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Shiv Rudrabhishek 2021: शिव का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानिए सामग्री समय और मंत्र

Shiv Rudrabhishek 2021: शिव का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानिए सामग्री समय और मंत्र

भगवान शिव की छवि निराली है। शिव वैरागी है फिर भी स्त्रियां शिव सा पति पाने की मनोकामनाएं करती है। एक पल में शिव भोले है जो कैलाश पर बैठे अपने ध्यान में विलीन है और दूजे ही पल शिव रौद्र रूप धर कर महांकाल बन जाते हैं। शिव का सामान्य स्वरूप भी अद्भुत है, जिसमें वे भस्म से सने शरीर के साथ, गले में सर्प और सिर पर अर्धचंद्र को धारण किये हुए बाघ की खाल पर विराजमान है। जिनकी जटाओं में सौम्य गंगा है और हाथ में संहारक त्रिशूल। और एक हाथ में डमरू जो बजे त समस्त संसार नाच उठे और मस्तक पर तीसरी आंख जो खुल जाए तो सृष्टि को नष्ट कर दें। भगवान शिव के 108 नाम है और हर नाम का अलग अर्थ और अलग कारण है।

शिव सृष्टि के चालक भी है और कारक भी। शिव सर्वव्यापी है और हर मनुष्य की चेतना का अभिन्न अंग है। शिव वह तत्व है जिसके स्मरण मात्र से मन आनंद से परिपूर्ण हो जाता है। शिव भक्तों के सबसे प्रिय है और उन्हें मनाने के लिए पूरी श्रद्धा से एक लोटे जल से उनका अभिषेक ही काफी होता है। चलिए जानते हैं शिव की महिमा और उनकी कृपा पाने के कुछ अन्य उपाय

रूद्राभिषेक एक प्राचीन मंत्र है, जिसका जाप करने से आकाशीय ध्वनि उत्पन्न होती है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि ध्यान करते समय इस मंत्र का जाप करते थे और इसके लाभ को लोगों तक पहुंचाते थे।
रूद्राभिषेक के प्रभाव से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। रुद्राभिषेक से प्रकृति को भी बहुत लाभ पहुंचाता है। सावन मास में जब अधिकांश शिव भक्त रुद्राभिषेक करते हैं तो प्रकृति हरित- हर्षित हो उठती है। मंत्रोच्चार करते समय हम भले ही हर मंत्र का अर्थ न जानते हो, लेकिन इसके उच्चारण से उत्पन्न हुआ कंपन हमारे मन और आसपास के वातावरण को शुद्ध करके असीम ऊर्जा से भर देता है। रुद्राभिषेक करते समस्य भी आपको ऐसी ही ऊर्जा और सुरक्षा का आभास होता है। रुद्राभिषेक करने से कई लाभ होते हैं, जिनमें शिव का आशीर्वाद सबसे महत्वपूर्ण है। रुद्राभिषेक करने के लिए किसी उद्देश्य या संकल्प की जरूरत नहीं होती। फिर भी इसे करने से घर में हो रही समस्या, मनचाहा जीवनसाथी, जमीन-जायदाद, शत्रूओं पर विजय सहित अन्य कई प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकते हैं। रुद्राभिषेक के और फलों को जानने के लिए नीचे पढ़ें .……

रुद्राभिषेक के लाभ

1. यह परिवार में धन और सद्भाव लाता है।
2. नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और बुरे विचारों को हटाकर मन को शुद्ध करता है।
3. तमाम बुराइयों से बचाता है और मुश्किलों से निपटने की शक्ति देता है।
4. यह किसी की कुंडली में विभिन्न ग्रह दोष जैसे राहु दोष, श्रापित दोष आदि के बुरे प्रभावों को खत्म करता है।

रुद्राभिषेक के प्रकार (rudrabhishek ke prakar)

शिवलिंग पर जल चढ़ाना को अभिषेक कहा जाता है। वेद मंत्रों के जाप के साथ शिवलिंग पर निरंतर जल चढ़ाने की विधि ही रुद्राभिषेक कहलाती है। रुद्राभिषेक के कई प्रकार होते हैं। आइए रुद्राभिषेक के प्रकारों के बारे में विस्तार से जानें।

रुद्राभिषेक – जल

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जलअभिषेक से भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ ही हर मनोकामना की पूर्ति होती हैं।

रुद्राभिषेक – दूध

दूध से भगवान शिव का अभिषेक करने से व्यक्ति को दीर्घायु प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक – शहद

शहद से शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्त को अपना जीवन पूर्ण आनंद और स्वतंत्रता के साथ जीने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव का शहद से अभिषेक करने से जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

रुद्राभिषेक -पंचामृत

पंचामृत में 5 अलग-अलग पदार्थ जैसे दूध, दही, मिश्री, शहद और घी को एक साथ मिलाया जाता है। ये 5 पदार्थ मिलकर पंचामृत बनाते हैं। पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करने पर भक्त को धन और सफलता प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक – घी

घी से रुद्राभिषेक करने पर आपको बीमारी या शारीरिक समस्याओं से मुक्ति व स्फूर्ति मिलती है।

रुद्राभिषेक – दही

दही से रुद्राभिषेक उन लोगों के लिए उपयोगी होता है, जो संतानप्राप्ति ​की चाह रखते हैं।

रुद्राभिषेक कैसे करें (rudrabhishek kaise karen)

रुद्राभिषेक की पूजा विधि की बात करें, तो जीवन की तमाम जद्दोजहद के चलते हमारे पास समय की बहुत कमी होने लगी है। ऐसे में यदि आप भी रुद्राभिषेक करना या किसी के नाम से करवाना चाहते हैं, तो इसका सबसे अच्छा उपाय है, ऑनलाइन रुद्राभिषेक पूजा! हमारे साथ आज ही बुक करें।

