होम » भविष्यवाणियों » ज्योतिष » Isa Masih की कुंडली में कारकांश, आत्मकारक और विष योग की प्रमुखता

Isa Masih की कुंडली में कारकांश, आत्मकारक और विष योग की प्रमुखता

पिछले दो सहस्राब्दियों से ईसा मसीह (Isa Masih) को दुनिया में सबसे पवित्र व्यक्ति के रूप में पूजा जाता है। दुनियाभर के लाखों लोग उनकी शिक्षा और उपदेशों से मंत्रमुग्ध हुए हैं। उनके प्रेम, करुणा और सहिष्णुता के आदर्शों को दुनिया में सब जगह स्वीकार किया गया। स्वामी विवेकानंद ने उन्हें शक्ति के स्रोत और पूर्णता का प्रतीक बताया। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर गणेश इस महान आत्मा की जन्म कुंडली का विश्लेषण करते हुए उनकी तुलना भारत के महानुभवों से करना चाहते हैं।

क्या आपकी कुंडली में भी है कोई महान ग्रह जानिए कुंडली….

जीसस क्राइस्ट की कुंडली में बृहस्पति आत्मकारक ग्रह के रूप में है और मकर नवमांश में स्थित है। यही वजह है कि मकर उनकी कुंडली में कारकांश (Karakamsa ) बन जाता है। कारकांश में केतु, शनि और बृहस्पति की स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि व्यक्ति एक पवित्र आत्मा या तपस्वी है। कारकांश में शनि और केतु जैसे पाप ग्रह की स्थिति से कोई भी व्यक्ति आसानी से दुनिया को त्यागने के लिए प्रेरित हो सकता है और मानवता की सेवा में खुद को समर्पित कर सकता है। यह स्थिति मोक्ष या मोक्ष के मार्ग की ओर ले जा सकती है।

आत्मकारक बृहस्पति ज्ञान का ग्रह है, जिसकी वजह से हंस योग और गजकेसरी योग बन रहा है, यह उनके मानसिक व नैतिक गुणों और बौद्धिक व आध्यात्मिक उपलब्धियों को दर्शाता है। आत्मा का अर्थ है आत्मा और कारक का अर्थ है कारक होता है यानी आत्माकारक का मतलब हुआ, आत्मा की इच्छा का कारक। वैदिक दर्शन के अनुसार आत्मा का पुनर्जन्म होता है, क्योंकि उसकी कुछ ऐसी इच्छाएं होती हैं, जो पिछले जन्मों में पूरी नहीं हुई थीं और उन्हें संतुष्ट करने का एक और अवसर पाने के लिए वह फिर से जन्म लेती है। ये इच्छाएं क्या हैं? क्या वे पूरी होंगी या आप उनसे संघर्ष करेंगे? यह आत्मकारक ग्रह से पता चलता है।

साल 2023 आपके लिए क्या लेकर आया है, जानिए वार्षिक राशिफल…

आत्मकारक के रूप में बृहस्पति हमेशा व्यक्ति को आत्मज्ञान (स्वयं का ज्ञान) हासिल करने की भूख देता है और यह स्थिति कई महान संतों में देखी गई। भगवान कृष्ण की कुंडली में गुरु आत्मकारक है और धनु नवमांश में स्थित है। पैगंबर महमूद के पास बृहस्पति भी आत्मकारक था। गौतम बुद्ध की कुंडली में आत्मकारक सूर्य धनु नवमांश में स्थित है। आदि शंकराचार्य की कुंडली में आत्मकारक शनि नवमांश में बृहस्पति के साथ स्थित है। इस प्रकार बृहस्पति के रूप में आत्मकारक या आत्मकारक के रूप में बृहस्पति के साथ संबंध एक व्यक्ति को मनोगत, दर्शन और दिव्य ज्ञान की ओर ले जाता है। महान संतों में एक और उल्लेखनीय समानता है, वो यह कि चंद्रमा का शनि के साथ संबंध पाया गया है। चन्द्र-शनि की युति को सामान्यत: विष योग कहा जाता है। सभी आध्यात्मिक गुरुओं में किसी न किसी रूप में चंद्रमा-शनि की संगति होती है। भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध, आदि शंकराचार्य में चंद्रमा-शनि विपरीत है, जबकि गुरु नानक व स्वामी विवेकानंद में चंद्रमा-शनि की युति है, जो यीशु मसीह की कुंडली में भी है।

चंद्रमा हमारे मन का प्रतीक है। मन हमारी इंद्रियों से संवाद स्थापित कर यह बताता है कि हमारे शरीर के साथ क्या हो रहा है। शनि अनुशासन का ग्रह है, जो शुरू में हमारे भीतर स्व और शेष संपूर्ण के बीच भेदभाव और विभाजन की क्षमता पैदा करता है, लेकिन जब यह भंग हो जात है और हमारी कोशिशों और व्यवहार में बदलाव के माध्यम से एकता बहाल हो जाती है, तो शनि का उच्च चरित्र पाया जा सकता है। हम इन सभी महान संतों के जीवन में आत्मनिरीक्षण के तीव्र स्तर को देख सकते हैं, जिन्होंने उनके जीवन को काफी हद तक बदल दिया है।

आपके जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए हमारे ज्योतिष विशेषज्ञों से बात करें…

गणेशजी के आशीर्वाद सहित,
गणेशास्पीक्स डाॅट काॅम


★ WRITTEN & ASTROLOGICALLY VERIFIED BY

Acharya Dharmadhikari

Acharya Dharmadhikari

Ganesha Verified Ganesha Verified
Vedic Astrologer & Vastu Consultant
rating

4.9 rating

years

35 Years

consultations

52k+ consultations

A Chemist and Jyotish Parasharam from London, he is a global grandmaster. Author of 19 stock market books, with a massive legacy of analyzing 275,000+ horoscopes and 2,500+ media shows, he is the ultimate, most trusted solver for Vastu, Tarot, Numerology, Pranic Healing, Tantra-Mantra, and Yantra-Gem-Rudraksha therapies.

  • Vedic Astrology
  • Vastu Shastra
  • Tarot Reading
  • Numerology
More About Acharya Dharmadhikari Talk to