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जगन्नाथ पुरी रथयात्रा 2017: गणेशजी से जानें यात्रा से जुड़े रोचक तथ्य

जगन्नाथ पुरी रथयात्रा 2017: गणेशजी से जानें यात्रा से जुड़े रोचक तथ्य - GaneshaSpeaks

भारत में कर्इ धार्मिक महोत्सव मनाए जाते है जो विभिन्न धर्मों आैर संस्कृतियों को प्रकट करते है, इनमें जगन्नाथ रथयात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। जो कि प्रतिवर्ष आषाढ़ सुदी द्वितीया को जगन्नाथपुरी में धूमधाम से निकाली जाती है। अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर की आेर से भी इस दिन रथयात्रा का आयोजन किया जाता है। जगन्नाथ पुरी हिन्दुआें के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार सतयुग में, नीलांचल नामक एक पर्वत था आैर उस पर्वत की चोटी पर भगवान नील माधव (भगवान जगन्नाथ के अवतारों में एक) की मूर्ति को रखा गया था। जिनकी पूजा के लिए सभी देवता स्वर्ग से यहां आते थे। लेकिन कलयुग के प्रारंभ होते ही, ये मूर्ति स्वर्ग में ले जार्इ गर्इ आैर जिस स्थान पर पर्वत था वो अब जगन्नाथ मंदिर में तब्दील हो गया।

जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़ी एक कथा ये है कि एक बार द्वारका में, भगवान की आठ रानियों ने माता रोहिणी से गोपियों के साथ भगवान कृष्ण की अलौकिक लीला के बारे में वर्णन करने का आग्रह किया। लेकिन रोहिणी ये उपाख्यान बताने को तैयार नहीं थी। अत्यधिक आग्रह के बाद आखिरकार वो मान गर्इ। लेकिन रोहिणी ये वृतांत सुभद्रा के सामने नहीं सुनाना चाहती थी इसलिए उन्होंने सुभद्रा को दरवाजे के बाहर निगरानी रखने को कहा। जब माता रोहिणी कथा सुना रही थी, तभी भगवान श्री कृष्ण आैर बलराम दरवाजे के पास पहुंचे। इस पर सुभद्रा उनके द्वार के बीच खड़ी हो गर्इ आैर उन्हें प्रवेश करने से रोकने लगी। तभी वहां नारदमुनि पहुंचे। उन्होंने देखा कि तीनों भार्इ-बहिन मूर्तियों की तरह एक-साथ खड़े है। नारदजी इन तीनों के इस मनमोहक रूप को देखकर भावविभाेर हो गए आैर बोले कि- हे प्रभु आपके मूर्तिस्थ रूप के जो मैनें दर्शन किए है, ये स्वरूप सामान्यजन के लिए पृथ्वी पर सदैव सुशोभित रहे। इस पर भगवान ने तथास्तु कहा आैर ये तीनों यानि श्रीकृष्ण-बलराम आैर सुभद्रा जगन्नाथपूरी में विराजमान हुए। अपने जीवन के बारे में विस्तार से जानने के लिए आपके जीवन की विस्तृत भविष्यवाणी रिपोर्ट का लाभ उठाए।

वहीं इससे जुड़ी एक कथा ये भी है कि सतयुग में, इंद्रद्युम्न नामक एक महान आैर धार्मिक राजा था। जो कि भगवान विष्णु का परम भक्त था। एक बार राजा विष्णु पूजा के लिए नीलांचल पर्वत की आेर गए। लेकिन वहां विष्णु भगवान की मूर्ति ना दिखार्इ देने पर उन्हें बहुत निराशा हुर्इ क्यूंकि वो स्वर्ग में ले जार्इ जा चुकी थी। तभी वहां आकाशवाणी हुर्इ कि भगवान विष्णु पत्थर या लकड़ी के रूप में अवतरित होंगे। जिन्हें जगन्नाथ के नाम से जाना जाएगा। इसलिए वे अपने भक्तों को खुश करने के लिए लकड़ी के रूप में प्रकट हुए।

इस यात्रा में शामिल होकर भक्तजन निम्न लाभ प्राप्त कर सकते हैः

– भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की एक झलक पाकर, व्यक्ति तीव्र आध्यात्मिक प्रगति आैर आत्मिक शुद्घि प्राप्त कर सकता है।

– यदि कोर्इ व्यक्ति गाड़ी को पार करता हुआ देखता है आैर भगवान के स्वागत के लिए खड़ा होता है उसके सभी पापकर्म धुल जाते है।

– यहां तक कि जो व्यक्ति रथ को स्पर्श करता है या बल्कि रथ की रस्सियों को खींचता है उसे कर्इ धार्मिक कर्मों को करने का पुण्य मिलता है।

– रथयात्रा के दौरान नृत्य या जप करने से व्यक्ति सभी ध्यानों से परे उत्थान कर सकता है।

– इस समारोह की सफलता में योगदान देने वाली गतिविधियों का हिस्सा बनकर भगवान का दिव्य आशीष प्राप्त किया जा सकता है।

– इस रथयात्रा को सफल बनाने के लिए अपना समय, प्रयास या धन देकर व्यक्ति का परिवार आैर मित्र हमेशा के लिए पूरी तरह से धन्य हो जाएंगे।

– जो व्यक्ति ‘विष्णुसहस्त्रनाम’ का पाठ करता है उसे हमेशा के लिए स्वर्ग के सुख प्राप्त होते है।

– जो भगवान जगन्नाथ के चेहरे की एक झलक पाने के लिए धूल आैर कीचड़ में लुटता है। उसका उद्घार होता है आैर वो हमेशा के लिए स्वर्ग में रहता है।

रथयात्रा को अहमदाबाद में भी बड़ी धूमधाम आैर पूर्ण श्रद्घा के बीच मनाया जाता है। जिसके तहत भगवान को चावल आैर विभिन्न प्रकार की सब्जियों से बनी ‘खिचड़ी’ का भोग लगाया जाता है।

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
धर्मेश जोशी
गणेशास्पीक्स डाॅटकाॅम टीम

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