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महाशिवरात्रि 2023 पर अपने जीवन में पाएं शांति और खुशहाली का आशीर्वाद!

Published on अक्टूबर 28, 2021

 महा शिवरात्रि 2022

महा शिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह ‘देवों के देव’ महादेव भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता है। यह शुभ रात्रि उस रात की प्रतीक है जब भगवान शिव नृत्य साधना करते हैं। वैसे तो शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के हर चंद्र और सूर्य मास में 13 वें या 14 वें दिन को आती है, लेकिन फाल्गुन मास में आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। महा शिवरात्रि का अर्थ है “भगवान शिव की महिमामयी दिव्य रात”। भगवान शिव के उपासक उनका आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन व्रत करते हैं, पूरी रात जागरण करते हैं साथ ही बहुत धूमधाम से यह पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष महा शिवरात्रि 2023, 18 फरवरी को मनाई जाएगी।

वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार, यह त्योहार हम सभी को जीवन में “अंधेरे और अज्ञान पर काबू पाने” और शिव का स्मरण करने का अवसर प्रदान करता है। इस महा शिवरात्रि 2023 पर आप अपने बड़ों का श्राद्ध भी कर सकते हैं, और अपने पितरों को तृप्त करने के लिए आप विशेषज्ञ ज्योतिषियों की मदद ले सकते हैं। समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने पूरे ब्रह्मांड को विनाश से बचाने के लिए हलाहल पिया, जिससे उनका कंठ पीड़ा से जलने लगा था। शिव इतने महिमामयी है कि उनकी दिव्यता का उत्सव मनाने के लिए महा शिवरात्रि मनाई जाती है। इस पर्व पर ध्यान-उपवास और प्रार्थना खास तौर पर की जाती है। शिव जिस पीड़ा से गुजरे, उसे महसूस करना मनुष्यों के वश में नहीं है फिर भी कुछ लोग श्रद्धापूर्वक इस दिन शिव की प्रिय भांग का सेवन करते हैं। इस विशेष दिन पर आप भगवान शिव की पूजा करने के लिए कोई भी शिवालय जा सकते हैं और धतूरा जैसे आक का फूल भी शिव को अर्पण कर सकते हैं।

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भगवान शिव के लिए मनाया जाने वाला यह पर्व केवल धार्मिक महत्व तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्योतिषशास्त्र के अनुसार भी बहुत खास माना जाता है। तो आइए हम पवित्र रात्रि के ज्योतिषीय महत्व और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के तरीकों की खोज करें।

महा शिवरात्रि 2023 का ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चतुर्दशी के दिन चंद्रमा निम्न का हो जाता है। इस दिन चंद्रमा में पृथ्वी को ऊर्जा प्रदान करने की शक्ति नहीं होती है। लेकिन, भगवान शिव की कृपा से चंद्रमा की ताकत बढ़ जाती है। इसलिए महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा करने से आपकी कुंडली का चंद्रमा मजबूत होता है। चंद्रमा व्यक्ति की मनोदशा से दृढ़ता से जुड़ा होता है और इस प्रकार महाशिवरात्रि पर चंद्र की पूजा करने से आनंद, खुशी और काम में सफलता मिलती है। आप अपनी चंद्र शक्ति को बढ़ाने और अपनी सभी समस्याओं को हल पाने के लिए वैदिक पंडित द्वारा पूजा करवा सकते हैं। यह दिन आपके लिए वर्ष में एक बार आपके जीवन की सभी समस्याओं को हल करने का अवसर है चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, व्यवसाय या करियर हो।

महा शिवरात्रि की अवधि के दौरान सूर्यदेव उत्तरायण करते हैं। यह समय ऋतु परिवर्तन का होता है और वैवाहिक सुख में लिप्त होने के लिए इसे बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप अपने परिवार में वृद्धि की योजना बना रहे हैं तो यह समय इसकी शुरुआत करने का अवसर लेकर आता है। वसंत का आगमन आपके मन को परम आनंद और जोश से भर देता है। किंवदंती के अनुसार, कामदेव को भगवान शिव ने पुनर्जीवित किया था और इस समय कामदेव पूरी तरह से सक्रिय होते हैं। इस प्रकार, यह भगवान शिव की पूजा करने का सबसे अच्छा समय है, और अपने परिवार को एक अलग रूप देने का भी। यहां आश्चर्य की बात यह भी है कि वेदों के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग का संबंध 12 चंद्र राशियों से भी है।

