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प्रश्न कुंडली क्या है? जानें कैसे बनाएं, कैसे देखें और क्या जन्म तारीख जरूरी है

जन्म तारीख़, समय और स्थान की जानकारी ना हो तब काम आती है प्रश्न कुंडली! जानिए सब कुछ

प्रश्न कुंडली क्या है?

प्रश्न कुंडली वैदिक ज्योतिष की एक बहुत ही महत्वपूर्ण शाखा है। सामान्य शब्दों में कहें तो जब किसी जातक की कुंडली तैयार की जाती है, तब जातक द्वारा ज्योतिष से सवाल पूछा जाता है। उस सवाल के परिपेक्ष में जिस कुंडली का उपयोग किया जाता है, उसे प्रश्न कुंडली या प्रश्न लग्न कहा जाता है। इस कुंडली का उपयोग उस विशेष प्रश्न का उत्तर देने के लिए किया जाता है जो जातक ने ज्योतिष से पूछा है। लेकिन यहां इस बात का ध्यान रखना है, कि प्रश्न कुंडली, लग्न कुंडली से अलग होती है। इसे ठीक से समझने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। पहली बात प्रश्न कुंडली, दूसरी बात लग्न कुंडली और तीसरी बात पूछे गये प्रश्न का समय क्या है?

जब आप ज्योतिष से कोई विशेष प्रश्न करते हैं, तब सबसे पहले प्रश्न कुंडली तैयार की जाती है। प्रश्न कुंडली को दो अलग-अलग पद्धतियों से तैयार किया जा सकता है। पहली है वैदिक ज्योतिष पद्धति, और दूसरी है केपी या कृष्ण मूर्ति पद्धति। प्रश्न कुंडली के बारे में कुछ बातें जानना बेहद जरूरी है।

प्रश्न कुंडली बनाने के लिए क्या जन्म तारीख, समय और स्थान जरूरी है?

  • प्रश्न कुंडली के आधार पर आपके किसी भी विशेष प्रश्न का सटीक जवाब दिया जा सकता है। इस कुंडली के आंकलन के लिए जन्म कुंडली की आवश्यकता नहीं होती है।
  • दूसरी बात यह कि, इस प्रश्न कुंडली के माध्यम से ज्योतिष हां या नहीं में पूछे गये सवालों का जवाब सटीकता से दे सकता है।
  • तीसरी और महत्वपूर्ण बात यह है, कि यदि किसी जातक के पास अपने जन्म का समय, स्थान या दिन की सटीक जानकारी नहीं है। तब प्रश्न कुंडली के आधार पर उसके सवालों के सटीक जवाब दिये जा सकते हैं।
  • चौथी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि यदि जातक अपनी मर्ज़ी के बिना या किसी के दवाब में प्रश्न करें, झूठे सवाल पूछे या सिर्फ आज़माने के लिए प्रश्न करें, तब इस कुंडली के आंकलन गलत साबित हो सकते हैं।
  • दरअसल प्रश्न कुंडली हमारे कर्मों को दर्शाने का कार्य करती है, यहां कर्मों और उससे मिलने वाले परिणामों के आधार पर ही सवालों के जवाब दिये जाते हैं।
  • प्रश्न कुंडली के आधार पर कई सारे प्रश्नों का जवाब नहीं दिया जा सकता है, इसका उपयोग किसी खास सवाल के संदर्भ में ही किया जा सकता है।

प्रश्न कुंडली कैसे बनाएं और कैसे देखें

जातक के प्रश्नों का जवाब देने के लिए पहले प्रश्न कुंडली में लग्न देखा जाता है, फिर चंद्रमा की स्थिति का आंकलन किया जाता है। इसके बाद अन्य ग्रहों के शुभाशुभ प्रभावों का मूल्यांकन किया जाता है, फिर ताजिक योग और नवमांश में स्थिति का आंकलन करने के बाद जातक के प्रश्न का जवाब दिया जाता है। आप प्रश्न कुंडली को एक वृक्ष के रूप में देखें तो लग्न इसकी जड़ (मूल) है, चंद्रमा तना है, और नवमांश कुंडली इसकी टहनियां, इस क्रम के बाद ही आपको वृक्ष से फल मिलते हैं, और जातक को अपने प्रश्नों के सटीक जवाब।

