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गणेशजी से जानें, राहुल गांधी का राजनीतिक भविष्य कैसा हाेगा

गणेशजी से जानें, राहुल गांधी का राजनीतिक भविष्य कैसा हाेगा

देश की सबसे बड़ी आैर सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस आज हाशिए पर सिमटी हुर्इ है। जिसका प्रमुख कारण राहुल गांधी को माना जा रहा है। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के निधन के बाद ना सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि पार्टी समर्थकों को भी राहुल में अपने भावी कर्णधार की छवि नजर आने लगी थी। विदेश में कुछ साल बिताने के बाद जब राहुल ने राजनीति में कदम रखा तो सभी को लगा कि वे निश्चित रूप से एक सफल नेता के रूप में उभरेंगे। छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले राहुल कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष पद पर पहुंचने में सफल रहे, वहीं राहुल ने अमेठी लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। लेकिन गांधी परिवार के इस नौजवान में वो अाकर्षण आैर प्रतिभा नजर नहीं आर्इ, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। यही कारण था कि लोकसभा चुनावों आैर विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मुंह के बल गिरी। जिस तरह कांग्रेस के प्रति जनता का भरोसा लगातार कम होता जा रहा है उससे यही लग रहा है कि आने वाले दिनों में राहुल की भूमिका में बड़ा बदलाव आ सकता है। तो आइए जानते है गणेशजी कि राहुल गांधी के लिए आगामी समय कैसा रहेगा ? क्या वो एक सफल राजनीतिज्ञ के रूप में उभरेंगे आैर क्या उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी फिर से मजबूत पार्टी के रूप में उभर पाएगी ?

राहुल गांधी
जन्म की तारीखः 19 जून, 1970
जन्म-समयः 14: 28 (अनिश्चित)
जन्म-स्थानः नर्इ दिल्ली, भारत

राहुल गांधी की कुंडली

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राहुल गांधी की कुंडली काफी आशाजनक
राहुल गांधी की कुंडली के अनुसार उनका जन्म तुला लग्न में हुआ है। उनका वर्गोतम गुरू लग्न में विराजमान है। इसके अलावा लग्न भी वर्गोतम है। उसके नौवें भाव का स्वामी बुध भी वर्गोतम है। जबकि मंगल आैर सूर्य भाग्य के नौवें स्थान में ‘शुभ-कर्तरी’ योग बना रहा है। एेसे में राहुल गांधी की कुंडली में प्रभावशाली राजनीतिक बनने के लिए कर्इ आशाजनक ज्योतिषीय संयोजन है।

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व्यवहारिक रूप से फायदा मिलना संदेहजनक
हालांकि, राहुल गांधी की कुंडली में कोर्इ विशिष्ट राजयोग नहीं है। साथ ही नौवें भाव का स्वामी (भाग्य का भाव) बुध आठवें भाव में (दुर्भाग्य के भाव) विराजमान है। एेसे में राहुल गांधी का भाग्य पर्याप्त मजबूत नहीं है। साथ ही जन्म के चंद्र से दूषित ग्रह पांचवें आैर नौवें भाव से एवं पांचवें भाव से नीच शनि राहुल के राजनीतिक कैरियर में रूकावटें उत्पन्न कर रहा है।

हाल की असफलताआें के बावजूद, पार्टी में मजबूत पद पर बने रहेंगे
राहुल गांधी वर्तमान में मंगल की महादशा आैर शुक्र की अंतर्दशा से प्रभावित है। लग्न का स्वामी शुक्र दसवें भाव में मजबूत स्थिति में है जो ये संकेत देता है कि विभिन्न राज्यों में हुए हाल के चुनाव में मिले गंभीर झटकों के बावजूद वे तूफानी स्थितियों को अच्छे से संभालने में सक्षम होंगे अौर कांग्रेस पार्टी में वे प्रभावशाली पद पर बने रहेंगे।

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असमंजस की स्थितियां बनी रहेगी
लेकिन, वर्तमान में राहुल गांधी शनि की साढ़े साती के दूसरे चरण से प्रभावित है। शनि की साढ़े साती का ये समय मुश्किल, विलंब आैर निराशाभरा होने के साथ चिंतातुर एवं संघर्ष-ग्रस्त होगा। साथ ही राहु का कर्क राशि में आगामी गोचर भी राहुल गांधी के लिए मुश्किलों भरा रहेगा। वो अनिर्णायक स्थिति में रहेंगे आैर कांग्रेस के भाग्य के सितारे को फिर से मजबूत बनाने के लिए उनका दृष्टिकोण स्पष्ट नहीं होगा। यानि राहुल ये नहीं समझ पाएंगे कि जनता के बीच फिर से कांग्रेस की छवि को कैसे सुधारा जाए। उनका कमजोर दृष्टिकोण उनके नेतृत्व क्षमता को लेकर गंभीर आलोचनाएं पा सकता है।

पार्टी पर पकड़ होगी कमजोर
सितम्बर 2017 के बाद का समय राहुल गांधी के लिए अच्छा रहेगा। जब गुरू कन्या से तुला राशि में गोचर करेगा, ये पारगमन राहुल के पक्ष में काम करेगा। एेसे में सितंबर 2017 के बाद वो एक पार्टी लीडर के रूप में अधिक आत्मविश्वासी नजर आएंगे। हालांकि, कांग्रेस के प्रति लोगों की धारणा को बदलना राहुल गांधी के लिए आसान काम नहीं होगा। अप्रेल 2019 तक का समय राहुल गांधी के लिए कठिन रहेगा आैर खासकर अगस्त 2018 के बाद कांग्रेस पार्टी की नींव पर उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी।

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गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
तन्मय के ठाकर
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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