महाशिवरात्रि 2017: जानें कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न

भगवान शिव

महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। जिसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को देशभर में वृहद स्तर पर पूर्ण श्रद्घा के साथ मनाया जाता है। भोेलेबाबा की आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले ये त्यौहार इस बार 24 फरवरी को है। जिसके तहत भक्त पूजा-अर्चना, रूद्राभिषेक आैर रात्रि जागरण जैसे धार्मिक अनुष्ठानों से भगवान शिव को प्रसन्न कर उनके अाशीर्वाद मांगा जाता है। ज्योतिष के सिद्घांतों के अनुसार, शिवरात्रि की रात ब्रह्मांड दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है आैर श्रद्घालु इस ऊर्जा को पाने की प्रार्थना करते है।

शिव का तात्पर्य

भगवान शिव त्रिदेव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनको ब्रह्मा, विष्णु, महेश ”शिव” कहते हैं, जो क्रमशः निर्माता, पालक एवं विनाशक हैं। शिव का अर्थ कल्याण होता है। शिव केवल भगवान नहीं हैं, बल्कि उनको पंचदेव पूजन में प्रमुख देव के रूप में देखा जाता है। शिव महिमन स्तोत्र में उनके स्वरूप आैर महिमा का बखूबी बयान किया गया है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव हिमालय की गोद में स्थित कैलाश पर्बत पर निराकार, कालातीत रहते हैं। लिंग शिव की अप्रकट प्रकृति का प्रतीक है। हिन्दू समाज में शिव की मूर्ति एवं शिवलिंग दोनों की पूजा की जाती है,क्योंकि ये दोनों ही शिव जी के प्रतीक हैं। कहते हैं कि भगवान शिव को खुश करना बहुत आसान है एवं उनकी कृपा आपको असीम शक्ति प्रदान करती है। एक मत यह भी है कि शिव की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। भगवान शिव से ‘ओम’ की उत्पत्ति हुई है। इसलिए ओम का उच्चारण भगवान शिव की पूजा कहलाता है।

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महाशिवरात्रि से जुड़ी दंत कथाएं 

महाशिवरात्रि के संदर्भ में बहुत दिलचस्प कथाएं पुराने हिन्दु ग्रंथों में दर्ज हैं, जो महाशिवरात्रि के महत्व को दर्शाती हैं। पुराणों के अनुसार सागर मंथन के दौरान निकलने वाले ज़हर के प्याला को पीने के लिए जब कोर्इ देवी-देवता तैयार नहीं थे। तब सभी भगवान शिव के द्वार पर पहुंचे एवं शिव भगवान को निवेदन किया, जिसके बाद शिव भगवान विष पीने के लिए तैयार हो गए। कहते हैं कि विष पीने के बाद शिव ने विष को अपने गले से नीचे नही उतारा एवं विष ने अपने प्रभाव से उनके गले को नीला कर दिया,जिसके बाद उनको नीलकंठ नाम से भी पुकारा जाने लगा। महाशिवरात्रि पर्व इसलिए भी मनाया जाता है कि शिव ने पूरा ज़हर पीकर पूरे विश्व की रक्षा की।

इस तरह एक दंत कथा ये भी है कि एक शिकारी शिकार के लिए जंगल में गया। शिकारी जंगल में बिलवा पत्र के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया, एवं शिकार का इंतज़ार करने लगे। उसको ख़बर नहीं थी कि पेड़ के नीचे शिवलिंग स्थापित है, एवं न ही उसको महाशिवरात्रि का ध्यान था। शिकारी पत्ते तोड़ तोड़ शिवलिंग पर गिराता रहा। दिन की पहली तिमाही के दौरान शिकारी ने एक हिरण को पानी पीने के लिए आते देखा, उसने शिकार करने की कोशिश की, तो हिरण ने अपने बच्चों का वास्ता दिया, इस पर शिकारी को दया आर्इ, उसने हिरण को जाने दिया एवं उसके बाद हिरण का बच्चा आया, शिकारी ने शिकार करने का मन छोड़ दिया। पेड़ पर बैठा शिकारी खाली पेट शिवलिंग पर तोड़ तोड़ पत्ते गिराता रहा। जब पूरा दिन गुज़र गया तो भगवान शिव स्वयं उस के सामने प्रकट हुए एवं उसको मोक्ष की प्राप्ति हो गयी। इस तरह अगर आप अनजाने में भी महाशिवरात्रि के दिन उपवास रखते हैं तो इसके आप को बहुत लाभ मिलते हैं।

