हिंदू धर्म कैलेंडर के अनुसार 29 अगस्त से भाद्रपद यानी भादौ माह की शुरुआत होने वाली है। भाद्रपद चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में दूसरा महीना है। मान्यताओं के अनुसार इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर छोड़ पाताल में राजा बलि के यहां निवास करते हैं। चातुर्मास धार्मिक और व्यावहारिक नजरिए से जीवनशैली में संयम और अनुशासन अपनाने का काल है। भाद्रपद मास में हिन्दू धर्म के कई बड़े व्रत, पर्व और त्यौहार मनाए जाते हैं। इनमें श्री कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेशोत्सव, डोल ग्यारस, ऋषि पंचमी, और अनंत चतुर्दशी व्रत व त्यौहार शामिल है। भाद्रपद माह का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महीना केवल भक्ति के लिए है। अन्य सभी तरह के मांगलिक कार्य इस दौरान बंद रहते हैं।
भाद्रपद माह का ज्योतिषीय महत्व
हिंदू धर्म कैंलेंडर में चंद्रमा को आधार मानकर दिन, तिथि और माह का निर्धारण किया जाता है। चंद्रमा और नक्षत्रों में उनके भ्रमण के आधार पर महीने और उनके नाम तय किए जाते हैं। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र में होते हैं, उसे नक्षत्र को हिंदी महीने के नाम से जाना जाता है। भाद्रपद की शुरूआत सावन माह के खत्म होने के साथ होती है। सावन के बाद भादौ में भी मानसून से पृथ्वी तर बतर होती रहती है। इसी के साथ भाद्र के महीने में घर का निर्माण, शादी, सगाई और अन्य किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। भादौ का महीना भक्ति, स्नान-दान और पूजा पाठ के लिए उत्तम माना गया है।
आखिर कब तक होंगे भाग्य के हाथों मजबूर, शिवजी की कृपा से बनाए बिगड़े काम, क्लिक करें यहां
भाद्रपद मास की शुरुआत रंक्षबंधन के त्यौहार के अगले दिन यानी श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन से होती है। वर्ष 2026 में भाद्र मास 29 अगस्त 2026 से शुरू होकर भाद्र शुक्ल पूर्णिमा तक रहेगा। वर्ष 2026 में भाद्र शुक्ल पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को आने वाली है
भाद्रपद मास 2026: विवरण
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| भाद्रपद के अन्य नाम | भादौ, भादो, भादों |
| विक्रम संवत | 2083 |
| प्रारंभ (पूर्णिमांत – उत्तर भारत) | शनिवार, 29 अगस्त 2026, रक्षाबंधन के अगले दिन |
| समाप्ति (पूर्णिमांत – उत्तर भारत) | शनिवार, 26 सितंबर 2026 (भाद्र शुक्ल पूर्णिमा) |
| अमांत (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत) | 12 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026, भाद्रपद अमावस्या को समाप्त |
| बंगाली पंचांग (भाद्र, 1433 बंगाब्द) | 18 अगस्त से 17 सितंबर 2026 (पश्चिम बंगाल); 16 अगस्त से 15 सितंबर 2026 (बांग्लादेश संशोधित पंचांग) |
भाद्रपद मास 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहार
| त्योहार | दिनांक | वार | तिथि |
|---|---|---|---|
| कजरी तीज | 31 अगस्त 2026 | सोमवार | भाद्रपद कृष्ण तृतीया |
| कृष्ण जन्माष्टमी | 4 सितंबर 2026 | शुक्रवार | भाद्रपद कृष्ण अष्टमी |
| अजा एकादशी | 7 सितंबर 2026 | सोमवार | भाद्रपद कृष्ण एकादशी |
| पिठोरी अमावस्या | 11 सितंबर 2026 | शुक्रवार | भाद्रपद अमावस्या |
| हरतालिका तीज | 14 सितंबर 2026 | सोमवार | भाद्रपद शुक्ल तृतीया |
| गणेश चतुर्थी | 14 सितंबर 2026 | सोमवार | भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी |
| ऋषि पंचमी | 15 सितंबर 2026 | मंगलवार | भाद्रपद शुक्ल पंचमी |
| विश्वकर्मा पूजा | 17 सितंबर 2026 | गुरुवार | भाद्रपद शुक्ल षष्ठी |
| राधा अष्टमी | 19 सितंबर 2026 | शनिवार | भाद्रपद शुक्ल अष्टमी |
| परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 | मंगलवार | भाद्रपद शुक्ल एकादशी |
| गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी) | 25 सितंबर 2026 | शुक्रवार | भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी |
| भाद्रपद पूर्णिमा / पितृ पक्ष प्रारंभ | 26 सितंबर 2026 | शनिवार | भाद्रपद पूर्णिमा |
भाद्रपद माह के विशेष नियम
भाद्र एक संस्कृत शब्द है और इसका अर्थ है, कल्याण करने वाला। इस महीने में भद्र यानी अच्छे परिणाम देने वाले व्रत आने के कारण इसे भाद्र माह कहा जाता है। यह महीना संयम बरतने, व्रत, उपवास, नियम और निष्ठा पालन के लिए जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यह माह अपनी गलतियों के प्रायश्चित के लिए उत्तम माना गया है। आइए जानते है इस माह में किन नियमों का पालन करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए ।
– भाद्र माह में कच्ची चीजें खाने से परहेज करें।
– दही खाने के बचें, क्योंकि दही खाने से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
– इस दौरान गुड़ का सेवन करने से गले से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
– भाद्र माह में किसी का दिया हुआ चावल खाने से लक्ष्मी घटती है।
– भोजन में नारियल के तेल का उपयोग नहीं करना चाहिए, इससे सुखों में कमी आती है।
– तिल के तेल का सेवन भी वर्जित है, इससे उम्र घटती है।
यहां क्लिक करें और गणेशस्पीक्स पर पहली निःशुल्क ऑनलाइन ज्योतिषी चैट प्राप्त करें!
गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम
FAQs
भाद्रपद मास 2026 कब से कब तक है?
वर्ष 2026 में भाद्र मास 29 अगस्त 2026 से शुरू होकर भाद्र शुक्ल पूर्णिमा तक रहेगा। भाद्र शुक्ल पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को आएगी।
भाद्रपद माह का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
भाद्रपद माह चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में दूसरा महीना है और इसे संयम, अनुशासन और भक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु पाताल में राजा बलि के यहां निवास करते हैं।
भाद्रपद माह में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और त्यौहार मनाए जाते हैं?
भाद्रपद माह में श्री कृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेशोत्सव, डोल ग्यारस, ऋषि पंचमी, और अनंत चतुर्दशी जैसे प्रमुख व्रत और त्यौहार मनाए जाते हैं।
भाद्रपद माह में किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए?
भाद्रपद माह में कच्ची चीजें, दही, गुड़, और नारियल के तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। तिल के तेल का सेवन भी वर्जित है।
भाद्रपद माह में मांगलिक कार्य क्यों नहीं किए जाते?
भाद्रपद माह को भक्ति, स्नान-दान और पूजा पाठ के लिए उत्तम माना गया है, इसलिए इस दौरान घर का निर्माण, शादी, सगाई और अन्य मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है।
