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मां कुष्मांडा – नवरात्री का चौथा दिन

Published on जनवरी 10, 2022

मां कुष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन कुष्मांडा माता की आराधना की जाती है। इनकी कृपा से सभी प्रकार के रोग-शोक दूर हो जाते हैं। अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मनुष्य भाग्यशाली बन जाता है। अष्टभुजाधारी माता कुष्मांडा शेर पर सवार रहती है। कहते हैं माता कुष्मांडा सूर्य मंडल में निवास करती है। माता के हाथ में पुष्प, चक्र, गदा, वर देती हुई मुद्रा, जप माला और अमृत घड़ा रहता है। कुम्हड़ा यानी कद्दू की बलि दी जाती है। मां को हरा रंग बहुत पसंद है। नवरात्रि के मानसून के बाद आती है, इसलिए चारों ओर प्रकृति हरे रंग की चुनर ओढ़े खूबसूरत सी बनी रहती है। इसी खूबसूरती को मां कुष्मांडा बहुत पसंद करती हैं। नवरात्रि 2022 में चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा चैत्र नवरात्रि में 5 अप्रेल और शारदीय नवरात्रि में 29 सितंबर को को होगी।

ऐसे करेें पूजा-पाठ

नवरात्रि के चौथे दिन मां की पूजा हरे रंग के कपड़े पहनकर करने का विधान है। मां के लिए ऊं कुष्मांडा देव्यै नम:  मंत्र का जाप किया जाना चाहिए। वहीं सिद्ध कुंजिका स्रोत का पाठ करना नवरात्रि में लाभ दायक है। मां को प्रिय भोग मालपुए का भोग लगाएं. मालपुए का भोग अर्पित करने से मां कूष्माण्डा बहुत प्रसन्न होती हैं। इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान कर दें और खुद भी खाएं.

मां कुष्मांडा को अष्टभुजादारी भी कहा जाता है…

ऐसी मान्यता ये है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब कुष्माण्डा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अपनी मंद-मंद मुस्कान भर से ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने के कारण ही इन्हें कुष्माण्डा के नाम से जाना जाता है इसलिए ये सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। मां कुष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं। इसलिए मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां सिंह के वाहन पर सवार रहती हैं। देवी कुष्मांडा का निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है जहां निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। माता कुष्मांडा के आशीर्वाद पाने के लिये आज ही लग्न विघ्न यन्त्र ख़रीदे और जीवन को धन्य बनाये.

देवी कुष्मांडा दीर्घायु, प्रसिद्धि और ताकत प्रदान करती है

नवरात्रि पर्व के चौथे दिन भक्त का मन अनाहता चक्र में प्रवेश करता है। जिसमें उसे फोकस रहना चाहिए। केवल मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्त को अपने सभी दुखों और तकलीफों से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा उसे दीर्घायु, प्रसिद्धि, ताकत और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। क्या आप अपनी जिंदगी में आने वाले उतार-चढ़ाव के बारे विस्तार से जानना चाहते है तो खरीदें आपके जीवन की विस्तृत भविष्यवाणी रिपोर्ट

मां कुष्मांडा का मंत्र और संबंधित तथ्य – 

मां कुष्मांडा का ध्यान मंत्र – ॐ देवी कुष्मांडाये नमः, इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

मां कुष्माण्डा के मंत्र

सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

मां कुष्माण्डा जाप मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

चौथे दिन का रंग :

चैत्र नवरात्रि – लाल

शारदीय नवरात्रि – पीला

चौथे दिन का प्रसाद – मालपुआ और दूध पाक 

वह देवी जिनके उदर में त्रिविध तापयुक्त संसार स्थित है वह कूष्माण्डा हैं। देवी कूष्माण्डा इस चराचार जगत की अधिष्ठात्री हैं। जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी उस समय अंधकार का साम्राज्य था। देवी कुष्मांडा जिनका मुखमंड सैकड़ों सूर्य की प्रभा से प्रदिप्त है उस समय प्रकट हुई उनके मुख पर बिखरी मुस्कुराहट से सृष्टि की पलकें झपकनी शुरू हो गयी। कहते हैं कुसुम अर्थात फूल के समान मां की हंसी से सृष्टि में ब्रह्माण्ड का जन्म हुआ। इस देवी का निवास सूर्यमण्डल के मध्य में है और यह सूर्य मंडल को अपने संकेत से नियंत्रित रखती हैं। इनकी पूजा से सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

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