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वर्ष 2017 में भारत को नर्इ पहचान मिलेगी

वर्ष 2017 में भारत को नर्इ पहचान मिलेगी

चीन को टक्कर देगा भारत
जबसे नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार दो साल पहले सत्ता में आर्इ, तब से सकारात्मक शासन उपायों आैर मजबूत व्यापार के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय नीतियों को ना केवल भारत के आर्थिक विशेषज्ञों ने बल्कि विभिन्न देशों के लोगों ने भी स्वीकार किया है। सबसे अधिक वृद्घि दर हासिल करने की दौड़ में, अब भारत भी मजबूती से अपने पड़ौसी देश चीन काे चुनौती दे रहा है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 7.7% विकास दर हासिल कर सकता है, बैंकिग सेक्टर के अग्रणी संगठनों डोएचे बैंक आैर एशियन डवलपमेंट बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बल्कि भारत 7.8% का जादुर्इ आंकड़ा छू सकता है।

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना एक कठिन काम होगा
निर्बल ढांचागत सुविधाएं, कम साक्षरता स्तर, उच्च राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति, स्माॅल-कैप निवेशकों के मन में मंदी का डर, प्राइवेट सेक्टर के कर्ज स्तर में वृद्घि, कृषि उत्पादन आैर वर्षा की अनियमितता जैसे प्रमुख क्षेत्र चिंता का कारण है। इससे अधिक विभिन्न बैंकों के अनुपयुक्त लोन आैर विदेशों में जमा कालाधन भी भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे रहे है। इस तरह की स्थितियों के बीच, अर्थव्यवस्था के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण आरबीआर्इ के गवर्नर रघुराम राजन सेवानिवृत हो चुके है आैर 5 सितंबर, 2016 से उर्जित पटेल इस शीर्ष स्थान को संभाल रहे है। उर्जित की राह की सबसे बड़ी चुनौती है, बैंकों की ब्याज दरों पर नियंत्रण करना। इस तरह मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखना आैर बैंक ब्याज दरों को कम करना नए आरबीआर्इ चीफ के लिए कठिन काम होगा।

अर्थव्यवस्था की गिरावट को रोकने के लिए दुनिया की उम्मीदें भारत से
वैश्विक वित्तीय मंदी जो वर्ष 2008 से शुरू हुर्इ आैर हाल ही के ब्रेक्जिट अध्याय ने भी भारत पर प्रभाव ड़ाला था, इस घटना ने आर्थिक क्षेत्र के दिग्गजों पर भी प्रभाव ड़ाला है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार की बात करें, तो लगभग 800 भारतीय कंपनियों का व्यापार यूरोप में फैला है। ट्रेड आैर बिजनेस के इस चित्रण को ध्यान में रखते हुए ये बात स्पष्ट होती है कि भारत का यूरोप में प्रमुख हिस्सा है। लेकिन स्थानीय बाजार की स्थिरता के कारण, बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव उसके तुलनात्मक काफी कम है जिस खतरे की शुरूआत में उम्मीद की जा रही थी। इसके साथ ही, यूएसए की विकास दर में भारी गिरावट के कारण, अंतर्राष्ट्रीय बाजार ने भारत की आेर अपनी निगाहें घुमा दी है। तो क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा आैर वाकर्इ में दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा ? आइए इस बारे में विस्तार से जानते है।

स्वतंत्र भारत की स्थापना कुंडली
दिनांकः 15 अगस्त, 1947
समय: 00:00:00
स्थानः दिल्ली, भारत

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भारत का बड़ा सपना हासिल करने के लिए युवाआें को आगे लाने की जरूरत
भारत की स्थापना कुंडली में, वृषभ उदित राशि है, जो देश की महान स्थिरता, अति सहिष्णुता, निहित आंतरिक शक्ति आैर साहस को दर्शाता है। राहु के लग्न में उपस्थित होने के कारण, भ्रष्टाचार अनियंत्रित रूप से देश में फैल रहा है। राहु दोहरे मापदंड ‘अनैतिकता आैर अराजकता’, ‘स्वार्थ एवं दंभ’ को द्योतित करता है। वहीं दूसरी आेर, केतु सातवें भाव में विराजमान है, इस कारण, भारत के पड़ोसी देशों से संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहते है। तीसरे भाव में पांच ग्रहों का विन्यास बहुत सारे अद्भुत संयोजन आैर योग बनाता है, जो भारत की आश्चर्यजनक विकास कहानी को दर्शाता है। वास्तविकता में, तीसरे भाव में ग्रहों का ये समूह भारत को आवश्यक प्रेरणा प्रदान करता है आैर बेहतर मील का पत्थर साबित होने के लिए प्रेरित करता है। लेकिन, साथ ही ये भी दर्शाता है कि जब तक भारत के लोग प्रेरित या बल्कि अपमानित नहीं होंगे, वे ना जागेंगे या उठेंगे नहीं। अगर हम गोचर के ग्रहों की बात करें , तो भारत की स्थापना कुंडली के अनुसार वर्ष की शुरूआत में,17 अगस्त, 2017 तक दूषित राहु चौथे भाव से होकर सिंह की राशि में गोचर करेगा। उपरोक्त तारीख के बाद ये तीसरे भाव से गोचर करेगा। 17 अगस्त, 2017, भाग्य के नौवें स्थान में भ्रमण करेगा।

