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जया पार्वती व्रतः जानें कथा, पूजा विधि आैर महत्व के बारे में

जया पार्वती व्रतः जानें कथा, पूजा विधि आैर महत्व के बारे में

वर्ष 2023 में जया पार्वती व्रत 1 जुलाई से शुरू होकर 6 जुलाई तक चलेगा। इस दिन अविवाहित महिलाएं व्रत करती है आैर अच्छे पति की कामना के साथ माता पार्वती की पूजा करती है। जबकि विवाहित महिलाएं इस व्रत के आखिरी दिन पूरी रात जगती है जो कि जया पार्वती जागरण के रूप में जाना जाता है। इसे गौरी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

ये धार्मिक अनुष्ठान आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होता है जो कि पांच दिन तक चलता है। इस व्रत के दौरान उस तरह का भोजन खाना वर्जित होता है जिसमें नमक होता है।

जया पार्वती व्रत से जुड़ी कथा कुछ इस प्रकार है कि एक ब्राह्मण जोड़ा था। जो कि भगवान शिव का परम भक्त था। उनकी जिंदगी में सब कुछ था लेकिन उनकी कोर्इ संतान नहीं थी। वे हर दिन मंदिर में जाकर पूर्ण निष्ठा आैर भक्ति के साथ भगवान शिव की पूजा किया करते थे। भगवान शिव इस जोड़े की भक्ति से प्रसन्न थे आैर एक दिन आकाशवाणी हुर्इ कि मेरा शिवलिंग जंगल में एक निश्चित स्थान पर है। जिसकी कोर्इ भी पूजा नहीं करता। अगर तुम वहां जाते हो आैर उसकी पूजा करते हो, तो तुम्हारी इच्छा पूरी होगी। ब्राह्मण जोड़ा ये आकाशवाणी सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हुआ। आैर उसके बाद ब्राह्मण दंपत्ति उस शिवलिंग को ढूंढकर उसकी विधिविधान से पूजा-अर्चना करने लगा। एक दिन ब्राह्मण पूजा के लिए फूल तोड़ने के लिए जंगल में गया। जहां उसे एक सांप ने काट लिया। ब्राह्मण के वापिस ना लाैटने पर उसकी पत्नी को चिंता होने लगी आैर वो उसे ढूंढने के लिए निकल पड़ी। वो निरंतर अपने पति की सुरक्षा की कामना कर रही थी। भगवान शिव ब्राह्मणी की सच्ची भक्ति को देखकर प्रसन्न हुए आैर उन्होंने ब्राह्मण को फिर से होश में ला दिया। जिसके बाद ये दोनों फिर से शिवलिंग की पूजा करने लगे आैर इसके बाद भगवान शिव की कृपा से उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस कथा के अनुसार जो इस व्रत को करता है उसे अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है, साथ ही उसके बच्चे का जीवन सुखमय रहता है।

इस व्रत के दौरान नमक रहित भोजन ग्रहण करना चाहिए। वहीं गेहूं से बने उत्पाद आैर सब्जियां भी नहीं खा सकते। एेसा माना जाता है कि जया पार्वती का व्रत परिवार में खुशियां लाता है आैर इस व्रत को करने से कुंवारी कन्याआें को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।

व्रत के पहले दिन, घर के पूजा-स्थल में एक छोटे कटोरे या गमले में जवारा रखा जाता है। जिसके बाद जवारा के साथ पूजा की जाती है जिसमें नगला यानि नेकलेस रूर्इ से बनाया जाता है आैर गमले को सिंदूर से सजाया जाता है। हर सुबह समान परंपराएं निभार्इ जाती है आैर ज्वारा को पानी पिलाया जाता है।

इस व्रत की पूरी पूजा अंतिम दिन माताजी के मंदिर में व्रत तोड़ने पर की जाती है आैर इस दिन नमक आैर गेहूं सहित पूर्ण भोजन ग्रहण किया जाता है। व्रत के छठे दिन स्नान करने के बाद गमले में से ज्वारा निकालकर बगीचे में लगा दिया जाता है। इस तरह पूर्ण निष्ठा आैर भक्ति के साथ जया पार्वती व्रत करने से महिलाआें को अखंड सुहाग आैर कुंवारी कन्याआें को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। ये व्रत घर-परिवार में खुशियां लेकर आता है।

इसके अलावा गणेशजी आपको निम्नलिखित मंत्र का जाप करने की सलाह देते है। ये आपके जीवन में खुशियां आैर समृद्घि लाएगा।

II ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे II

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
मालव भट्ट
गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम