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यूरेनस का अन्य ग्रहों के साथ संबंध

जानें रहस्यमयी है यूरेनस (Uranus) के अन्य ग्रहों के साथ संबंध का क्या होगा आप पर प्रभाव?

सौर मंडल का सातवां ग्रह यूरेनस बुद्धि का प्रतीक है और अनुसंधान कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां, हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि यूरेनस अर्थात अरूण ग्रह के अन्य ग्रहों के साथ संबंध होने पर क्या प्रभाव हो सकते हैं।

अन्य ग्रहों के साथ यूरेनस का प्रभाव ग्रहों के साथ यूरेनस अर्थात अरूण के संबंधों या प्रभावों का विश्लेषण करने से पहले हमें ज्योतिष में यूरेनस की स्थिति दर्शाने वाली छह डिग्रियों को जानना होगा।

  1. ट्राइन या नवपंचम
  2. सेक्सटाइल या लाभयोग
  3. कन्जक्शन या युतियोग
  4. अपोजिट या प्रतियोग
  5. स्क्वेयर या केंद्रयोग
  6. सेस्क्वीक्वाड्रेट या षडाष्टक योग

इनमें से पहले दो संबंध यानी, ट्राइन और सेक्सटाइल सबसे अधिक सकारात्मक परिणाम देते हैं। वहीं अंतिम दो योग केंद्रयोग और षडाष्टक योग नकारात्मक परिणाम देते हैं, और शेष दो सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम देते हैं। सबसे पहले हम यूरेनस के सकारात्मक परिणाम जानने की कोशिश करेंगे।

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सूर्य – सामाजिक जीवन में नेतृत्व की क्षमता देने के साथ ही जीवन में बहुत सारे अवसर देने का कार्य करता है। यह योग किसी ज्योतिषाचार्य के लिए भी अच्छा है। यदि यह योग स्त्री की कुंडली में है तो यह पति के लिए लाभदायक होगा।

चंद्र – व्यक्ति विज्ञान या आधुनिक कला में रुचि रखने वाला एक बुद्धिमान व्यक्ति होगा। एक अलग तरह का वैवाहिक जीवन रह सकता है, संभव है दोनों साथी किसी अलग शहर, देश या राज्य में रह रहे हो अर्थात लाॅंग डिस्टेंस रिलेशनशिप हो सकता है। एक सफल जीवन, लेकिन दोनों ही अपने रिश्तों में कई राज एक दूसरे से छुपा सकते हैं।

मंगल – यूरेनस के मंगल के साथ इस योग में व्यक्ति को सबसे प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करके ही सफलता प्राप्त हो सकती है। उसे जीवन में बहुत सारे अवसर मिल सकते हैं। ऐसे व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी हो सकते है। ऐसी स्थिति वाले व्यक्ति के भाई-बहनों में से एक को विदेश जाने का मौका मिल सकता है।

बुध – व्यक्ति की याददाश्त बहुत तेज होती है और वह बुद्धिमान होता है। ऐसे लोग अनुसंधान कार्यों में बेहद निपुण होते हैं और बुद्धि के कारण सफल जीवन जीते हैं।

बृहस्पति – गुरू के साथ इस योग का अर्थ हैं अच्छी वित्तीय स्थिति और अप्रत्याशित वित्तीय लाभ। इसी के साथ व्यक्ति को दोस्तों से भी मदद मिलने की पूरी संभावना होती है।

शुक्र – प्रेम विवाह के लिए यह स्थिति एकदम अनुकूल दिखाई देती है। ऐसे लोगों के पास एक बड़ी मित्र मंडली होती है। अगर जल राशि के साथ नवपंचम की स्थिति होता है तो व्यक्ति बहुत कामुक और संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसे लोगों में कलात्मक विचारों की अधिकता भी देखी जाती है।

शनि – ऐसे लोग बुद्धिमान और अच्छी प्रशासनिक शक्ति के स्वामी होते हैं। इन लोगों का रिसर्च से जुड़े कार्यों में काफी अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना होती है। अगर इसे सूर्य या बृहस्पति का समर्थन मिलता है तो यह लोकप्रियता देता है।


सूर्य –

यूरेनस के सूर्य के साथ वाली स्थिति में उस घर के भी नकारात्मक परिणाम देता है जिससे सूर्य का संबंध है। यदि 7वें भाव का स्वामी शुक्र हैं अथवा सातवें भाव पर किसी पापी ग्रह की दृष्टि है तो यह व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन में परेशानियाँ भर सकता है। कई मामलों में बात तलाक तक भी पहुंच सकती है। पिता की सेहत को लेकर चिंता रह सकती है।

