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खुशी, आनंद एवं जादुर्इ अनुभव के लिए कीमती एवं अनमोल रत्न

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एक नजर

  • अनमोल और दुर्लभ
  • चिकित्सीय और सजावटी गुणों से लबरेज
  • प्राकृतिक कठोरता, बनावट, रंग और चमक
  • प्राकृतिक, अकार्बनिक, कठोर, सघन खनिज मिश्रण
  • पर्ल और अंबर – कार्बनिक जवाहरात
  • ज्योतिष, आयुर्वेद और कलर थैरेपी में इस्तेमाल

रत्नों की चमक
रत्न खूबसूरत होते हैं एवं खूबसूरत चीज ताउम्र प्रसन्नता प्रदान करती है। सूर्य की किरणों या प्रकाश के संपर्क में आने पर रत्नों की छोटी सी चमक तथा रंगीनियां आंखों को मोहित करती हैं। उंगलियों में धारण किए रत्न अलग सा अहसास अनुभव करवाते हैं। इतना ही नहीं, उनकी प्राकृतिक चमक लाजवाब होती है। रत्न बहुत कीमती, दुर्लभ, सुंदर एवं शोभमान होते हैं, भले ही कच्चे या आकार रहित ही क्यों न हों।

कुछ मामलों में प्राचीन काल से ही रत्नों को बेशकीमती, जादुई और शुभ माना जाता आ रहा है। रत्न एेसी प्राकृतिक संपदा हैं, जिन्होंने राजाओं के साथ-साथ आम आदमी को भी अपनी तरफ आकर्षित किया है। रत्नों का इस्तेमाल सिंहासन, मुकुट और गहनों को सजाने के लिए किया जाता रहा है। अन्य प्रयोजनों के लिए भी रत्नों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया, जैसे कि दवा बनाने, पूजा या अनुष्ठान करने, चाकू या कटर बनाकर कुछ सख्त चीजों को काटने (उसकी प्राकृतिक कठोरता के कारण) आदि के लिए।

दुर्लभ रत्नों के फायदे या गुण सदियों से मानवीय जीवन के लिए फायदेमंद रहे हैं, ऐसा नहीं कि आधुनिक युग में हम इनके संदर्भ में कुछ अधिक बढ़ा चढ़ाकर बता रहे हैं। अत्यंत सुंदर और रंगीन होने के अलावा, रत्न जीवन के लिए भी बहुमूल्य हैं एवं उनका शुभत्व भी मानव को अपनी तरफ आकर्षित करता है। ज्योतिष क्षेत्र में रत्नों का इस्तेमाल व्यावहारिक उपचार उपाय के रूप में किया जाता है। ज्योतिष में इसको उत्सुकतापूर्वक धारण करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इनके कारण मानव जीवन की बहुत सारी समस्याएं हल हो सकती हैं।

ज्योतिष में रत्नों का इतना महत्व क्यों ? रत्न हमारे के लिए हमेशा पहेली क्यों हैं ? क्या सच में रत्न इतने लाभकारी हैं, यदि हां, तो कैसे ? आखिर कैसे होते निर्मित होते हैं रत्न? अपने तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए लेख को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

किंवदंती और रत्न
रत्नों को लेकर भारतीय पौराणिक कथाओं में कई संदर्भ उपलब्ध हैं, जिनमें रत्नों के निर्माण, इस्तेमाल, शक्ति एवं फायदों का उल्लेख है। उनके साथ ग्रहों एवं र्इश्वर का संबद्ध है। एक किंवदंती के अनुसार, सबसे पहले प्राचीन दानव राजा बाली के शरीर से रत्न प्राप्त हुआ था। माना जाता है कि राजा बलि ने भगवान इंद्र के सामने नतमस्तक होते हुए उनको बलि लेने का आग्रह किया, जिसके पश्चात भगवान इंद्र ने बाली का सिर धड़ से अलग करते हुए उनको मृत्यु दी।

यूरोपीय, विशेष रूप से रोमन साहित्य में रत्नों के संदर्भ में उल्लेख है कि राजा रानियों को इन कीमती पत्थरों से काफी लगाव होता था एवं बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल किया जाता था। एक महान इतिहासकार प्लिनी ने भी रत्नों के संदर्भ में अपने ग्रंथों में तत्कालीन लोकप्रिय विश्वासों के संबंध में विस्तृत ब्यौरा दिया है। ग्रीक पौराणिक कथाओं में माना जाता है कि अंबर जैसे रत्न का निर्माण ग्रीक के र्इश्वर की आंख से गिरे एक आंसू हुआ है।