पड़ोसी देशों के साथ तनाव उबाल जारी रखेगा
राहु के चौथे भाव से पारगमन होने के कारण, सरकार योजना अायोग, कृषि विकास, जल संसाधन, शहरी विकास आैर उर्वरक उद्योगों पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर सकता है। ये इन क्षेत्रों की मदद से देश मेें विकास की गति बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। वर्ष के अंतिम भाग में, राहु के तीसरे भाव से पारगमन के कारण, पड़ौसी देशों के साथ तनाव बढ़ सकता है आैर ये भी एक युद्घ जैसे हालात पैदा कर सकता है। भारत की स्थापना कुंडली में जिस तरह पांच ग्रह तीसरे भाव में है, एेसे में राहु का तीसरे भाव से गोचर अधिक मुश्किलें आैर तनाव बढ़ा सकता है।

शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद
शुभ ग्रहों की बात करें, तो वर्ष के पूर्व भाग में, गुरू कन्या राशि से गोचर करेगा आैर 12 सितंबर, 2017 तक इसमें रहेगा, इसके बाद ये तुला राशि में प्रवेश करेगा। भारत की स्थापना कुंडली में गुरू का पांचवें भाव से पारगमन, अधिक अस्थिरता आैर अनिश्चितता पैदा कर सकता है। आर्थिक दृष्टिकोण से, भारत की अर्थव्यवस्था में शेयर बाजार का एक प्रमुख हिस्सा आैर महत्वपूर्ण भूमिका है। इस चरण में, एफआर्इआर्इएस आैर म्यूचल फंडों के निवेश में वृद्घि हो सकती है। लेकिन, इसके लिए सावधानी बरतनी होगी, क्यूंकि अन्य ग्रहों का रोल, खासतौर से राहु आैर तीसरे भाव पर पड़ने वाला उसके प्रभाव के कारण, एफ एंड आे के लिए समय अनुकूल नहीं है। इस स्थिति में, बेस रेट बढ़ सकती है आैर शिक्षा के क्षेत्र में आकस्मिक बदलाव हो सकते है। इसकी भी संभावना है कि विश्वविद्यालयों में उच्च स्वायत्तता दी जाएगी। 12 सितंबर, 2017 को गुरू अपनी राशि बदलेगा आैर छठें भाव में पारगमन करेगा। एेसे में, इसके बाद मेडिकल आैर सिविल सर्विसेज के लिए समय अनुकूल रहेगा आैर हम कुछ सकारात्मक बदलाव देख सकते है।

समग्र तस्वीर अपने रूप से कम उज्जवल होगी
वर्ष के शुरूआत में, शनि सातवें भाव से पारगमन करेगा, जो अपनी राशि से पहले महीने के अंतिम सप्ताह यानि 26 जनवरी, 2017 को अपनी राशि बदलेगा अौर आठवें भाव में प्रवेश करेगा। धनु राशि के आठवें भाव में 27 जनवरी, 2017, से 20 जून, 2017 तक रहने के बाद, शनि प्रतिगामी होगा आैर 21जून, 2017 से 26 अक्टूबर, 2017 तक वृश्चिक राशि से गोचर करेगा आैर इसके बाद पुनः धनु राशि में प्रवेश करेगा। इस पूरे वर्ष में, शनि राशियां बदलेगा आैर प्रत्यक्ष प्रतिगामी आैर सीधी गति देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगी। इस पारगमन के दौरान, पड़ोसी देशों से जुड़े मामलों, विदेशी मामलों, अप्रवासी भारतीय, खनन आैर कोयला मंत्रालय, पेट्रोलियम उत्पादन, गैस आैर थर्मल ऊर्जा, स्टील आैर इस प्रकार के अन्य क्षेत्रों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्णय प्रभावित हो सकते है। प्रतिगामी शनि का जन्म के केतु के ऊपर पारगमन वित्तीय साझेदारी आैर डील में विलंब आैर बाधाआें का कारण हो सकता है। साथ ही, हाल ही में जिन समझौताें पर हस्ताक्षर किए गए है वो अनुकूल साबित नहीं होंगे, वे काल्पनिक नजर आ सकते है।

कुल मिलाकर, उदार गुरू के प्रभाव से देश की अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन राहु के नकारात्मक प्रभाव के कारण, भारत को युद्घ जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, एेसे में इसके लिए उसे पूरी तरह से तैयार रहना होगा। इस तरह के हालातों में, मूर्त निवेश में निवेश करने आैर अमूर्त यानि चल-अचल संपत्तियों ( जिसमें सिर्फ कागज पर अनुबंध हो) में निवेश से बचने की सलाह दी जाती है

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम

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