चंद्र –

यह स्थिति मां के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है। यह मानसिक समस्याओं की ओर लेकर जा सकता है। इससे महिला का वैवाहिक जीवन अस्त – व्यस्त होने की संभावना है।

मंगल –

मंगल के साथ इस स्थिति में व्यक्ति गुस्सैल स्वभाव का आदमी होता है। साथ ही उसके जीवन में सदैव हादसों का अंदेशा रहता है। अगर यह किसी महिला की कुंडली में दूसरे, तीसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें घर में है तो उसका वैवाहिक जीवन खराब कर सकता है। वहीं इसका कुंडली के चौथे घर से संबंध व्यक्ति के मकान, घर, संपत्ति या वाहन में आग लगने की संभावना होती है।

बुध –

यदि यह स्थिति छठे, आठवें और बारहवें भाव में नहीं है तो यह अच्छा आईक्यू देने का कार्य करता है। यह स्थिति ज्योतिषियों के लिए अच्छी है, अगर वे इस शर्त को पूरा करते हैं तो।

बृहस्पति

यूरेनस के गुरू के साथ होने की स्थिति में संतान से संबंधित चिंता या परेशानी हो सकती है। महिलाओं के मामले में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी महिला को विकलांग जीवनसाथी मिलने की संभावना होती है साथ ही उन्हें गर्भधारण से जुड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

शुक्र –

मानसिक विकार से पीड़ित हो सकते हैं। कला में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। मेष, वृष, मिथुन, तुला या वृश्चिक राशियों के साथ यह संयोजन व्यक्ति को बहुत सेक्सी बनाता है। परंतु यौन समस्याएं भी हो सकती हैं।

शनि –

यह अच्छा आई क्यू देता है। तुला, वृश्चिक, मकर या कुंभ यह युति होने पर कुल सकारात्मक परिणाम देता है, वहीं मेष, वृषभ, कर्क या सिंह नकारात्मक परिणाम देते है।


लेकिन यदि यूरेनस का संबंध 7 वें भाव के स्वामी या उपस्वामी के साथ है तो व्यक्ति की शादी में किसी तरह की दुर्घटना आग, भगदड़ या मौत जैसी घटना की संभावना होती है।

इसी तरह यदि 5वें भाव का स्वामी या उपस्वामी हाउस यूरेनस के साथ संयोजन में है। तो शिशु के जन्म के समय समस्याओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।


सूर्य – यूरेनस के कारण व्यापार में समस्याएं, अहंकारी, हादसों से नुकसान और अन्य समस्याएं। यदि यह स्थिति महिला की कुंडली में है तो यह दाम्पत्य जीवन में परेशानियां पैदा कर सकता है।

चंद्र – काम में होशियार और बुद्धिमान, लेकिन संबंध बनाए रखने में अच्छे नहीं। जातक अपने स्थान, नौकरी, व्यवसाय में लगातार परिवर्तन करते रहते है। अगर यूरेनस चंद्र से चौथे स्थान पर है तो यह नकारात्मक परिणाम दे सकता है।

मंगल – यदि उनमें से कोई पहले, चौथे या आठवें भाव में है तो यह व्यक्ति को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।

बुध – ऐसे लोग सदैव उलझी हुई स्थिति में रहते हैं और आपराधिक उद्देश्य के लिए ज्ञान का उपयोग करते हैं।

बृहस्पति – बच्चों से संबंधित समस्याएं, अदालती मामलों में नुकसान और असफल जीवन।

शुक्र – दाम्पत्य जीवन में मायूसी छाई रहेगी। विपरीत लिंग के लोगों से धोखा मिल सकता है। यदि शुक्र मंगल की दृष्टि या युति अशुभ हो तो व्यक्ति का चरित्र प्रश्नों के घेरे में रहता है। ऐसे लोगों को छिपे हुए यौन संबंधों के कारण समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

शनि – यूरेनस के कारण लंबे समय तक चलने वाली बीमारी और जीवन में अस्थिरता रहेगी।

नोट – राहु, केतु, नेपच्यून और प्लूटो के साथ यूरेनस का संबंध ज्ञात नहीं है।

गणेशजी की कृपा से
गणेशास्पीक्स.कॉम टीम