नक्षत्र – पुनर्वसु

रंगः ग्रे और शीशे जैसा
भाग्यशाली अक्षरः क, ह

पुर्नवसु राशिचक्र का सातंवा नक्षत्र है और ईश्वर की माता अदिति इस नक्षत्र की इष्टदेव है। इस नक्षत्र के अंतर्गत पैदा होने वाले जातक धार्मिक होते हैं तथा अक्सर अनजाने में लेकिन निश्चित रुप से कट्टरपंथी को पार कर जाता है। वे आम तौर पर लंबे पैर, घुंघराले बाल, लंबी नाक के साथ सुंदर होते हैं । हमेशा मदद करने की प्रकृति के होते हैं तथा काफी साधारण जीवन व्यतीत करते हैं लेकिन जहां अनैतिक व अवैध के संबंध में कुछ होता है तो वे काफी जिद्दी तथा प्रतिरोधी हो जाते हैं। ऐसे कार्यों में भाग नहीं लेते तथा दूसरों को ऐसा करने से रोकने की कोशिश करते हैं। वे एक निश्चित तरह के व्यवहार को बदलने में सक्षम होते हैं, यह दूसरों को भ्रमित और भयभीत करता है। वे व्यापार या कारोबार की तुलना में सार्वजनिक उपक्रमों में ज्यादा सफल होते हैं और धन से अधिक प्रसिद्धि संचित करते हैं। विवाह के समय वे उदार नहीं होने के कारण उनका विवाहित जीवन सौहार्दपूर्ण नहीं होता और इनमें से कई को दूसरी शादी करते हैं। इस नक्षत्र के जातक का स्वास्थ्य आमतौर पर अच्छा होता है। इस नक्षत्र के अंतर्गत जन्म लेने वाली महिलाएं पीलिया, गण्डगल और पेट जैसी समस्याओं से परेशान होती हैं।

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