मोहिनी एकादशी व्रत 2022 का पालन कर समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करेंं!

mohini ekadashi का त्योहार कब मनाया जाता है, आइए इसके बारे में सबकुछ जानते हैं?

 

हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi 2022) का बहुत महत्व है। इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति द्वारा अपने पिछले जन्मों में किए गए किसी भी बुरे कर्मों को दूर करना है। भारतीय परंपरानुसार भगवान विष्णु की छिपी हुई अभिव्यक्ति को मोहिनी नाम दिया गया। एकादशी तिथि को भगवान इस रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन को ‘मोहिनी एकादशी ‘   के रूप में मनाया जाने लगा। यह दिन उत्तर भारतीय भागों और आसपास के क्षेत्रों में वैशाख महीने में मनाया जाता है; तमिल कैलेंडर के अनुसार, यह ‘चिथिरई’   के दौरान आता है, जबकि यह बंगाली कलैंडर में यह ‘ज्येष्ठो ‘   महीने के दौरान होता है, और मलयालम में मोहिनी एकादशी ‘एडवा ‘   के दौरान होती है। हिंदू धर्म के उत्सव प्रिय लोग इस दिन को पूरे उत्साह से मनाते हैं और आनंदमय और समृद्ध जीवन जीने की कामना करते हैं।

मोहिनी एकादशी 2022 तिथि

मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi 2022) हिंदू वैशाख महीने के दौरान शुक्ल पक्ष के 11 वें दिन होती है। यह आमतौर पर अप्रैल या मई के महीनों के दौरान पड़ती है। मोहिनी एकादशी 2022 की तिथियां इस प्रकार हैं:

मोहिनी एकादशी: 12 मई, 2022, गुरुवार

12 मई को पारण का समय: सुबह 05:32 बजे से शाम 08:14 बजे तक

पारण दिवस पर द्वादशी समाप्ति क्षण : शाम 05:27 बजे

एकादशी तिथि प्रारंभ: 11 मई, 2022, शाम 07:31 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 12 मई 2022, शाम 06:51

मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi) का महत्व

ऐसा माना जाता है कि जब कोई मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi 2022) व्रत को पूरी प्रतिबद्धता के साथ करता है, तो उसे ऐसे महान कर्म (पुण्य) प्राप्त हो सकते हैं, जो कि तीर्थ स्थानों की यात्रा करने या नेक कार्य करने से भी नहीं मिलते। जो व्यक्ति इस व्रत को करता है, उसे 1000 गायों का दान करने पर प्राप्त होने वाले फल के बराबर फल मिलता है। इसे करने से व्यक्ति जन्म-मृत्यु के अनवरत चक्र से भी मुक्त हो जाता है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि इस दिन को हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय है।

मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi) व्रत कथा

हिंदू लोक कथाओं में कहा गया है कि मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु मोहिनी के रूप में प्रकट हुए थे। जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत मिला, तो देवताओं और दैत्यों के बीच एक प्रश्न उठ खड़ा हुआ कि यह अमृत किसके पास हो सकता है। उस समय विष्णु एक रमणीय महिला, मोहिनी के रूप में प्रकट हुए। दैत्य मोहिनी के आकर्षण की सराहना करते रहे, जबकि देवताओं ने उसी समय अमृत पी लिया। यही वजह है कि इस दिन को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। गवान राम ने सीता देवी की तलाश में मोहिनी एकादशी का व्रत भी किया था। महाभारत के दौरान युधिष्ठिर ने भी यह व्रत किया, उसके बाद उन्हें उनके प्रत्येक कष्ट से राहत मिली।

इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करना भी बेहद लाभकारी होता है, पूजा कराने के लिए यहां क्लिक करें…

मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi) पौराणिक कथा

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर भद्रावती नामक एक क्षेत्र था, जिसका शासन राजा द्युतिमान के हाथों में था। वे असाधारण रूप से भगवान विष्णु के भक्त थे। उनकी 5 संतानों में पांचवीं, धृष्टबुद्धि गलत राह पर था। वह महिलाओं के साथ अनैतिक काम करता था, सट्टा लगाता था, साथ ही मांस और शराब का सेवन भी करता था। इसी वजह से राजा उससे परेशान हो गया और अपने इस दुष्ट पुत्र का त्याग कर दिया। तब धृष्टबुद्धि ने अपने आभूषण और कीमती वस्त्रादि बेचकर गुजारा करना पड़ा। जब उनके पास कुछ नहीं बचा, तो वे भूख-प्यास से परेशान होकर ऋषि कौंडिन्य के आश्रम में पहुंचे।

उस समय वैशाख का महीना था और ऋषि गंगा नदी में स्नान कर रहे थे। ऋषि कौंडिन्य के गीले वस्त्रों से पानी की कुछ बूंदें धृष्टबुद्धि पर पड़ी, जिसका उस पर चमत्कारी प्रभाव पड़ा, वह बुद्धिमान हो गया। उस समय उसने ऋषि के सामने अपने सभी गलत कार्यों को स्वीकार किया और उनसे अपने पाप कर्मों से मुक्ति प्राप्त करने का मार्ग पूछा। इस तरह ऋषि कौंडिन्य ने उसे पाप मुक्त होने के लिए शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने के लिए प्रोत्साहित किया। और इस तरह वह उपवास करके अपने बुरे कर्मों से मुक्त हो गया और गरुड़ पक्षी पर बैठकर विष्णु लोक में पहुंच गया।

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मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi) अनुष्ठान

मोहिनी एकादशी (mohini ekadashi) व्रत करने वाले व्यक्ति को पिछली रात (10वीं चंद्र रात) से नीचे दिए गए अनुष्ठानों का पालन करना चाहिए।

  • सुबह जल्दी उठें, सूर्योदय से पहले उठना बेहतर है।
  • शरीर पर तिल का लेप लगाकर स्नान करें।
  • भगवान विष्णु और श्री राम की मूर्तियों के सामने लाल कपड़े से अलंकृत कलश रखें।
  • एक दीपक प्रज्वलित करें, कुछ धूपबत्ती जलाएं, फल-फूल चढ़ाकर देवताओं की पूजा करें।
  • सभी के साथ प्रसाद बांटे और ब्राह्मणों को धन, भोजन या वस्त्र दान करें।
  • भगवान को प्रसन्न करने के लिए रात में समूह में भक्ति गीत गाएं।

मोहिनी एकादशी पर इन चीजों से करें परहेज

  • इस दिन चावल और जौ का सेवन करने से बचें, क्योंकि ऐसा करना इस दिन ठीक नहीं माना जाता और आपके नेक कामों को भी खत्म कर देता है।
  • अन्य लोगों और बाहरी लोगों द्वारा दिया गया भोजन न लें।
  • तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, शराब, मांस आदि के सेवन से बचें।
  • इस दिन क्रोधित, हिंसक, आलोचनात्मक या गलत कार्य करने से बचें।
  • मोहिनी एकादशी के दिन पूर्ण संयम का पालन करने का भी सुझाव दिया गया है।

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गणेश की कृपा से,

गणेशास्पीक्स.कॉम टीम

श्री बेजान दारूवाला द्वारा प्रशिक्षित ज्योतिषी

 

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