influence love affairs: प्रेम संबंध में 5वें और 7वें भाव की भूमिका क्या होती है?
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प्रेम संबंध में 5वें और 7वें भाव की भूमिका

Published on जनवरी 21, 2021

influence love affairs: प्रेम संबंध में 5वें और 7वें भाव की भूमिका क्या होती है?

जीवन में सभी चाहते हैं की उनका जीवनसाथी या पार्टनर प्रेम करने वाला हो। एक वैवाहिक जीवन में पति – पत्नी के बीच जितना अधिक प्रेम होगा, उनकी जीवन रुपी नैया उतनी ही अच्छे से चलेगी। तो क्या ज्योतिष का संबंध प्रेम से है? जी हाँ, ज्योतिष में ऐसे कई कारक है जो रोमांटिक प्रेम संबंधों में अहम भूमिका (influence love affairs) निभाते हैं। जैसा कि हम सभी जानते हैं, हमारी कुंडली में 12 भाव होते हैं। इन भावों में से 5वां भाव प्रेम और रोमांस से संबंधित है। इस 5वें भाव में ग्रहों के अनुकूल संयोजन से प्रेम संबंध का परिणाम मिलता है। इसके अलावा, कुंडली में 7वां भाव विवाह और उसके कल्याण से जुड़ा हुआ है। 7वें भाव में ग्रहों की दशा आपके वैवाहिक जीवन पर कैसा प्रभाव डालेगी, इस संबंध में हम पहले ही अपने लेख में बता चुके हैं। लेख देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदाहरण – यदि सप्तम भाव का स्वामी अपने ही भाव में गोचर कर रहा है या स्थित है तो आपका वैवाहिक जीवन फलदायी होगा। सप्तम भाव में स्थित शुभ ग्रह प्राकृतिक तौर पर भी शुभ फल देते हैं।

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प्रेम संबंधों में योग (influence love affairs)

  • कुंडली में पंचम भाव भावनाओं से और सप्तम भाव विवाह से संबंधित होता है। यदि 5वें और 7वें भाव के स्वामी के बीच संबंध है, तो व्यक्ति जीवनसाथी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ता है। इस लेख में हम कुछ उदाहरण बता रहे हैं, जिन योगों के बनने से दो व्यक्तियों के बीच प्रेम संबंध या भावनात्मक बंधन होते हैं।
  • पंचम भाव के स्वामी और सप्तम भाव के स्वामी जब अपने भावों का एक दूसरे से आदान-प्रदान करते हैं, तो इसका परिणाम प्रेम संबंध हो सकता है।
  • 5वें और 7वें भाव के स्वामी एक दूसरे पर दृष्टि डाल रहे हों तो यह प्रेम संबंध को जन्म देता है।
  • यदि शनि अकेले पंचम भाव में स्थित हो तो यह पांचवें और सातवें भाव के बीच अपनी तीसरी दृष्टि से संबंध बनाता है। जिसके फलस्वरूप नाजायज संबंध बनते हैं।

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  • गुरु जोकि पंचम भाव के स्वामी हैं यदि वह 5वें भाव में स्थित होते हुए सप्तम भाव को या फिर सप्तम में होते हुए पंचम भाव को देख रहे हैं तो प्रेम संबंध हो सकता है।
  • जिसकी चाहत सब करते हैं, ऐसा जीवनसाथी तब मिलता है जब बृहस्पति ग्रह सप्तम भाव में होता है।
  • यदि सप्तम भाव का स्वामी सप्तम भाव में होता है तो व्यक्ति आकर्षक और आकर्षित करने वाले व्यक्तित्व का होता है।
  • इस लेख से आप समझ गए होंगे कि 5 वां और 7 वां भाव प्रेम संबंध के ज्योतिषीय परिणाम को कैसे प्रभावित करता है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में कोई समस्या है तो उसका उपचारात्मक समाधान पाने के लिए अभी हमारे ज्योतिषीय शाखा में संपर्क करें और अपना विवाह रिपोर्ट प्राप्त करें।

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गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम

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