प्राचीन सभ्यताओं में वैदिक, ग्रीक और रोमन समेत अन्य सभ्यताआें का मानना है कि रत्न बहुत सारे रोगों से मानवीय जीवन की रक्षा करते हैं एवं बुरे प्रभावों तथा बुरी आत्माआें से भी रत्न रक्षा करते हैं।

भारतीय चिकित्सा विज्ञान आयुर्वेद भी सामान्य कमजोरी दूर करने एवं बहुत सारे रोगों का इलाज करने हेतु पाउडर के रूप में रत्नों का उपयोग करता है। माना जाता है कि रत्नों से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत किया जा सकता है।

रत्न विज्ञान और रत्न के प्रकार
खनिज संपदा के इन छोटे छोटे टुकड़ों से मानव सदियों से प्रभावित है। रत्न विज्ञान या इस प्राकृतिक संपदा का अध्ययन रत्नों, निर्माण प्रक्रिया, उनकी संरचना एवं उनके गुण के संदर्भ में जानने लिए विज्ञान, भूगोल और इतिहास का इस्तेमाल करता है। यही कारण है कि अब खनिज संरचना एवं बहुत दुर्लभ रत्नों की 3 आयामी क्रिस्टलीय संरचना संबंधी स्टीक जानकारी उपलब्ध है।

तकनीक और वैज्ञानिक की प्रगति ने बहुत सारी समस्याएं हल कर दी हैं एवं आज हमारे पास रत्नों के संदर्भ में विशाल एवं व्यापक जानकारियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा कई रत्न और उनके सस्ते विकल्प कृत्रिम रूप से प्रयोगशालाओं में निर्मित किए जा रहे हैं। इन रत्नों को निपुण, पूर्ण एवं खामी रहित बनाने के लिए बहुत सावधानी से काटा जाता है तथा उनको अच्छे तरीके से पाॅलिश किया जाता है।

रत्न क्या हैं?
किस तरह बनते हैं रत्न ? किस तरह उनको उनकी विशेष चमक व उनका रंग दिया जाता है ?

यदि रत्नों के संदर्भ में वैज्ञानिक पक्ष से बात करें तो ज्यादातर रत्नों का निर्माण एक जैसी प्राकृतिक स्थिति द्वारा होता है या अन्य चट्टानों और पत्थरों की तरह उनकी कठोरता एवं सघन खनिज जटिलता एक सी होती है। हालांकि, प्राकृतिक पत्थर या क्रिस्टल को एक रत्न के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से आंतरिक संरचना, चिकनी संरचना, चमकदार और बेहतर पारदर्शिता, आकर्षण और एक निश्चित टिंट / रंग / चमक (आमतौर पर) इत्यादि रखना पड़ता है। और, घटना की दुर्लभता चमचमाती सघनता पत्थर को विशेष और बहुकीमती बनाती है।

ज्योतिष में रत्नों का महत्व जानने के लिए पढ़ें –

जैसे पहले भी बताया गया है कि निश्चित रासायनिक संरचना और एक नियमित रूप से आंतरिक क्रिस्टल संरचना के साथ अधिकतर रत्न प्राकृतिक अकार्बनिक खनिज होते हैं। हालांकि, कुछ बेशकीमती रत्न हैं, जैसे कि मोती एवं अंबर, जो जैविक स्रोत से आते हैं अर्थात पौधों एवं जानवरों से। इसलिए उनको जैविक रत्न के रूप में जाना जाता है।

