लाभ पंचम पूजा विधि और मुहूर्त जानिए

labh panchami क्या है, कब मनाया जाता है, जानिए सबकुछ- Ganeshaspeaks.com

लाभ पंचमी (labh panchami) को सौभाग्य लाभ पंचम भी कहा जाता है। इसे दिवाली के आखिरी दिन मनाया जाता है। लाभ पंचम का अर्थ भाग्य की समृद्धि होता है। यह पर्व मुख्य रूप से गुजरात में मनाया जाता है। यहां लाभ पंचमी के दिन दिवाली उत्सव का समापन होता है। इस दिन को लाभ की दृष्टि से शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार लाभ पंचमी की पूजा करने से जीवन में खुशहाली, सुख समृद्धि, व्यवसाय में उन्नति और अच्छे भाग्य की प्राप्ति होती है।

लाभ पंचम (labh panchami) अर्थ

लाभ पंचम (labh panchami) का अर्थ भाग्य की उन्नति होता है। सुख समृद्धि की दृष्टि से इस पर्व का बहुत बड़ा महत्व होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार लाभ पंचम या लाभ पंचमी कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को मनाई जाती है। लाभ पंचम का मतलब सौभाग्य की प्राप्ति होती है। लाभ का अर्थ सौभाग्य होता है। वहीं पंचम का अर्थ पांचवां होता है। लाभ पंचम (labh panchami) को ‘लाखनी पंचमी’, ‘ज्ञान पंचमी’ और ‘सौभाग्य पंचमी’ भी कहा जाता है। लाभ पंचम आमतौर पर काली चौदस के एक सप्ताह बाद और दिवाली के पांच दिन बाद मनाई जाती है।

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लाभ पंचम (labh panchami) 2022 शुभ मुहूर्त

लाभ पंचम तिथि : 29 अक्टूबर, शनिवार

लाभ पंचम शुभ मुहूर्त : सुबह 08:13 से 10:30 तक।

पंचमी तिथि की शुरूआत : 29 अक्टूबर सुबह 08:13 बजे

पंचमी तिथि का समापन : 30 अक्टूबर सुबह 05:49 बजे

लाभ पंचम की पूजा शुभ, लाभ और अमृत के चौघड़िया में करना उचित होगा।

labh panchami दिन के लिए चौघड़िया

सूर्योदय : सुबह 06:43 बजे

शुभ:  दोपहर 08:08 से 09:33 बजे तक
लाभ: 01:48 PM बजे से 03:13 PM बजे तक
अमृत: 03:13 PM बजे से 04:37 बजे तक

labh panchami रात के लिए चौघड़िया

सूर्यास्त : 06:04 बजे

लाभ: शाम 06:04 से रात 07:39 बजे तक
शुभ: PM 09:13 बजे से 10:48 PM  बजे तक
अमृत:  10:48 PM बजे से 12:23 AM बजे तक

labh panchami पूजा विधि

  • पंचम पूजा के दिन भक्तों को प्रातः उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान सूर्य को जल से अर्घ्य देना चाहिए
  • शुभ चौघड़िया मुहूर्त में भगवान गणेश और शिव की मूर्तियों को स्थापित करें।
  • एक सुपारी लेकर उसको चारों ओर पवित्र धागा लपेटें। इसके बाद उसे चावल की गोल ढेरी रख दें। हो सके तो भगवान गणेश की प्रतिमा को भी उसपर ही रखें।
  • भगवान गणेश को चंदन, सिंदूर, फूल और दूर्वा अर्पित करना चाहिए। वहीं भगवान शिव पर भस्म, बिल्व पत्र, धतूरे के फूल और सफेद वस्त्र अर्पित करना चाहिए।
  • भगवान गणेश को मोदक और भगवान शिव को दूध से बना प्रसाद चढ़ाना चाहिए।
  • भगवान शिव और गणेश के लिए लाभ पंचम मंत्र का जाप करना चाहिए।

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भगवान गणेश के लिए लाभ पंचम मंत्र

लम्बोदरं महाकायं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्। आवाह्याम्यहं देवं गणेशं सिद्धिदायकम्।।

भगवान शिव के लिए लाभ पंचम मंत्र

त्रिनेत्राय नमस्तुभ्यं उमादेहार्धधारिणे। त्रिशूलधारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:।।

  • मंत्र जाप के बाद भक्तों को आरती के लिए धूप और दीप जलाना चाहिए। दोनों देवताओं की आरती करने से लाभ की प्राप्ति होती है।
  • अपने द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक बनाएं। एक बार लाभ पंचमी की पूजा हो जाने के बाद भगवान को प्रसाद चढ़ाएं।

labh panchami (लाभ पंचम) का महत्व

यह दिवाली के अंतिम दिन मनाया जाता है। इसके बाद से दिवाली समारोह के दौरान बंद की गई दुकानें और व्यवसाय फिर से खुल जाते हैं। किसी भी नए उद्यम और व्यवसाय को शुरू करने के लिए भी यह एक शुभ दिन माना जाता है। भक्त विशेष रूप से भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। भक्त लाभ पंचम (labh pancham) के शुभ दिन अपना खाता खोलते हैं। जीवन में ज्ञान और समृद्धि के लिए लक्ष्मी गणेश यंत्र से भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। जैन धर्म के लोग अपनी धार्मिक पुस्तकों की पूजा करते हैं। साथ ही ज्ञान की प्राप्ति के लिए विभिन्न प्रकार के प्रसाद, मिठाई और फल अर्पित कर भगवान की प्रार्थना करके लाभ पंचम का पर्व मनाते हैं। इस दिन कई भक्त मां सरस्वती की विशेष पूजा भी करते हैं। दिवाली के दिन से लाभ पंचम तक अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के यहां जाने की परंपरा है। यह उन सभी के बीच अच्छे संबंधों को फिर से बेहतर करने का अच्छा समय होता है। लाभ पंचम पर मिठाइयों और अन्य उपहारों का आदान-प्रदान किया जाता है, जो एक दूसरे के साथ संबंधों में मधुरता का प्रतीक माना जाता है।

labh panchami (लाभ पंचमी) पूजा से लाभ

दुकान, व्यवसाय या फैक्ट्री शुरु करने वाले लोग इस दिन को अत्यंत शुभ मानते है। लोग विशेष रूप से अपने नए व्यवसाय को शुरु करते है। हर साल भक्त इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

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गणेश जी की कृपा से

गणेशास्पीक्स.कॉम टीम

श्री बेजन दारूवाला द्वारा प्रशिक्षित ज्योतिषी।