शारदीय नवरात्रि 2026 (11 अक्टूबर से) में नवदुर्गा के हर स्वरूप की पूजा उनके विशेष मंत्र से की जाती है, जिसका जप माला से 108 बार किया जाता है। पहले दिन “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” से शुरू होकर नौवें दिन “ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः” तक हर दिन का मंत्र अलग है। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के मंत्र से होती है, जिसके बाद उस दिन की देवी के मंत्र और बीज मंत्र का जाप किया जाता है।
नवरात्रि का पावन पर्व भगवती की नौ दिव्य शक्तियों की उपासना का उत्सव है। इसके प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक नए और विशिष्ट स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। नवदुर्गा का हर स्वरूप उन गुणों को दर्शाता है जिन्हें आप अपने जीवन में उतारना चाहते हैं—जैसे निर्भयता, सद्बुद्धि, जीवन में संतुलन, सफलता और आध्यात्मिक शक्ति।
मंत्र जाप नवरात्रि पूजा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है। नवदुर्गा के हर स्वरूप का अपना एक सिद्ध मंत्र है, जिसका पूजा के समय 108 बार जाप किया जाता है। इसके साथ ही, प्रत्येक दिन के लिए एक विशेष शुभ रंग निर्धारित होता है और हर दिन का संबंध एक विशिष्ट ग्रह से भी होता है।
नीचे नवदुर्गा के नौ मंत्र, उनके बीज मंत्र और उनके पीछे छुपे धार्मिक अर्थ दिए गए हैं।
नवरात्रि में मंत्र जाप की शुरुआत कैसे करें?
नवरात्रि पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना की जाती है। सनातन परंपरा के अनुसार, नवदुर्गा पूजा का शुभारंभ प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना से होता है। किसी भी देवी-देवता की पूजा शुरू करने से पहले विघ्नहर्ता श्री गणेश का आह्वान करना अनिवार्य माना गया है।
श्रद्धालु सर्वप्रथम गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” से शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद गणेश गायत्री मंत्र का जाप भी किया जा सकता है:
“ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।”
श्री गणेश पूजन के पश्चात, आप उस दिन पूजी जाने वाली माँ दुर्गा के विशिष्ट स्वरूप का ध्यान करें और पूरी एकाग्रता व श्रद्धा के साथ उनके निर्दिष्ट मंत्र का 108 बार जाप करें।
शारदीय नवरात्रि 2026 कैलेंडर: तारीख, देवी और रंग
| दिन | तारीख | तिथि | देवी | रंग |
|---|---|---|---|---|
| पहला दिन | रविवार, 11 अक्टूबर 2026 | प्रतिपदा (घटस्थापना) | मां शैलपुत्री | नारंगी |
| दूसरा दिन | सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 | द्वितीया | मां ब्रह्मचारिणी | सफेद |
| तीसरा दिन | मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 | तृतीया | मां चंद्रघंटा | लाल |
| चौथा दिन | बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 | चतुर्थी | मां कुष्मांडा | रॉयल ब्लू |
| पांचवां दिन | गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 | पंचमी | मां स्कंदमाता | पीला |
| छठा दिन | शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 | षष्ठी | मां कात्यायनी | हरा |
| सातवां दिन | शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 | सप्तमी (महासप्तमी) | मां कालरात्रि | स्लेटी (ग्रे) |
| – | रविवार, 18 अक्टूबर 2026 | सप्तमी जारी; अष्टमी सुबह 08:29 से प्रारम्भ | – | – |
| आठवां दिन | सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | अष्टमी (दुर्गाष्टमी) | मां महागौरी | बैंगनी |
| नौवां दिन | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | नवमी (महानवमी) | मां सिद्धिदात्री | मोरपंखी हरा |
| दशहरा | मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | दशमी दोपहर 12:51 से प्रारम्भ | विजयादशमी | – |
पहला दिन – माँ शैलपुत्री मंत्र
