किस्मत क्या है ? क्या भाग्य बदला जा सकता है ?

किस्मत क्या है ? क्या भाग्य बदला जा सकता है ?

मानव सभ्यता की शुरूआत से ही मनुष्य अपने भविष्य और आने वाले समय को जानने के लिए उत्सुक रहा है। सदैव से ही हम यह जानना चाहते हैं की हमारे भाग्य या किस्मत में क्या लिखा है ? क्या हम सफल हो पाएंगे या असफलता और दुख हमें घेरे रहेंगे ? हम अपने भाग्य या किस्मत को कैसे बदल सकते है ? क्या हम इसे अपने पक्ष में काम करने के लिए प्रेरित कर सकते है। लेकिन क्या कभी इन सवालों से पहले आपने  यह जानने की कोशिश की, कि आखिर यह किस्मत या भाग्य होता क्या है ? यह काम कैसे करता है। इस परिपेक्ष में ज्यादातर लोगों का जवाब नहीं ही होगा। क्योकि आपकी रूचि सिर्फ अपनी किस्मत का लिखा जानने में है या उसे कोसने या दोष देने में, लेकिन यहां गणेशास्पीक्स आपको आश्वस्त करना चाहता है कि, जब आप इस लेख की अंतिम लाईनें पढ़ रहे होंगे तब आप किस्मत, उसकी कार्य विधि और उसे प्रभावित करने के लिए जरूरी ज्ञान प्राप्त कर चुके होंगे। तो आईए शुरू करते है….

आपकी किस्मत से कैसे जुड़ा है ब्रह्मांड…….

किस्मत या भाग्य का सीधा संबंध ब्रह्मांड से है, इसलिए सबसे पहले आपका यह समझना जरूरी है कि, ब्रह्मांड क्या है ? लेकिन संपूर्ण ब्रह्मांड को समझना लगभग नामुमकिन है, इसलिए हम केवल वही समझने कि कोशिश करेंगे जिसका संबंध आपसे या आपके भाग्य से है। मनुष्य ने अपने ज्ञान के आधार पर ब्रह्मांड में 12 राशियों, 27 नक्षत्रों और 9 ग्रहों की पहचान की है। ब्रह्मांड को 360 डिग्री माना गया है इस आधार पर प्रत्येक राशि को 30 डिग्री और प्रत्येक नक्षत्र को 13डिग्री . 20“कला में बांटा गया है। इन राशियों और नक्षत्रों में ही हमारा सौमंडल, उसमें मौजूद सभी 9 ग्रह, सूर्य और चंद्रमा भ्रमण करते है। ये राशियां और नक्षत्र भी अपनी धुरी पर लगातार विचरण कर रहे है।

किस्मत या भाग्य क्या है ?

किस्मत या भाग्य क्या है, यह समझ हमारे पूवर्जों को प्राचीन समय से ही थी। इसीलिए उन्होंने कहा कि, मनुष्य के जन्म के साथ ही उसका भाग्य लिखा (तय) जाता है। बरसों पहले कही गई ये बातें तब से आज तक और आने वाले अनंत काल तक खुद की प्रासंगिकता प्रमाणित करती रहेंगी। क्योकि इसके पीछे जो तर्क काम करता है, वह है “ब्रह्मांड“ चूंकि, ब्रह्मांड गतिशील है और प्रत्येक क्षण अपनी स्थिति बदल रहा है। लेकिन जब आपका या दुनिया में किसी का भी जन्म होता है तो यह पूरा ब्रह्मांड और इसमें मौजूद 12 राशियां, 27 नक्षत्र और पूरा सौरमंडल अपनी जगह पर थम जाता है या कहें रूक जाता है। इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि, किसी के जन्म लेने पर ब्रह्मांड अपनी गतिशीलता खो देता है, बल्कि इसका अर्थ यह है कि, वह क्षण जब कोई शिशु अपनी मां के गर्भ से चेतना लेकर भू-लोक पर जन्म लेता है, ठीक उस समय ब्रह्मांड में मौजूद राशियों, नक्षत्रों और ग्रहों की मौजूदा स्थिती ही उसकी किस्मत या भाग्य है। वैदिक ज्योतिष में इस स्थिती को जन्म लग्न या जन्म कुंडली कहा गया है। हम इसे सामान्य बोल-चाल की भाषा में या ज्ञान-बोध के आभाव में भाग्य या किस्मत समझते है।

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अब आपके जन्म के समय ही लिख दिए गए आपके भाग्य या किस्मत (जन्म लग्न) को ब्रह्मांड में मौजूद, राशि, नक्षत्र और ग्रहों की वर्तमान स्थिती प्रभावित करती है। यह आपकी किस्मत में स्थाई तौर से मौजूद शरीर, धन-कुटुंब, पराक्रम, सुख, संतान-विद्या, शत्रु, पत्नी और मृत्यु तक को प्रभावित कर सकने की क्षमता रखते है।

क्या भाग्य या किस्मत को बदला जा सकता है……..

अब जब हम यह जानते है कि भाग्य या किस्मत क्या है तो उपरोक्त सवाल की प्रासंगिकता ही नहीं बचती। क्यांेकि आपका भाग्य तो आपके पैदा होने के क्षण से जुड़ा हुआ है और आप या दुनिया में मौजूद कोई भी व्यक्ति उस पल को नहीं बदल सकता। यदि आप जन्म समय नहीं बदल सकते, तो आप अपना भाग्य या किस्मत भी नहीं बदल सकते है। लेकिन आप अपने भाग्य के गर्भ में छुपे राज जरूर जान सकते है। आप पता लगा सकते है कि, कब आपके लिए समय उचित रहने वाला है और कब आपको सर्तकता बरतनी है।

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क्या भाग्य या किस्मत को प्रभावित किया जा सकता है ?

जहां तक भाग्य को प्रभावित करने की बात है, इसके लिए वैदिक ज्योतिष में कुछ उपायों का उल्लेख किया गया है। लेकिन यहां इस बात को स्पष्ट करना जरूरी है कि हम अपने भाग्य से जुड़ी अच्छी-बुरी परिस्थिति को सिर्फ प्रभावित कर सकते है जिससे उसके बुरे परिणामों की तीव्रता और अवधि को कम और अच्छे परिणामों की अवधि और तीव्रता को बढ़ाया जा सके। ऐसे कई उपाय वैदिक ज्योतिष शास्त्र अपने अंदर संजोए बैठा है। इन उपायों का लाभ विद्वान और ज्ञानी लोग प्रचीन समय से ही उठाते आएं है। इन उपायों में ऊर्जावान रत्न, वैदिक यंत्र, रूद्राक्ष, वैदिक उपाय किट जैसे साधनों से आप भी अपने भाग्य के अच्छे बुरे प्रभावों को नियंत्रित कर सकते है।
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लेकिन इन उपायों के उपयोग के पहले आपको अनुभवी और सटीक सलाह की आवश्यकता होगी जो आपकी मौजूदा समस्याओं को जानकर भविष्य के गर्भ की टोह ले सके। आपकी कुंडली का अध्ययन कर आपको आने वाली परेशानियों के प्रति सजग करते हुए उनका प्रभाव कम करने के लिए मार्ग प्रदर्शित कर सके।

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वेब डेस्क
अमन वर्मा
गणेशा स्पीक्स डाॅट काॅम

02 Sep 2019

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