एेसी भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव आैर देवी पार्वती का विवाह हुआ था। इसी उपलक्ष में ये पर्व पूर्ण श्रद्घा आैर उल्लास के साथ मनाया जाता है। 

शिवरात्रि का महत्वः 

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ने एक बार कहा था कि जो महाशिवरात्रि पर्व पर उनकी एवं मां पार्वती की मूर्ति की पूजा करते हैं, वे उनको उनके पुत्र कार्तिक से भी अधिक प्रिय होंगे। भगवान शिव की अपार कृपा आप के जीवन को बदलकर रख देती है। इसके कारण शिव के भक्त महाशिवरात्रि के मौके पर बहुत सख्ती से उपवास रखते हैं, कुछ भक्त तो पानी की एक बूंद तक नही पीते। एेसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने, व्रत रखने आैर रात्रि जागरण करने से उपासक पर शिव अपनी कृपा बरसाते है आैर उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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महाशिवरात्रि पर कैसे करें भोलेबाबा का पूजनः 

शिवरात्रि के व्रत से एक दिन पहले श्रद्घालु सिर्फ एक बार भोजन ग्रहण करते है। जबकि शिवरात्रि के दिन, सुबह की पूजा खत्म करने के बाद, श्रद्घालु पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लेते है आैर अगले दिन अपना व्रत तोड़ते है। श्रद्घालुआें को शाम को भी एक बार फिर से स्नान करनी चाहिए, ताकि शिवपूजा से पहले पवित्रता बनी रहें। एेसी माना जाता है महाशिवरात्रि की रात में भोलेबाबा का चार प्रहर में पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है।

आइए जानते है इन चार प्रहरों में भगवान शिव की उपासना के तरीकेः 

पहले पहर :तिल, जैव, कमल, बिलवा पत्र

दूसरे पहर : विजोर फल, नींबू, खीर

तीसरे पहर :तिल, आटा, मालपौहा, अनार, कपूर

चौथे :उड़द, जैव, मूंग, शंखीपुष्प, बिलवा पत्र एवं उड़द के पकौड़े दिन के अंत में चढ़ाएं।

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महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के लाभ

  • – भगवान शिव का अभिषेक करने से आत्मा की शुद्धि होती है।
  • – महाशिवरात्रि पर प्रसाद चढ़ाने से लंबा आैर संतोषजनक जीवन प्राप्त होता है।
  • –  ज्योत जगाने से जीवन में ज्ञान का प्रकाश होता है।
  • –  शिव भगवान को तंबुल चढ़ाने से सकारात्मक नतीजे मिलते हैं।
  • –  शिवलिंग को दूधाभिषेक करवाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
  • –  शिवजी को दही से स्नान करवाने पर आप को वाहन सुख प्राप्त होता है।
  • –  भगवान शिव को पानी में मिलाकर दरबा चढ़ाने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • –  अगर आप शहद, घी व गन्ना शिव को चढ़ाते हैं तो शिवजी आप को धन दौलत देंगे।
  • –  अगर आप भगवान शिव को गंगा जल से स्नान करवाते हैं तो आप को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित

गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम 

महाशिवरात्रि पर गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम की खास पेशकश 

1. महामृत्युंजय यंत्र 

2. पारद शिवलिंग 

3. श्री शिव यंत्र

4. पांचमुखी रूद्राक्ष

5. सातमुखी रूद्राक्ष

21 Feb 2017

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