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गणेशजी की सलाह से शनि दोष से मुक्ति पाये
शनि ग्रह को शनिश्चर भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है धीमी गति से चलनेवाला। शनि दुख, मृत्यु, अनुशासन, प्रतिबंध, अवरोध, देरी और मानवता का प्रतीक है। शनि को एक दुष्ट ग्रह के रूप में जाना जाता है और यह दो राशियों, मकर और कुंभ का स्वामी है। शनि तुला में उच्च का और मेष राशि में नीच का होता है।

जन्म कुंडली में शनि दोष तब उभरता है जब शनि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक राशि के 1, 4,7,10, 8 और 12 वें घर में हो या तुला, मकर और कुंभ राशि को छोड़कर इन घरों में उल्टा वक्रीय हो या किसी अन्य ग्रह के साथ हो।यद्यपि संबंधों में इसका प्रभाव तब दिखता है जब शनि 1, 7 या 12 वे घर में रहे। शनि ग्रह धीरे चलता है और प्रत्येक राशि में ढ़ाई साल रहता है। इस तरह से 12 राशियों का एक चक्र 30 साल में पूरा करता है। शनि को मृत्यु का देवता यम का बड़ा भाई माना जाता हैं और इन्हें न्याय का ग्रह कहा जाता है। शनि उचित दंड और पुरस्कार के माध्यम से कर्मों का फल देता है। यदि शनि 1 या 7 वें घर में है तो यह गंभीर बाधा, असफल रिश्ते और विवाह में देरी की ओर संकेत करता है, विशेष रूप से तब जब वह सीधे तौर पर 7 वें घर पर दृष्टि ड़ाल रहा हो। 7 वां घर विवाहित जीवन साथी, वैवाहिक जीवन और भागीदारी का प्रतीक है।

शनि मंदा ग्रह है और या विच्छेद -अलगाव का ग्रह है। विवाह जल्दी या देरी से होता है, व्यक्ति अक्सर अपने से बड़ी उम्र के लोगों की ओर आकर्षित होता है। शनि न्यायाधीश है और आपके अतीत के कर्मों का फल तय करता है। इसलिए बुरा प्रभाव कुंडली में शनि की स्थिति के कारण नहीं बल्कि कर्मों के कारण मिलता है। अर्थात यदि किसी व्यक्ति को शनि दोष है, तो उसे खराब परिणाम और कठोर दंड से गुजरना है।

शनि दोष को दूर करने के उपायः

मंत्र का जाप करें
नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्

प्रत्येक शनिवार को हनुमानजी के मंदिर के सामने बैठे भिखारियों को भोजन कराएं। शनिवार को 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

शनिवार को सुन्दर कांड का पाठ करें।
शनि कवच का पाठ करें और शनि दोष से छुटकारा पाएं।
वृद्धाश्रमों में और निर्धनों एवं ज़रूरतमंदों की मदद करें, दान दें।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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