प्रश्न कुंडली और लग्न कुंडली में अंतर

लग्न कुंडली या जन्म कुंडली जातक के जन्म स्थान, दिनांक और समय पर आधारित ग्रहों की रूपरेखा है। इसका सीधा अर्थ है कि जब आपका जन्म हुआ तब अमुख ग्रहों की स्थिति क्या थी। इसे ऐसे समझें की जब आपका जन्म हुआ, तब सूर्य की किरणें जिस हिस्से पर थी, वही राशि आपका लग्न है, या ज्योतिषीय भाषा में आपके जन्म के समय पूर्व में उदय होने वाली राशि आपकी लग्न राशि है। इसी के अनुसार चंद्रमा के उदय के अनुसार आपकी चंद्र राशि तय की जाती है। लग्न या जन्म कुंडली जातक की आत्मा की यात्रा का मानचित्र है। लग्न कुंडली के माध्यम से जातक के चरित्र, व्यवहार, स्वभाव, अच्छे-बुरे समय, भूत, भविष्य और वर्तमान की घटनाओं का आंकलन किया जा सकता है। जन्म या लग्न कुंडली आपके पिछले कर्मों का मिलाजुला परिणाम है, इसी के अनुसार जातक की कुंडली में सकारात्मक या नकारात्मक योग अथवा दोष पाये जाते हैं। जन्म कुंडली और लग्न में महादशा और अंतर दशा की सहायता से जातक के भूत, भविष्य और वर्तमान जीवन का सटीक आंकलन किया जा सकता है। यदि आपके मन में भी है कोई प्रश्न जीवन को लेकर तो पूछिए हमारे ज्योतिषी विशेषज्ञों से और पाईये उचित समाधान।

प्रश्न कुंडली से प्रश्न का फलादेश कैसे करें

जब जातक द्वारा गणनाकार के समक्ष प्रश्न रखा जाता है, ठीक उसी समय का उपयोग प्रश्न कुंडली बनाने के लिए किया जाता है। प्रश्न कुंडली के निर्माण के साथ ही जातक के प्रश्न का स्वभाव, जातक की स्थिति, व्यवहार, उसके बोलने का अंदाज़, कपड़े और मानसिक स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। जातक या प्रश्नकर्ता के रहन सहन, उसके स्वभाव और स्थिति का अंदाजा होने पर आप प्रश्न के अधिक नज़दीक पहुंच सकते हैं। इससे आपको कुंडली के भाव और ग्रहों की स्थिति का सटीक आंकलन कर प्रश्न का जवाब अधिक सटीकता से देने में मदद मिलती है। जिस तरह आधुनिक मनोवैज्ञानिक और एनएलपी विशेषज्ञ लोगों की बात, उनके व्यवहार, भावनाओं, बोलने-चलने के लहज़े और कपड़ों के आधार पर व्यक्ति की मनोस्थिति का अंदाजा लगा लेते हैं। ठीक वैसे ही प्रश्न कुंडली के माध्यम से जातक के प्रश्न का जवाब दे रहे ज्योतिष को भी जातक के हाव भाव, व्यवहार, बोलने का लहज़े, बैठने के तरीके और खुद को प्रस्तुत करने के तरीके से यह अंदाजा लगा लेना चाहिए कि जातक फिलहाल किसी स्थिति का सामना कर रहा है। क्या उसके हाथ कांप रहे हैं? क्या वह नजर चुरा रहा है? क्या वह बोलते समय हड़बड़ाता है? यदि आपको जातक में इनमें से कोई भी लक्षण नजर आते हैं, तो आपको समझना होगा की वह तनाव में है, या डरा हुआ है। इस तरह जातक के व्यवहार को परख कर आप उनके सवाल का जवाब अधिक सटीकता से दे सकते हैं।

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A Chemist and Jyotish Parasharam from London, he is a global grandmaster. Author of 19 stock market books, with a massive legacy of analyzing 275,000+ horoscopes and 2,500+ media shows, he is the ultimate, most trusted solver for Vastu, Tarot, Numerology, Pranic Healing, Tantra-Mantra, and Yantra-Gem-Rudraksha therapies.

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