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कुंडली के चौथे भाव में केतु का महत्व

कुंडली के चौथे भाव में केतु का महत्व

पश्चिमी देशों में साउथ नोड के नाम पहचाने जाने वाले छाया ग्रह को वैदिक ज्योतिष में केतु नाम से संबोधित किया जाता है। वैसे तो केतु भौतिक ग्रह ना होकर महज एक बिंदु मात्र है। लेकिन वैदिक ज्योतिष में इन बिंदुओं को किसी ग्रह के समान ही मान्यता प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष में केतु को शिखि, ध्वज, शनि सुत, प्राणहार या यमात्मज के नाम से भी संबोधित किया गया है। जन अवधारणों के अनुसार इसे पापी ग्रह भी कहा जाता है। यह एक तामसी गुणों वाला पुरूष संज्ञक ग्रह है। शमशान एवं घर के कोने में उसका स्थान होता है। यह एक निसर ग्रह है और इसके रत्न लुहसनिया का रंग भी विचित्र है। केतु वक्रगति अर्थात विपरीत गति से चलने वाला ग्रह है। वहीं कुंडली का चौथा भाव सुख भाव या मातृस्थान के नाम से जाना जाता है। इस भाव का संबंध माता, सुख, मकान, वाहन, जमीन, कृषि, बाग-बगीचा, स्कूल-कॉलेज की शिक्षा, मन, तृष्णा, लालसा, महत्वाकांक्षा, घनिष्ठ प्रेम और मातृ सुख जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होता है। जब केतु कुंडली के चौथे स्थान पर हो तब वे मोटे तौर पर जातक के धन, राजनैतिक मामले, जीवन शैली, क्षमता और आध्यात्मिकता से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है। इन क्षेत्रों में केतु के मिले – जुले परिणाम भी देखने को मिल सकते है। यह केतु की स्थिति पर निर्भर करता हैै, कि वह अन्य ग्रहों और नक्षत्रों के अनुसार चौथे घर में अनुकूल परिस्थिति में है या किसी प्रतिकूल परिस्थिति का निर्माण कर रहा है।

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सकारात्मक

कुंडली के चौथे भाव में केतु कई प्रकार से कई अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। लेकिन चौथे स्थान से संबंधित क्षेत्रों और केतु के स्वभाव, गुण और क्षमताओं का आंकलन करने के बाद कहा जा सकता है कि वह कुंडली के चौथे स्थान पर यदि अनुकूल परिस्थिति में है तो वह जातक को अत्यधिक आध्यात्मिक, परिपक्व बनाता है और वे हमेशा एक नेक मार्ग पर चलते हैं। चौथे स्थान पर केतु जातक को ज्ञानवान बनाता है। अनुकूल परिस्थिति में केतु मन को शांति और समझदारी प्रदान कर सकते हैं। चतुर्थ भाव में केतु जातक को पुरुषत्व प्रदान करता है। ऐसे जातक सदैव महिलाओं को सम्मान की दृष्टि देखते है और उनका सम्मान करते है। इसके अलावा, केतु अप्रत्याशित लाभ देने का भी कार्य करता है, ऐसे जातकों को अचल संपत्ति और व्यवसाय में अप्रत्याशित लाभ प्राप्त हो सकते है। चतुर्थ भाव में केतु का स्थान जातक को समाज में समृद्ध, प्रसिद्ध और प्रशंसनीय व्यक्ति बनाता है। यह देखा जाता है कि ऐसे जातकों को जीवन की सभी विलासिताएं और आराम प्राप्त होते है। ऐसे जातक एक शानदार जीवन शैली जीने की संभावना रखते है। कुंडली के चौथे भाव में राहु जातक को अपने रिश्तों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता प्रदान करते है । उनके अपनी माता पत्नी अथवा पति से बेहतर रिश्ते हो सकते है।कुंडली के चौथे घर में राहु विवाहित जीवन को आनंदित, मजेदार और रोमांटिक बना सकता है। ऐसे जातक एक दूसरे का सम्मान करते है और समझदारी से मिल जुलकर जीवन के फैसले लेते है। वे एक दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते है और उनके रिश्ते अन्य जोड़ों की तुलना में लंबे समय तक चलते हैं। भले ही चौथे घर का शासक चंद्रमा हो लेकिन तब भी जातकों को चतुर्थ भाव में केतु होने पर अच्छे परिणाम मिल सकते है।

नकारात्मक

जिस प्रकार कुंडली के चौथे भाव में केतु जीवन पर अनुकूल प्रभाव डाल सकते है। उसी प्रकार वह कुंडली में प्रतिकूल परिस्थितियों में दुष्परिणाम भी दे सकता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चौथे घर में केतु जातक को हमेशा अलग-अलग स्थानों की यात्रा करवाते हैं। ऐसे जातक क्षमताहीन और मानसिक तौर पर भी कमजोर हो सकते है। वे अपनी आध्यात्मिकता और बुद्धिमत्ता भी खो सकते हैं। चौथे घर में केतु की उपस्थिति मां और पत्नी के साथ जातक के संबंधों को भी प्रभावित करती है। कुछ मामलों में, व्यवसाय में हानि के कारण जातकों को बहुत अधिक चिंता और अवसाद का अनुभव हो सकता है। क्योंकि केतु पुरुषवादी ग्रह इसलिए यह जातकों की सोच और निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। इसके अलावा, चौथे भाव में केतु जातक सदैव कम आत्म-सम्मान का अनुभव करते हैं, जिसके कारण वे जीवन में कठोरता के साथ निर्णय लेने की क्षमता खो सकते हैं। यह उनकी समृद्धि को प्रभावित कर सकता है। वैसे तो चंद्रमा केतु के लिए तुल्य है, लेकिन कुंडली के चौथे भाव में प्रतिकूल परिस्थिति में बैठे केतु के कारण जातक के जीवन में कुछ दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते है। क्योंकि चंद्रमा चौथे भाव के स्वामी है इसलिए इस स्थान पर केतु की प्रतिकूल परिस्थिति जातक के जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। यह संयोजन विभिन्न क्षेत्रों में मूल निवासियों के जीवन को प्रभावित करता है। यदि यह संयोजन होता है, तो उनके जीवन की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं और वे आर्थिक रूप से अस्थिर भी हो सकते हैं। कुंडली के चौथे भाव में केतु की मौजूदगी जातक को अज्ञानता और मानिसिक त्रास की ओर लेकर जा सकती है। चतुर्थ भाव में केतु की नियुक्ति उनकी मानसिक क्षमताओं, बुद्धि, स्वास्थ्य और धन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

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निष्कर्ष

चौथे भाव में केतु की उपस्थिति से जातकों पर प्रतिकूल और सकारात्मक दोनों प्रभाव पड़ते हैं। लेकिन केतु जातक के जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और यह आध्यात्मिकता का पक्षधर है। जिस प्रकार जीवन में शिक्षक अथवा गुरु की उपस्थिति आपकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वैसे ही केतु भी जातकों को ज्ञानवान और धैर्यवान बनाने का कार्य करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, केतु का प्रभाव जातक के जीवन में लगभग सात साल तक रहता है और चंद्रमा के साथ गठबंधन होने पर अधिक प्रतिकूल परिणाम दे सकता है। हालांकि, चौथे घर में केतु के प्रतिकूल प्रभाव को कम या परिवर्तित किया जा सकता है। कुछ सामान्य ज्योतिष उपायों के माध्यम से जीवन को आसान और खुशहाल बनाया जा सकता है। इस दौरान ध्यान केंद्रित रखें और जीवन के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण रखें।

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गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम