभाव और शक्ति का ठीक से आकलन करना ही समझदारी है। शनि एक निर्णायक ग्रह है और बिना किसी रोक – टोक के अच्छे या बुरे फलों के लिए कार्य करता है।

शापित या श्रापित दोष के प्रभाव

किसी व्यक्ति की कुंडली में शापित या श्रापित दोष के होने से उसे निम्न लिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

– कुंडली श्रापित दोष होने पर युवक या युवती का वैवाहिक जीवन तनाव पूर्ण हो सकता है और बात तलाक तक भी पहुंच सकती है।

– शापित या श्रापित दोष से पीड़ित व्यक्ति के जीवन में विधवा या विधुर होने की बड़ी संभावना होती है। चाहे उनकी कुंडली का मिलान कितने ही अच्छे से क्यों न किया गया हो।

– बच्चों के बीमार पड़ने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

– दंपति को बच्चा पैदा करने में समस्या होती है।

– बार-बार गर्भपात का सामना करना पड़ सकता है।

– परिवार के सदस्यों के बीच बार – बार बिना किसी विशेष कारण के झगड़ा होना।

– व्यक्ति की शैक्षिक और करियर वृद्धि में रुकावटें

शापित या श्रापित दोष के उपाय

जैसे अधिकांश बीमारियों के इलाज हैं, वैसे ही कुछ उपचारात्मक उपाय हैं जो शापित या श्रापित दोष के प्रभाव को कम करने के लिए किए जा सकते हैं। उनमें से प्रमुख हैं –

– हर शनिवार को पके हुए चावल और घी के गोले बना लें। इन राइस बॉल्स को कौवे और मछलियों को खिलाएं।

– माता – पिता, वृद्ध और जरूरतमंद लोगों, सफाईकर्मियों और गरीब लोगों की बिना शर्त सेवा करें।

– कोशिश करें कि गुस्सा न करें और झगड़ों से बचें।

– पितृदोष निवारण के लिए विशेष रूप से श्री राम के रूप में भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी जाती है।

– कन्या दान करें।

– पूर्वजों के नाम पर रुद्राभिषेक करें। अभी बुक करें!

– प्रतिदिन हनुमान चालीसा का जाप करें, साथ ही शनिवार के दिन भगवान हनुमान को तेल, सिंदूर, आकड़ा की माला, नारियल अर्पित करें।

– भगवान शिव या शिवलिंग के सामने कम से कम 1,25,000 बार महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करने का प्रयास करें।

महामृत्युंजय मंत्र –

ओम त्रयंबकम यजामहेः सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।
उर्वरुकमिव बंधनाति मृत्युओमुर्क्षिर माम्रतात।।

ध्यान रखने योग्य बातें

निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

– जाप करते समय ब्रह्मचर्य का पालन करें, व्यसनों, दोषों में लिप्त होना बंद करें, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और अन्य भौतिक वस्तुओं का दान करें और यथा संभव हवन, तर्पण करने का प्रयास करें।

– आप किसी भी सोमवती अमावस्या या बुधवती अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन करा सकते हैं और घर पर हवन कर सकते हैं। महा शिवरात्रि पर आप महा मृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं। अथवा अपने लिए अभी एक शिव पूजा बुक कर सकते हैं।

– इसके अलावा, गणेशजी सुझाव देते हैं कि आप एक श्रापित दोष यंत्र को शनि मंत्र का जाप करके पवित्र (सिद्ध) बनाकर अपने पास रखें।

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– शापित या श्रापित दोष के प्रभाव को कम करने के लिए ऊपर बताए गए उपाय चमत्कार कर सकते हैं। लेकिन यदि आपकी खुद की कुंडली में शापित योग है तो आपको अभी हमारे ज्योतिष विशेषज्ञ से बात करनी चाहिए और अपने लिए व्यक्तिगत तौर पर कुछ सफल उपाय जानकर आने वाले खतरे और असुरक्षा से बचना चाहिए।

गणेशजी की कृपा से
गणेशास्पीक्स.कॉम टीम

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