इसलिए तीन प्रकार के प्रमुख रत्न हैं।

    • खनिज / चट्टानों
      रत्न मूल रूप से खनिज होते हैं, जो चट्टानों में पाए जाते हैं या चट्टानों से मणि बजरी के रूप में प्राप्त होते हैं। अधिकतर रत्न इस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। रत्न या मणि गुणवत्ता वाले खनिज प्राकृतिक चट्टानों के तीन प्रकार के किसी भी रूप से प्राप्त होते हैं, जिनमें आग्नेय, रूपांतरित और तलछटी शामिल हैं।
    • कार्बनिक
      मोती, मूंगा, क्रिस्टल, जेट और अंबर रत्न प्राकृतिक रूप से उत्पादित होते हैं, जो पौधों एवं जानवरों से प्राप्त होते हैं।
    • कृत्रिम
      कृत्रिम रत्नों को प्रयोगशालाओं में तैयार किया जाते है। हालांकि, इनकी रासायनिक संरचना और क्रिस्टल संरचना बिलकुल प्राकृतिक रत्नों सी होती है। इसके फलस्वरूप उनके ऑप्टिकल और भौतिक गुणों काफी समान होते हैं। हालांकि, इन रत्नों को उनके समावेश के अंतरों से पहचाना जा सकता है।

रत्न की मुख्य विशेषताएं

    • कठोरता
      यह विशेषता एक रत्न के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए क्रिस्टलीय चट्टान/ पत्थर में महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। कठोरता का मतलब है कि रत्न स्वयं को खरोंच से बचाने में कितना सक्षम है। कठोरता जितनी अधिक होगी, स्थायित्व उतना अधिक होगा। हीरा सबसे अधिक कठोर रत्न है, जबकि इस मामले में नीलम दूसरे नंबर स्थान पर आता है।
    • विशिष्ट गुरुत्व
      रत्न का घनत्व भी एक महत्वपूर्ण निर्धारण कारक है, जब इसकी कीमत का आकलन करने की बात आती है। खनिज एकाग्रता एवं विशिष्ट गुरूत्व, जितना अधिक बेहतर होता है, रत्न की बनावट एवं ढांचा उतना अच्छा दिखार्इ पड़ेगा, जो रत्न के महत्व एवं मूल्य में वृद्धि करवाएगा।
    • क्रिस्टल आकार
      प्राकृतिक रत्न एक निश्चित क्रिस्टलीय संरचना होता है, जिसको कृत्रिम रूप से नकल करना लगभग असंभव है। यह एक एेसा पहलू है, जो वास्तविक / प्राकृतिक और नकली / सिंथेटिक रत्नों के बीच के अंतर को समझने में मदद करता है। इसके अलावा, एक रत्न की क्रिस्टलीय संरचना नियत स्वाभाविक रूप से होती है, जिसके परिणामस्वरूप ही पत्थर नरम एवं समरूप बनावट वाला होगा, जो कटार्इ एवं आकार के लिए महत्वपूर्ण है।
  • कट, स्पष्टता, चमक आदि
    स्वाभाविक रूप से रत्न कच्चे एवं पाॅलिश रहित होते हैं, किंतु रत्न शक्ति, घनत्व और चिकनाई जैसे गुणों से लबरेज होते हैं। इस कारण उनको 3-आयामी तरीके द्वारा काट कर सुंदर रूप दिया सकता है, अन्य प्रक्रिया से गुजारा एवं पाॅलिश किया जाता है, जिसके बाद रत्न अधिक आकर्षित हो जाते हैं। इस तरह की शानदार कटार्इ वाले रत्नों को बड़े पैमाने पर गहने बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।स्पष्टता –
    एक रत्न के मूल्य को सुनिश्चित करने में स्पष्टता एक महत्वपूर्ण कारक है। जो रत्न अशुद्धियों रहित एवं स्पष्ट होता है, उस रत्न की कीमत भी अधिक होती है क्योंकि वे दुर्लभ होता है। जैसे कि रत्न स्वाभाविक रूप से खनिज जटिल से निर्मित होते हैं, इसलिए रत्नों में बहुत सारी अशुद्धियां एवं खामियां आना स्वाभाविक है। लेकिन, जो रत्न प्राकृतिक रूप से अधिक स्पष्ट एवं पारदर्शी होते हैं, उनका बेशकीमती होना स्वाभाविक है।

    चमक –
    चमक एवं पारदर्शिता उच्च गुणवत्ता वाले रत्न के महत्वपूर्ण पहलु हैं। कुछ रत्न प्राकृतिक चमक से लबरेज होते हैं, इसलिए उनकी कीमत काफी ऊंची रहती है।

वैदिक ज्योतिष में उपचार के रूप मे रत्न बहुमूल्य हैं। कैसे एवं क्यों ? जानने के लिए ज्योतिष में रत्नों के महत्व हेतु महत्वपूर्ण जानकारियां पढ़ें। यहां….

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