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जानें काली चतुर्दशी के शुभ दिन पर कैसे पाएं संकटों से मुक्ति !

काली चतुर्दशी

रोशनी के त्यौहार दीपावली से एक दिन पूर्व यानीकि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को काली चौदस के रूप में मनाया जाता है। खासतौर से उत्तर भारत के लोग इस दिन माँ काली की पूजा को अधिक महत्व देते हैं। माँ काली अपने भक्तों को बुरी ताकतों से लड़ने के लिए शक्ति व साहस प्रदान करती हैं। इस दिन अलौकिक शक्तियों को हासिल करने के लिए भी माँ काली की पूजा करनी की जाती है, जिसका दुरूप्रयोग बहुधा लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है। माँ काली की पूजा व्यक्ति को दुष्ट पाखंडियों से बचाती है।

माँ काली का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए:
इस दिन माँ काली का विशेष रूप से महत्व होता है। देवी शक्ति का भयंकर रूप माने जाने वाली माँ काली सभी नकारात्मक पहलुआें आैर बुरार्इयों की विनाशकारक के रूप में जानी जाती है। माँ काली, विनाश आैर उत्थान के प्रतीक के रूप में जानी जाती है। इनका आशीर्वाद प्राप्त होने पर निश्चित रूप से सभी नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है आैर दुश्मनों पर विजय मिलती है।

गुप्त विद्याओं की सिद्धि के लिए एक आदर्श दिनः
काली चाैदस का दिन उन लोगाें के लिए भी अधिक महत्व रखता है जो तंत्र-मंत्र के क्षेत्र से जुड़े हैं या एेसे गूढ़ विषयों में विशेष रूचि रखते हैं। इस दिन तांत्रिकों आैर अघोरियों को अपनी तांत्रिक क्रियाओं आैर साधना का विशेष फल मिलता है। साथ ही बुरी अात्माओं को दूर भगाने के लिए यह दिन अत्यंत प्रभावकारी माना जाता है।

ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष में – राहु को जिंदगी के दुष्ट क्षेत्रों का कारक माना जाता है। माँ काली की पूजा को नकारात्मकता का प्रभाव दूर करने वाला माना जाता है, जो कि राहु के दूषित प्रभाव का परिणाम होती है। जो लोग राहु के दुष्प्रभावों का सामना कर रहे हो, उन्हें इस दिन विशेष रूप से देवी को खुश करने के लिए इनकी विधिवत पूजा करना चाहिए। क्या आप भी अपनी जिंदगी में कुछ समस्याओं का सामना कर रहे हैं? क्या आप गलतियों को सुधारने में भ्रम की स्थिति का सामना कर रहे हैं? तो अब इस भ्रम में बिल्कुन नहीं रहें! तुरंत प्राप्त करें हमारी व्यक्तिगत रिपोर्ट उपचारात्मक समाधान व्यक्तिगत जीवन के लिए !

नरकासुर का वध:
नरकासुर नामक एक दैत्य था जिसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरूण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताआें को आतंकित कर दिया था। अपनी शक्ति के बल पर अंधे होकर नरकासुर संतों और महिलाअों पर भीषण अत्याचार करने लगा। अत्याचारों के बहुत बढ़ जाने पर देवता आैर ऋषिगण भगवान श्री विष्णु के पास सहायता हेतु गए। उनकी शिकायतों को सुनकर भगवान विष्णु ने उन्हें नरकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। लेकिन, नरकासुर को स्त्री के हाथों मरने का श्राप था, इसलिए भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया आैर संग्राम में नरकासुर का वध किया। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं आैर संतों को उसके भय से मुक्ति दिलार्इ। तभी से उस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में जाना जाता है।

कुछ अन्य कथाएं जो इस दिन से जुड़ी है:

हनुमान की कथा
भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान को हर कोर्इ जानता है। जब हनुमान छोटे थे, तो एक बार उन्होंने सूर्य को अद्भुत फल समझकर निगल लिया जिससे पूरे विश्व में अंधेरा छा गया था। सभी देवी आैर देवताओं ने हनुमान जी से सूर्य को मुक्त करने की प्रार्थना की, लेकिन बाल हनुमान नहीं माने। इस पर देवताओं के राजा इंद्र ने क्रोधित होकर अपने वज्र से हनुमान जी पर वार किया, जो हनुमान के मुंह पर जाकर लगा आैर इससे सूर्य बाहर आ पाए। सूर्य के बाहर निकलने के बाद विश्व में एक बार फिर से प्रकाश दिखार्इ देने लगा।

राजा बलि की कथा
राजा बलि सबसे उदार राजाओं में से एक था और इस कारण उसने बहुत अधिक प्रसिद्घि हासिल की। लेकिन ये प्रसिद्घि उसके सिर चढ़ कर बोलने लगी आैर वो अभिमानी बन गया। जो भी उसके पास भिक्षा मांगने आता उसका राजा बलि अपमान करने लगे। राजा बलि की इन हरकतों से क्रुद्ध होकर भगवान विष्णु ने उसे सबक सीखाने का निर्णय लिया आैर अपने वामन अवतार में भिक्षा लेने के लिए उस समय राजा के द्वार पहुंचे, जब वो अश्वमेघ यज्ञ का समापन कर रहा था। जब बलि ने उससे उसकी मनचार्इ वस्तु के बारे में पूछा तो उसने तीन पग भूमि दान में मांगी। पहले पग में वामनरूप धारी भगवान ने पूरी पृथ्वी आैर दूसरे पग में स्वर्ग को नाप लिया। शेष दान के लिए बलि ने विनम्रतापूर्वक अपना मस्तक आगे रखते हुए प्रभु से अपना सर रखने की प्रार्थना की। राजा बलि के इस कृत्य के कारण उसे मोक्ष की प्राप्ति हुर्इ। तभी से काली चौदस के दिन को लालच को दूर करने के रूप में भी मनाया जाने लगा।

पूजा मुहूर्त: दोपहर 11:57 से 12:47 तक

क्या करेंः
* तिल की वस्तुओं, ल आैर घी व शक्कर मिश्रित चावल का प्रसाद अर्पण करें।
* पूरे दिन माँ काली को समर्पित भक्ति गीत गाए, पूजा के मुहूर्त के दौरान तो खास।
* स्नान करते समय अपने बालों को भी धोएं आैर आंखों में काजल लगाएं, जिससे कि नकारात्मकता आैर बुरी आत्माएं आपके शरीर से दूर जा सकें।

क्या नहीं करेंः
*चौराहे पर रखे हुए लाल कपड़े से बंधे मटके, फलाें आैर काली गुड़ियां पर पैर रखने या उसे लांघने से विशेषरूप से बचें।
देवी माँ काली अनगिनत चीजों से अपने भक्तों की रक्षा करती है, जो इस प्रकार हैः
* लगातार चलने वाली बीमारियां
* गंभीर बीमारियां
* काले जादू का दुष्प्रभाव
* पैतृक कर्ज
* नौकरी या व्यवसाय में बाधा
* शनि आैर राहु के दुष्प्रभाव
* अनजान लोगों से अपमान

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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