नवरात्रि का पहला दिन नवदुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री को समर्पित है। नवरात्रि की शुरुआत में इनकी साधना करना आपकी आध्यात्मिक यात्रा का प्रथम सोपान माना जाता है, जिससे आत्मा की शुद्धि, नव-ऊर्जा और आत्म-विकास का अनुभव होता है।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
- बीज मंत्र: ह्रीं
दूसरा दिन – माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र
दूसरे दिन हमारा ध्यान ज्ञान, एकाग्रता और आंतरिक बल पर केंद्रित होता है। माँ ब्रह्मचारिणी अपने आंतरिक सौंदर्य, असीम धैर्य और अगाध ज्ञान के लिए पूजी जाती हैं—इसीलिए यह दिन उन साधकों के लिए बेहद खास है जो अपने भीतर स्पष्टता, शांति और संतुलन चाहते हैं।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
- बीज मंत्र: श्रीं
तीसरा दिन – माँ चंद्रघण्टा मंत्र
नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघण्टा का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इनके मंत्र का जाप करने से साधक को यश, कीर्ति और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा जीवन की समस्त नकारात्मक शक्तियां और भय समाप्त हो जाते हैं।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः
- बीज मंत्र: ऐं
चौथा दिन – माँ कूष्मांडा मंत्र
चौथा दिन माँ कूष्मांडा की साधना का है। श्रद्धालु जीवन के कष्टों और संघर्षों से उबरने की शक्ति पाने के लिए माँ की शरण में जाते हैं। इनका मंत्र उत्तम स्वास्थ्य, मन की शांति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी कूष्मांडायै नमः
- बीज मंत्र: ह्रीं
पांचवां दिन – माँ स्कंदमाता मंत्र
माँ स्कंदमाता की पूजा भावात्मक स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख और प्रेम को मजबूत करने में मदद करती है। इनके मंत्र का जाप मुख्य रूप से मानसिक शांति और परिवार व मित्रों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। इसलिए, यह दिन उन भक्तों के लिए बहुत व्यक्तिगत महत्व रखता है जो पारिवारिक खुशहाली की कामना करते हैं।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
- बीज मंत्र: क्लीं
छठा दिन – माँ कात्यायनी मंत्र
छठा दिन माँ कात्यायनी को समर्पित है। जो लोग सुखद दांपत्य जीवन, भावात्मक शांति और अपनों के साथ संबंधों में मधुरता चाहते हैं, उनके लिए माँ कात्यायनी का मंत्र अत्यंत फलदायी है। साधक अपने महत्वपूर्ण संबंधों को बेहतर बनाने की प्रार्थना के साथ इनकी आराधना कर सकते हैं।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
- बीज मंत्र: श्रीं
सातवां दिन – माँ कालरात्रि मंत्र
माँ कालरात्रि आदिशक्ति का सबसे शक्तिशाली और तेजस्वी स्वरूप हैं। इनका मंत्र उन लोगों के लिए अमोघ अस्त्र माना गया है जिन्हें शत्रुओं पर विजय पाने, दुष्ट शक्तियों से लड़ने और जीवन की बाधाओं व नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करने के लिए साहस की आवश्यकता होती है। इनकी पूजा विपत्ति के समय निडर रहने का बल देती है।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः
- बीज मंत्र: ऐं
आठवां दिन – माँ महागौरी मंत्र
अष्टमी तिथि माँ महागौरी के पूजन की है। इनकी उपासना से अलौकिक आनंद, परम शांति और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन अपनी प्रार्थनाओं को आंतरिक शांति, मन की निर्मलता और व्यापक आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्राप्त करने पर केंद्रित कर सकते हैं।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
- बीज मंत्र: श्रीं
नौवां दिन – माँ सिद्धिदात्री मंत्र
नवदुर्गा की पावन यात्रा का समापन माँ सिद्धिदात्री के पूजन से होता है। इनका मंत्र सफलता, प्रसिद्धि, समृद्धि और धन-धान्य की कुंजी माना जाता है। यही कारण है कि नवमी का यह दिन विजय, सिद्धि और समृद्धि की कामना के साथ पूरे नौ दिनों की भक्ति और साधना को एक सूत्र में समेट लेता है।
- मुख्य मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
- बीज मंत्र: ऐं
नवरात्रि के मंत्रों का 108 बार जाप क्यों किया जाता है?
