जयापार्वती व्रत की तारीख और समय
| विवरण | तिथि एवं समय |
|---|---|
| गौरी व्रत प्रारंभ | शनिवार, 25 जुलाई, 2026 |
| त्रयोदशी तिथि शुरू | दोपहर 02:00 बजे, 26 जुलाई 2026 |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | शाम 04:34 बजे, 27 जुलाई 2026 |
| जया पार्वती व्रत | सोमवार, 27 जुलाई, 2026 |
| जया पार्वती प्रदोष पूजा मुहूर्त | शाम 07:25 बजे से रात 09:00 बजे तक |
| जया पार्वती व्रत समाप्ति | शनिवार, 1 अगस्त, 2026 |
वर्ष 2026 में जया पार्वती व्रत सोमवार, 27 जुलाई, 2026 से शुरू होकर शनिवार, 1 अगस्त, 2026 तक चलेगा। इस दिन अविवाहित महिलाएं व्रत करती है और अच्छे पति की कामना के साथ माता पार्वती की पूजा करती है। जबकि विवाहित महिलाएं इस व्रत के आखिरी दिन पूरी रात जगती है जो कि जया पार्वती जागरण के रूप में जाना जाता है। इसे गौरी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
ये धार्मिक अनुष्ठान आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होता है जो कि पांच दिन तक चलता है। इस व्रत के दौरान उस तरह का भोजन खाना वर्जित होता है जिसमें नमक होता है।
जया पार्वती व्रत पूजा विधि और महत्व
जया पार्वती व्रत से जुड़ी कथा कुछ इस प्रकार है कि एक ब्राह्मण जोड़ा था। जो कि भगवान शिव का परम भक्त था। उनकी जिंदगी में सब कुछ था लेकिन उनकी कोई संतान नहीं थी। वे हर दिन मंदिर में जाकर पूर्ण निष्ठा और भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा किया करते थे। भगवान शिव इस जोड़े की भक्ति से प्रसन्न थे और एक दिन आकाशवाणी हुई कि मेरा शिवलिंग जंगल में एक निश्चित स्थान पर है। जिसकी कोई भी पूजा नहीं करता। अगर तुम वहां जाते हो और उसकी पूजा करते हो, तो तुम्हारी इच्छा पूरी होगी। ब्राह्मण जोड़ा ये आकाशवाणी सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हुआ। और उसके बाद ब्राह्मण दंपत्ति उस शिवलिंग को ढूंढकर उसकी विधिविधान से पूजा-अर्चना करने लगा। एक दिन ब्राह्मण पूजा के लिए फूल तोड़ने के लिए जंगल में गया। जहां उसे एक सांप ने काट लिया। ब्राह्मण के वापिस ना लाैटने पर उसकी पत्नी को चिंता होने लगी और वो उसे ढूंढने के लिए निकल पड़ी। वो निरंतर अपने पति की सुरक्षा की कामना कर रही थी। भगवान शिव ब्राह्मणी की सच्ची भक्ति को देखकर प्रसन्न हुए और उन्होंने ब्राह्मण को फिर से होश में ला दिया। जिसके बाद ये दोनों फिर से शिवलिंग की पूजा करने लगे और इसके बाद भगवान शिव की कृपा से उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस कथा के अनुसार जो इस व्रत को करता है उसे अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है, साथ ही उसके बच्चे का जीवन सुखमय रहता है।
इस व्रत के दौरान नमक रहित भोजन ग्रहण करना चाहिए। वहीं गेहूं से बने उत्पाद और सब्जियां भी नहीं खा सकते। ऐसा माना जाता है कि जया पार्वती का व्रत परिवार में खुशियां लाता है और इस व्रत को करने से कुंवारी कन्याओ को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।
व्रत के पहले दिन, घर के पूजा-स्थल में एक छोटे कटोरे या गमले में जवारा रखा जाता है। जिसके बाद जवारा के साथ पूजा की जाती है जिसमें नगला यानि नेकलेस रुई से बनाया जाता है और गमले को सिंदूर से सजाया जाता है। हर सुबह समान परंपराएं निभार्इ जाती है और ज्वारा को पानी पिलाया जाता है।
इस व्रत की पूरी पूजा अंतिम दिन माताजी के मंदिर में व्रत तोड़ने पर की जाती है और इस दिन नमक और गेहूं सहित पूर्ण भोजन ग्रहण किया जाता है। व्रत के छठे दिन स्नान करने के बाद गमले में से ज्वारा निकालकर बगीचे में लगा दिया जाता है। इस तरह पूर्ण निष्ठा और भक्ति के साथ जया पार्वती व्रत करने से महिलाओ को अखंड सुहाग और कुंवारी कन्याओ को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। ये व्रत घर-परिवार में खुशियां लेकर आता है।
इसके अलावा गणेशजी आपको निम्नलिखित मंत्र का जाप करने की सलाह देते है। ये आपके जीवन में खुशियां और समृद्घि लाएगा।
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II ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे II
गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
मालव भट्ट
गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम
FAQs
जया पार्वती व्रत 2026 कब से कब तक है?
वर्ष 2026 में जया पार्वती व्रत सोमवार, 27 जुलाई से शुरू होकर शनिवार, 1 अगस्त तक चलेगा।
जया पार्वती व्रत का महत्व क्या है?
जया पार्वती व्रत का महत्व अखंड सुहाग की प्राप्ति और कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति में है। यह व्रत परिवार में खुशियां लाता है।
जया पार्वती व्रत की पूजा विधि क्या है?
व्रत के पहले दिन घर के पूजा-स्थल में जवारा रखा जाता है और हर सुबह उसकी पूजा की जाती है। अंतिम दिन माताजी के मंदिर में व्रत तोड़ा जाता है।
जया पार्वती व्रत के दौरान कौन सा भोजन वर्जित है?
व्रत के दौरान नमक रहित भोजन ग्रहण करना चाहिए और गेहूं से बने उत्पाद और सब्जियां नहीं खानी चाहिए।
जया पार्वती व्रत से जुड़ी कथा क्या है?
कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण जोड़ा भगवान शिव की भक्ति करता था और संतान की कामना करता था। शिव की कृपा से उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद मिला।