किंवदंतियों का मानना ​​​​है कि अमावस्या और त्रयोदशी का स्पर्श होने की वजह से चतुर्दशी की तिथि पर महा शिवरात्रि का पर्व होना सबसे अच्छा माना जाता है। एक मान्यता के अनुसार इस दिन ब्रह्मा की तपस्या के फलस्वरूप भगवान शिव की उत्पत्ति रुद्र नामक बालक के रूप में हुई थी। यह भी कहा जाता है कि इस दिन को शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला था और विनाशक नृत्य किया था। उसके बाद ब्रह्मांड का पुनर्वास किया गया और उस अवधि को हम महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। इस अवधि के दौरान लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए उपवास और प्रार्थना करना सबसे अच्छी बात है। सौभाग्य से, हमारे वेदों के अनुसार, रुद्राभिषेक पूजा करने और मंत्रों के जप से किसी भी जातक को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। निःसंदेह, ईमानदारी से की गई प्रार्थनाएं आपको भावी जीवन के संभावित खतरों से बचा सकती हैं। इसके साथ ही रुद्राभिषेक पूजा आपके और आपके परिवार के स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए वर्ष के किसी भी शुभ समय पर की जा सकती है।

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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के स्थान इस प्रकार हैं:-

12 ज्योतिलिंग

12 ज्योतिर्लिंग

विभिन्न क्षेत्रों में महा शिवरात्रि 2023 का उत्सव मनाने के तरीके :

तमिलनाडु के क्षेत्रों में तिरुवन्नामलाई जिले में स्थित अन्नामलाईयर मंदिर में महाशिवरात्रि बहुत धूमधाम और आस्था से मनाई जाती है। इस दिन एक बहुत ही विशेष जुलूस निकाला जाता है, जिसे ‘गिरिवलम’ कहा जाता है। इस जुलूस में पहाड़ी की चोटी पर स्थित भगवान शिव मंदिर के चारों ओर 14 किमी नंगे पैर परिक्रमा लगाई जाती है।

वाराणसी और सामंथा जैसे क्षेत्रों में भारत के प्रमुख ज्योतिर्लिंग और अन्य शिव मंदिरों पर खास मेलों का आयोजन किया जाता है। हर साल पवित्र नदियों के तट पर रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है और भगवान शिव की आराधना की जाती है।

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आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के क्षेत्रों में, गुंडलकम्मा कोना, कंभल्लापल्ले, उमा महेश्वरम और मलाया गुट्टा में तीर्थ यात्राएं की जाती हैं। वारंगल में रुद्रेश्वर स्वामी के 1000 स्तंभों वाले मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव मनाया जाता है।

महा शिवरात्रि का मेला मंडी (हिमाचल प्रदेश) शहर में भी आयोजित किया जाता है, (इस शहर के पास एक IIT भी स्थित है). मंडी में कई मंदिर है और यह हिमाचल प्रदेश के सबसे पुराने शहरों में से एक है। यह ब्यास नदी के तट पर स्थित है जहां हजारों लोग महाशिवरात्रि को बड़े उत्साह के साथ मनाने के लिए इकट्ठा होते हैं।

समापन

भगवान शिव को विनाश के देवता के रूप में माना जाता है, लेकिन महादेव हमेशा संकट के क्षण में हमें अगोचर रूप में बचाते हैं। शिव हिंदू धर्म में ब्रह्मांड के उद्धारकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। महाशिवरात्रि पर सच्ची आस्था से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी संकटों और संघर्षों का समाधान हो सकता है। यह माना जाता है कि पावन गंगा नदी भगवान शिव की जटाओं से निकलती है जो गंगोत्री के रूप में पृथ्वी में प्रवेश करती है। इस पवित्र नदी में डुबकी लगाने से आपके सब पाप धुल सकते हैं और भगवान शिव से आपको जीवन में एक सुख, शांति, समृद्धि और दिव्यता का आशीर्वाद मिलता है।

18 फरवरी महा शिवरात्रि 2023 पर शिव को प्रसन्न करने के लिए उपवास, पूजा विधिपूर्वक अनुष्ठान करें। आप तीर्थ स्थान की यात्रा भी कर सकते हैं और भगवान शिव के इस खास पर्व को मनाने के लिए आयोजित मेलों का भी आनंद ले सकते हैं।

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