इसके विपरीत यदि आप खुद रुद्राभिषेक पूजा करना चाहते हैं, तो शिवलिंग का पहले वैदिक मंत्र रुद्र सूक्तम के निरंतर जाप के साथ जल से अभिषेक करें, जिसे शिव रुद्राभिषेक मंत्र के रूप में जाना जाता है। गाय का दूध, नारियल पानी, चावल, पिसी चीनी, घी, दही, शहद, गन्ने का रस आदि अन्य वस्तुओं को एक साथ मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। वैदिक रीति के अनुसार रुद्राभिषेक करते समय प्रातः लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है। इसके बाद रुद्राभिषेक मंत्र का जाप करते हुए उपरोक्त वस्तुओं का प्रयोग कर पूरे दिन शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। बाद में, शिवलिंग को सजाने के लिए विशेष रूप से कमल के फूलों का उपयोग किया जाता है और फूलों के अलावा, बिल्व पत्र को भी सजावट के लिए उपयोग किया जाता है। इन सभी अनुष्ठानों के बाद, अंत में 108 दीप प्रज्वलित करके आरती की जाती है और पूजा में शामिल होने वाले भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है।

रुद्राभिषेक की सामग्री (rudrabhishek ki samagri)

आइए रुद्राभिषेक में उपयोग होने वाली सामग्री के बारे में जानें।
हल्दी पाउडर – 1 पैकेट
कुमकुम – 1 पैकेट
कपूर -1 पैकेट
चंदन पेस्ट -1 पैकेट
एक पैकेट धूप
2 फूल माला
25 बेताल नट या पत्तियां
4 फूलों के गुच्छा
10 नारियल
12 केले या 5 अन्य प्रकार के फल
तौलिया या 2 गज कपड़ा
2 माला
शहद – 1 छोटी बोतल
2 कप दही
2 लीटर दूध

रुद्राभिषेक कब करें (rudrabhishek kab karen)

हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए किसी भी कार्यों के सिद्ध होने की संभावना अधिक होती है। चलिए जानते हैं शिव का रुद्राभिषेक करने की सबसे अच्छी तिथि कब होती है।
– रुद्राभिषेक करने से पहले आपको शिवजी की उपस्थिति देखना चाहिए।
– शिवजी का निवास देखे बिना रुद्राभिषेक न करें।
– शिवजी का निवास तभी देखें जब मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक किया जा रहा हो।
– हर महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी तिथि को भगवान शिव मां गौरी के साथ रहते हैं।
– हर माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या के दिन भी भगवान शिव मां गौरी के साथ रहते हैं।
– कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और एकादशी को महादेव कैलाश पर निवास करते हैं।
– शुक्ल पक्ष की पंचमी और द्वादशी तिथि को महादेव कैलाश पर ही रहते हैं।
– कृष्ण पक्ष की पंचमी और द्वादशी को शिवजी नंदी पर सवार होकर पूरा विश्व भ्रमण करते हैं।
– शुक्ल पक्ष की षष्ठी को भी शिव जी विश्व भ्रमण पर होते हैं।
– रुद्राभिषेक के लिए इन तिथियों में महादेव का निवास मंगलकारी होता है।

रुद्राभिषेक से ग्रह दोष निवारण (rudrabhishek se grah dosh nivaran)

भगवान शिव के नाम का जाप करने से ही नवग्रह दोष निवारण हो जाता है। किसी ज्योतिषी विशेषज्ञ की सलाह से अपनी कुंडली के अनुसार और राशि को देखते हुए ग्रह दोष निवारण पूजा बेहद कारगर और फल दायक मानी जाती है। आज ही अपनी कुंडली के ग्रहदोषों से छुटकारा पाने और सुखी जीवन जीने के लिए ऑनलाइन पूजा बुक करें।

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– कुंडली में सूर्य दोष की स्थिति में शिवरात्रि के दिन शिवजी का किसी पवित्र नदी के जल से अभिषेक करें।
– चंद्र दोष की स्थिति में शिवरात्रि के दिन कच्चे दूध में काले तिल डालकर भगवान का दुग्धाभिषेक करें।
– मंगल दोष की स्थिति में गिलोय बूटी के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें।
– बुध दोष होने पर आपको शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर दही और मिश्री अर्पित करनी चाहिए।
– गुरू की स्थिति में कच्चे दूध में हल्दी मिलाकर भगवान का दुग्धाभिषेक करें।
– शुक्र दोष होने पर पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें।
– शनि दोष की स्थिति में शिवरात्रि पर भगवान शिव का गन्ने के रस से अभिषेक करें।

रुद्राभिषेक के मंत्र (rudrabhishek ke mantra)

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सबसे प्रभावी पूजा अनुष्ठानों में से एक है। रुद्राभिषेक के दौरान शिवलिंग का पवित्र जल, दूध, रस, दही, शहद या पंचामृत जैसे पदार्थों से अभिषेक किया जाता है। जब शिवलिंग का अभिषेक किया जा रहा होता है तब मंत्रों का उच्च स्वर में जाप किया जाता है। शिवलिंग का अभिषेक करने के साथ ही साथ इन मंत्रों का जाप वातावरण में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मकताओं को नष्ट कर सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करता है। आइए रुद्राभिषेक के दौरान पढ़े जाने वाले कुछ मंत्रों के बारे में जानें।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इसके अलावा शिव पंचाक्षर स्तोत्र के जरिए भी आप भगवान शिव का विशेष अभिषेक कर सकते हैं। रुद्राष्टक पाठ के अलावा कई विशेष वैदिक मंत्रों के साथ भी रुद्राभिषेक पूरा किया जाता है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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