सनातन धर्म की आध्यात्मिक परंपराओं में 108 की संख्या को अत्यंत पवित्र और पूर्ण माना गया है। एक पारंपरिक रुद्राक्ष या जप माला में भी 108 मनके (दाने) होते हैं। माला का उपयोग करने से साधक को मंत्र की लय टूटे बिना एकाग्र रहने और संख्या का सही हिसाब रखने में आसानी होती है।
हालाँकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्र जाप कभी भी केवल गिनती पूरी करने की होड़ या दौड़ नहीं होना चाहिए। शांत चित्त, एकाग्र मन और निश्चल भक्ति भाव के साथ किया गया जाप आपकी साधना को कहीं अधिक फलदायी और अर्थपूर्ण बनाता है।
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नौ देवियाँ, नौ मंत्र और शक्ति साधना की एक अखंड यात्रा
नवरात्रि की सबसे सुंदर बात यह है कि इसका प्रत्येक दिन माँ दुर्गा का एक नया स्वरूप लेकर आता है। यह यात्रा आत्म-जागृति से शुरू होकर सफलता और सिद्धि पर पूर्ण होती है, जिसके बीच में ज्ञान, पहचान, समृद्धि, भावनात्मक संतुलन, प्रगाढ़ संबंध और आध्यात्मिक प्रकाश का समावेश रहता है।
यद्यपि हर दिन के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जो बात इन पूरे नौ दिनों को आपस में जोड़ती है, वह है माँ भगवती (शक्ति) के प्रति अनन्य निष्ठा। जब पूरी श्रद्धा के साथ इन मंत्रों का उच्चारण किया जाता है, तो ये केवल शब्द नहीं रह जाते, बल्कि माँ दुर्गा के उस विशिष्ट स्वरूप के समक्ष आपकी हृदय से निकली सीधी प्रार्थना बन जाते हैं।
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FAQs
नवरात्रि में मंत्र जाप की शुरुआत कैसे करें?
नवरात्रि पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के बाद भगवान गणेश के मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ से शुरुआत करें। इसके बाद गणेश गायत्री मंत्र का जाप करें और फिर उस दिन पूजी जाने वाली माँ दुर्गा के विशिष्ट स्वरूप का ध्यान करते हुए उनके निर्दिष्ट मंत्र का 108 बार जाप करें।
नवदुर्गा के मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?
नवदुर्गा के हर स्वरूप के मंत्र का जाप पूजा के समय 108 बार किया जाता है। यह संख्या आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और मंत्र के प्रभाव को बढ़ाती है।
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा की जाती है?
नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इनकी साधना आपकी आध्यात्मिक यात्रा का प्रथम सोपान मानी जाती है, जिससे आत्मा की शुद्धि, नव-ऊर्जा और आत्म-विकास का अनुभव होता है।
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा का क्या महत्व है?
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। यह दिन ज्ञान, एकाग्रता और आंतरिक बल पर केंद्रित होता है। माँ ब्रह्मचारिणी अपने आंतरिक सौंदर्य, असीम धैर्य और अगाध ज्ञान के लिए पूजी जाती हैं।
माँ चंद्रघण्टा के पूजन से क्या लाभ होता है?
नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघण्टा का पूजन किया जाता है। इनके मंत्र का जाप करने से साधक को यश, कीर्ति और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है तथा जीवन की समस्त नकारात्मक शक्तियां और भय समाप्त हो जाते हैं।
