कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन की महत्ता

कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन की महत्ता

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को शक्ति, अधिकार, आत्मविश्वास और पिता का स्थान दिया गया है। सूर्य राजनीति को भी दर्शाता है। दूसरी ओर राहु है जो एक हानिकारक ग्रह है, यह लालच और जोड़-तोड़ करने वाला है। यह भी कहा जाता है कि राहु निर्माण द्वारा किसी व्यक्ति को दिए गए लक्ष्यों और लक्ष्यों का भी प्रतीक होता है। यह हमारे सांसारिक अस्तित्व के उद्देश्य को पूरा करता है। इसलिए कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन होने पर जातक शक्ति और यश की कामना करते हैं। जिसे पूरा करने के लिए कभी-कभी वे अनुचित साधनों और उपायों का उपयोग करते हैं।

प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन के कारण प्रभावित क्षेत्र

व्यक्ति-निष्ठा
सामाजिक छवि
संवाद-शीलता और अभिव्यक्ति
व्यावसायिक विकास और सफलता

सकारात्मक लक्षण/प्रभाव

प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन जातक को स्व-अभिव्यक्ति और नेतृत्व के अवसर प्रदान करता है। इस ग्रह संयोजन के कारण जातकों की भाग्य वान और भाग्यशाली होने की संभावना होती है। यदि भाग्य उन पर कृपा बरसाता है, तो फिर वे शाही रूप से ही चमकते हैं।इसके अलावा, जिस व्यक्ति की कुंडली में यह संयोजन है, वह आत्मविश्वास से पूर्ण और एक बहुत ही करिश्माई व्यक्तित्व वाला होता है। सूर्य-राहु संयोजन के कारण जातक प्रमुख राजनीतिक नेता बनने के लिए उपयुक्त होते हैं। वास्तव में यदि वे राजनीति में अपना कैरियर बनाते हैं, तो बहुत ऊपर तक पहुँच सकते हैं।क्या आप भी करियर में समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो पाएं समाधान हमारे ज्योतिषी विशेषज्ञों से।

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कुंडली के पहले भाव में सूर्य-केतु संयोजन के कुछ सकारात्मक प्रभावों के कारण जातक दूसरों के साथ बौद्धिक रूप से जुड़ना, संघ बनाना, सार्वजनिक व्यवहार और संपर्क स्थापित करना और उन्हें बनाए रखना पसंद करते हैं।

नकारात्मक लक्षण/प्रभाव

जिन जातकों की कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन होता है वे आत्म-जुनूनी और स्वार्थी होते हैं। वे स्वयं को अधिक महत्व देते हैं, तथा दोहरे व्यक्तित्व वाले होते हैं। ऐसे जातक वास्तव में होते कुछ और हैं तथा दिखावा कुछ और होने का करते हैं। इस बात की संभावना अधिक होती है की ऐसे जातक नकली और कृत्रिम क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकते हैं। जो समाज में उनकी विश्वसनीयता और छवि पर प्रश्न चिन्ह खड़े कर सकती है।प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन वाले जातक अपने स्वयं के विकास और विस्तार में गहनता से लगे हुए होते हैं। नतीजतन, वे सही-गलत का फैसला करने की क्षमता खो बैठते हैं। जिससे उनकी ऊर्जा बिखर सकती है, और उनके प्रयास निष्प्रभावी हो सकते हैं, तथा वे अपना ध्यान भी खो सकते हैं। इसके अलावा, वे अपने प्रयासों को वित्तीय और मौद्रिक लाभांश में बदलने में सक्षम तो होंगे, लेकिन इन उपलब्धियों के बदले इन्हें अपने स्वास्थ्य और नैतिक मूल्यों की कीमत चुकानी पड़ सकती है।ऐसे जातकों के जीवन में कई बार ऐसे अवसर भी आते हैं जब इन्हें अपना निवास स्थान बदलना पड़ता है। साथ ही, कुछ स्थितियों में, यह संभावना भी होती है कि पुरुष जातक महिलाओं के साथ संबंध के कारण अपनी संपत्ति खो सकते हैं। इसके अलावा, कुछ कठिन परिस्थितियों में, जातक अपने जीवन साथी से अलग हो सकते हैं। प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन के कारण जातकों के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। नतीजतन, जातक तीर्थ यात्राओं और धार्मिक यात्राओं पर निकल सकते हैं और वहां से नई ताकत और शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। की आप भी इस साल नयी शक्तियां और मजबूती ग्रहण कर पाएंगे। जानने के लिए पाएं अपना साल 2020 का राशिफल।

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वैदिक ज्योतिष में सूर्य और राहु दोनों परस्पर विरोधी ग्रह हैं। ये एक दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते हैं, और इन दोनों खगोलीय पिंडों के बीच का यह संघर्ष जातकों के जीवन में समस्या पैदा करता है। यह समस्या आंतरिक भी हो सकता है। जिसके चलते जातक किसी व्यक्तित्व विक़ार से भी पीड़ित हो सकता है।

निष्कर्ष

प्रथम भाव में सूर्य-राहु संयोजन के कारण जातक बहुत ही स्पष्ट होते हैं। जिसके अंदर स्वयं के प्रति एक मजबूत भावना होती है। जो उन्हें राजनीतिक और संबंधित क्षेत्रों में सफलता दिलाती है। हालांकि उनका आत्म-अभिमान और बड़े पैमाने पर अहंकार, व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में उन्हें दूसरों के साथ भिड़ने के लिए उकसा सकता है। इसलिए अन्य दूसरे जातकों की तरह इन्हें भी अपनी कमजोरियों को दूर कर अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।

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