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गणेशा कहतें हैं कि भारत के लिए एक मुश्किल समय की ओर इशारा कर रही है ग्रहों की दशा

गणेशा कहतें हैं कि भारत के लिए एक मुश्किल समय की ओर इशारा कर रही है ग्रहों की दशा

गणेशा कहतें हैं कि भारत के लिए एक मुश्किल समय की ओर इशारा कर रही है ग्रहों की दशा

१५ अगस्त २०१३ को भारत अपना ६७ वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। वर्तमान आर्थिक परिस्थिति, सीमा पर तनाव, राजनीतिक खलबल, अगले ही वर्ष होने वाले लोक सभा चुनाव, इन सब से निपटते भारतवासियों को आने वाले साल में क्या क्या देखने को मिलेगा? स्वतंत्र भारत की कुंडली देख कर गणेश जी यह बताने की कोशिश कर रहें हैं।

भारत की कुंडली

भारत इस समय सूर्य की महादशा और बुध की भुक्ति के प्रभाव से गुज़र रहा है। सूर्य चौथे घर (आंतरिक मामलों का घर) का मालिक है, और बुध दूसरे घर (आर्थिक संसाधनों का घर) का मालिक है। मंगल बुध द्वारा शासित दोनों राशियों को दूषित करता है।

  • मीन राशि के २०१३ के ‘न्यू मून चार्ट’ में लग्न का मालिक सूर्य चंद्र, मंगल, शुक्र और बुध के साथ विपत्ति और विनाश के ८ वें घर में स्थित है। ८ वें घर के मालिक और १० वें घर के मालिक के बीच का परिवर्तन भी महत्त्वपूर्ण है। शनि और राहु की युति २०१३ के ‘सोलर रिटर्न चार्ट’ के ८ वें घर में हो रही है।
  • १७ सितंबर २०१३ को शनि की अंशात्मक युति हो रही है राहु के साथ। नीच के मंगल की दृष्टि शनि पर है और शनि की दृष्टि मंगल पर।
  • आने वाले समय में होने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण भारत पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे।

भविष्यवाणी
ग्रहों की दशा भारत के लिए एक मुश्किल समय की ओर इशारा कर रही है। लोगों में भ्रम की स्थिति ना ही बनी रहेगी पर बढेगी भी। असंतोष की भावना हर तरफ़ नज़र आएगी। ज़रूरी चीज़ों के भाव बढते ही जाएंगे और महंगाई की यह समस्या देश के अधिकतम लोगों के लिए चिंता का विषय बन जाएगी। आम आदमी पैसों की व्यवस्था, घर के खर्चे, और परिवार का भविष्य सुरक्षित कैसे करें इसी सोच में डूबा रहेगा। स्वास्थ्य, शिक्षण, पोषण, बाल व नवजात मृत्यु, आपदा प्रबंधन, संक्रामक बिमारियों की रोकथाम, ऐसे कई मुद्दों को ले कर भारतवासी बहुत ही बेचैन और असुरक्षित महसूस करेंगे। वर्तमान आर्थिक स्थिति अमीरों और गरीबों के बीच की दूरी को और भी बढा देगी। युवक और विद्यार्थी विद्रोह कर सकतें हैं। सोशल मीडीया और कम्यूनिकेशन टेक्नोलोजी इस विद्रोह में मुख्य भूमिका निभाएंगे। भारतीय न्यायव्यवस्था की भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण होगी और उन के कुछ निर्णय एक गहरा छाप छोड जाएंगे।

राजकारण की बात करें तो वर्ष २०१३ के आखिरी ४ महीने बहुत ही घटनापूर्ण साबित होंगे। सत्ताधारी मिली जुली सरकार के सामने कई चुनौतियां आएंगी। इसी दौरान कुछ सहयोगी पार्टीयां अपना सहयोग पीछे भी ले सकतीं हैं। इस निराशायुक्त वातावरण और चुनौतियों के चलते सरकार को समय से पहले ही चुनाव की घोषणा करनी पड सकती है। आतंकवादी हमलों की संभावना का इनकार नही किया जा सकता, खास कर २०१३ के आखिरी ४ महीनों में। नैसर्गिक आपत्ति, हिंसा, और बीमारियां फ़ैलने की शक्याता भी आने वाले साल में है।

इस के अलावा, पडोसी देशों से लगी सीमारेषा पर तनाव बढ सकता है, आंदोलनों की और कुछ संघर्ष की भी संभावना है। इस साल भारत-पाकिस्तान के बीच सालों से चलता कश्मीर का मुद्दा बार बार सर ऊपर करेगा। चीन के साथ भी कश्नीर को लेकर सीमा पर तनाव बढ सकता है और यह हमारे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। जम्मू और कश्मीर और उस के आस-पास के राज्यों में नैसर्गिक आपत्ति आने की संभावना है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह साल भारत के लिए निराशा से भरा साबित हो सकता है।

गणेशा की कृपा से,
तन्मय ठाकर
गणेशास्पिक्स टीम

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